रवींद्र जैन कहते थे, ईश्वर ने अगर कभी आंखें दी तो सबसे पहले येसुदास को देखना चाहूंगा

देवांशु झा आज मंदिर की घंटियों की तरह अलौकिक आवाज वाले मलयालयी गायक येसुदास का जन्मदिन है. उनके जन्मदिन पर पत्रकार देवांशु झा ने जिन शब्दों के जरिये उन्हें याद किया है, वह इस आलेख को अलौकिक और मस्टरीड बना देता है. सत्तर के दशक के आखिरी वर्षों में जब हिन्दी सिनेमा के दो बड़े गायक रफी और किशोर कुमार ढलान पर थे, तब दक्षिण से एक गायक मुंबई आया था. नाम था येसुदास. हिन्दी गानों से उनका परिचय कराने वाले संगीतकार थे रवीन्द्र जैन. रवीन्द्र जैन ने येसुदास की…

Read More

सामाजिक सहयोग पिछले 67 सालों से ज्ञान की रोशनी जला रहा है यह ग्रामीण पुस्तकालय

दो रोज पहले बिहार कवरेज ने सरकारी फंड के अभाव में राज्य की 497 पब्लिक लाइब्रेरीज के बंद हो जाने की खबर छापी थी. इस निराशाजनक खबर के बीच एक उम्मीद की रोशनी है इस ग्रामीण पुस्तकालय की कहानी जिसे पिछले 67 सालों से समाज अपने तरीके से संचालित कर रहा है. हमारे अनुरोध पर यह रिपोर्ट अनुराग मिश्र ने लिखी है. अनुराग मिश्र राष्ट्रीय राजमार्ग 57. लगातार चलती ट्रकों और बसों की धमक और शोर से हिलता एक मकान और उस मकान में अपने अपने किताबों में मशरूफ लोग,…

Read More

मधु लिमये ‘बम्बैया’, जिसने बिहार के मुंगेर औऱ बांका की जनता की रहनुमाई की

जयन्त जिज्ञासु आज भारतीय लोकतंत्र का जिस्म तो बुलंद है, पर इसकी रूह रुग्ण हो चली है. ऐसे में जोड़, जुगत, जुगाड़ या तिकड़म से सियासत को साधने वाले दौर में मधु लिमए की बरबस याद आती है. राजनीति के चरमोत्कर्ष पर हमें सन्नाटे में से ध्वनि, शोर में से संगीत और अंधकार में से प्रकाश-किरण ढूँढ लेने की प्रवीणता हासिल करने का कौशल मधु लिमये में दिखता है. प्रखर समाजवादी, उत्कृष्ट वक्ता व शानदार लेखक मधु लिमये (1 मई 1922 – 8 जनवरी 1995) की कल 22वीं पुण्यतिथि थी.…

Read More

बिहार का भागलपुर और झारखंड का पलामू अंचल गूंजता है ब्रह्मभोज की कहानियों में

डॉ शोभना जोशी संग्रह में कुल सत्रह कहानियाँ हैं. ये कहानियां भिन्न-भिन्न काल की हैं, जो इकट्ठा होकर समकालीन विसंगतियों का शाब्दिक कोलाज रचती हैं. ‘‘मेट’’,‘‘चाइभी’’, ‘‘पुरुष’’  कहानी को छोड़ अन्य कहानियों के सूत्र और भाषिक संरचना पर बिहार क्षेत्र का प्रभाव है, पर ‘‘पकड़वा’’ पूरी तरह बिहार की कथा है. बाकी सभी कहानियाँ हिन्दुस्तान में कहीं भी घटित हो सकती हैं, घट भी रही हैं और लगता है घटती रहेंगी भी. ये कहानियाँ स्मृतियां है, अनुभव हैं, सामाजिक यथार्थ हैं पर बगैर-शोर मचाये समाज के प्रति प्रतिबद्ध हैं. ये…

Read More

सिलेबस रटाने की दुकानों के बीच पटना के बच्चों के लिए उम्मीद की किरण है किलकारी

पुष्यमित्र आज सुबह सवा नौ बजे जब तापमान सात या आठ डिग्री होगा, हमदोनों बाप-बेटी स्कूटी पर सिटसिटाये चले जा रहे थे. दस बजे तक तकरीबन 15 किमी की दूरी तय करके किलकारी भवन पहुंचना था. हमदोनों ने ढेर सारे कपड़े पहन रखे थे. हमदोनों को मालूम था कि मौसम की परेशानियों के बावजूद वहां पहुंचना है. आज तिया का वहां पहला क्लास था. कल किलकारी में नये बैच का इंट्रोडक्शन हुआ था. उनका ऑडिटोरियम खचा-खच भरा था. सीढ़ियों तक पर लोग बैठे थे. वहां हर तबके के बच्चे थे,…

