पढ़िये, सच्चिदानंद सिंह की कहानी ‘पकड़वा’

इस पुस्तक मेले में साहित्यिक रचनाओं से जुड़ी कई किताबें आयीं, इनमें से ब्रह्मभोज सबसे अलग इसलिए है, क्योंकि इसकी कहानियों में पुराना क्लासिकल अंदाज तो है ही, नये जमाने की नयी सोच भी शामिल है. भूले-बिसरे दिनों की छौंक के बीच से कुछ ऐसे किस्सों को निकाल कर लेखक सच्चिदानंद सिंह लाते हैं, जो आज भी आपको उतना ही आकर्षित करती है. आज छुट्टी के दिन आप आराम से पढ़िये उनकी इस संग्रह की एक कथा पकड़वा… सच्चिदानंद सिंह भागलपुर विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के रहने के लिए छात्रावास तो…

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एक अनोखी बस यात्रा, दो संतोषों का असंतोष और बदले बिहार को देखने आये मामू्#बिदेसियाकीचिट्ठी

निराला बिदेसिया बात थोड़ी पुरानी हो चली है लेकिन जब-तब मानस पटल पर ताजगी के साथ चस्पां हो जाने को बेताब हो जाती है. हम रोहतास जिले के एक बाजार राजपुर से सासाराम पहुंचे. मैं ट्रेन से रांची निकलने के मूड में था. लेकिन साथ में चल रहे मामू ने कहा- बस का आनंद लो बबुआ, मजा आएगा. थोड़ा गाना बजेगा, कुछ देर लाइन होटल पर रूकेंगे, वगैरह-वगैरह. मैं आग्रह करता रहा कि बिना रिजर्वेशन के भी ट्रेन में चलना बस की तुलना में आरामदेह होता है और कुछ हद…

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अच्छा ही तो है कि शेषन ओल्ड एज होम में अपनी उम्र वालों के साथ ताश खेल रहे होंगे

बुढ़ापा ओल्ड एज होम में गुजारना पड़ा. अपने समाज में इसे आज तक दुखदायक स्थिति मानी जाती है. मगर जो हालात हैं उसमें किसी अनचाही स्थिति में बेटे-बहुओं के घर में पड़े रहने से बेहतर है ओल्ड एज होम में आजाद जिंदगी जीना और मजे करना. शेषन के ओल्ड एज होम में पाये जाने पर जो भावुक माहौल बना है, उसके बारे में एक नयी निगाह है, वास्तिवकता की धरातल पर लाते हुए, दुनिया भर के ओल्ड एज होम के अनुभव और अपने देश की तल्ख सच्चाई अपने ही अंदाज…

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रवींद्र जैन कहते थे, ईश्वर ने अगर कभी आंखें दी तो सबसे पहले येसुदास को देखना चाहूंगा

देवांशु झा आज मंदिर की घंटियों की तरह अलौकिक आवाज वाले मलयालयी गायक येसुदास का जन्मदिन है. उनके जन्मदिन पर पत्रकार देवांशु झा ने जिन शब्दों के जरिये उन्हें याद किया है, वह इस आलेख को अलौकिक और मस्टरीड बना देता है. सत्तर के दशक के आखिरी वर्षों में जब हिन्दी सिनेमा के दो बड़े गायक रफी और किशोर कुमार ढलान पर थे, तब दक्षिण से एक गायक मुंबई आया था. नाम था येसुदास. हिन्दी गानों से उनका परिचय कराने वाले संगीतकार थे रवीन्द्र जैन. रवीन्द्र जैन ने येसुदास की…

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सामाजिक सहयोग पिछले 67 सालों से ज्ञान की रोशनी जला रहा है यह ग्रामीण पुस्तकालय

दो रोज पहले बिहार कवरेज ने सरकारी फंड के अभाव में राज्य की 497 पब्लिक लाइब्रेरीज के बंद हो जाने की खबर छापी थी. इस निराशाजनक खबर के बीच एक उम्मीद की रोशनी है इस ग्रामीण पुस्तकालय की कहानी जिसे पिछले 67 सालों से समाज अपने तरीके से संचालित कर रहा है. हमारे अनुरोध पर यह रिपोर्ट अनुराग मिश्र ने लिखी है. अनुराग मिश्र राष्ट्रीय राजमार्ग 57. लगातार चलती ट्रकों और बसों की धमक और शोर से हिलता एक मकान और उस मकान में अपने अपने किताबों में मशरूफ लोग,…

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मधु लिमये ‘बम्बैया’, जिसने बिहार के मुंगेर औऱ बांका की जनता की रहनुमाई की

जयन्त जिज्ञासु आज भारतीय लोकतंत्र का जिस्म तो बुलंद है, पर इसकी रूह रुग्ण हो