Read More

‘लालू बिहार की माटी का लाल है, किसी के अत्याचार से खामोश नहीं होगा’

यह सजा का ऐलान होने के बाद लालू द्वारा जेल से लिखे गए पत्र का सम्पूर्ण टेक्स्ट है. जिसे तेजस्वी ने कार्यकर्ताओं को पढ़ कर सुनाया और बाद में ट्वीट किया. मेरे प्रिय बिहारवासियों, आप सबों के नाम ये पत्र लिख रहा हूँ और याद कर रहा हूँ अन्याय और ग़ैर बराबरी के खिलाफ अपने लम्बे सफ़र को, हासिल हुए मंजिलों को और ये भी सोच रहा हूँ कि अपने दलित पिछड़े और अत्यंत पिछड़े जनों के बाकी बचे अधिकारों की लड़ाई को. बचपन से ही चुनौतीपूर्ण और संघर्ष से…

Read More

लड़ कर लिया है खेलने का हक, अब बॉल बिहार के क्रिकेट मैनेजरों के कोर्ट में है

बीसीसीआई नहीं चाहती थी कि बिहार के क्रिकेट अपने राज्य के क्रिकेट बोर्ड की तरफ से खेलें. पहले जगमोहन डालमिया ने एसोशियेट मेंबर बनाकर किनारे कर दिया, फिर अदालत में इसी एसोशियेट मेंबर की रट लगाकर बीसीसीआई हमें रणजी खेलने से वंचित करती रही. मगर हमने लड़कर न्याय हासिल किया है. शशांक मुकुट शेखर लिख रहे हैं कि अब गेंद राज्य के क्रिकेट प्रबंधकों के पाले में है कि वे अच्छी व्यवस्था बनायें, अच्छी प्रतिभा को मौके दें, ताकि बिहार के क्रिकेटर देश भर में नाम कमायें… शशांक मुकुट शेखर…

Read More

FM की प्रेम कहानियों में इतना प्रेम होता है कि मन भारी होने लगता है

आशुतोष कुमार पांडेय आजकल FM रेडियो का अजब हाल है. इन पर RJ की जगह फ़िल्म अभिनेता, गायक, संगीतकार और फिल्मकार बतकही करते हैं. वैसे तो पहले भी रेडियो वाले फ़िल्मी दुनिया और सितारों के किस्से ही सुनाते-बताते थे, अब ये खुद आकर अपने किस्से सुनाने लगे हैं. क्या फ़िल्मी दुनिया में बेरोज़गारी बढ़ गयी है. क्योंकि ये लोग टीवी पर रियालिटी शोज में भी उसी तरह नजर आते हैं. सवेरे दस बजे बिग FM पर अनु कपूर सुहाना सफ़र लेकर आते हैं. रविवार को अनु मलिक भी एक कार्यक्रम…

Read More

“ठंड? ठंड कहां है…” ठंड की खबर लेने निकले लेखक को मिले अजब-गजब जवाब

इन दिनों बिहार में भीषण ठंड पड़ रही है. स्कूलों में छुट्टी है. शहरों में अलाव जलाये जा रहे हैं, कंबल बंट रहे हैं. सड़कें सूनी हैं और लोग रजाई छोड़ने को तैयार नहीं हैं. इन परस्थितियों में कोसी कछार के ग्रामीण इलाके में बसने वाले कवि कथाकार मिथिलेश कुमार राय ने सोचा कि जरा गांव घर में घूमकर इस कड़ाके की सर्दी का जायजा लिया जाये. वे निकले और उन्होंने कई लोगों से बातें की. इस बातचीत में उन्हें किसिम-किसिम के जवाब मिले. आप भी पढ़ें… मिथिलेश कुमार राय…

Read More

Good News-नये साल पर फेसबुक ने मिलाया दस साल पहले बिछड़े मां-बेटे को

आपने फेसबुक-वाट्सएप पर किसी गुमशुदा की शेयर होती तस्वीरें खूब देखी होंगी, मगर इन शेयर होती तस्वीरों के जरिये एक मां और बेटे के मिलन का किस्सा अपने पड़ोस में घटित होता मैं पहली बार देख रहा हूँ. यह किस्सा भागलपुर का है, जहां नये साल के पहले दिन तेलंगाना की एक वृद्ध महिला का मिलन उसके बेटे से हुआ. इस मिलन का दिलचस्प बयान एक सज्जन ने फेसबुक पर किया है, जो इस प्रसंग का गवाह था. साकेत विनायक नववर्ष पर 10 सालों से बिछड़े एक परिवार का मिलन!…

Read More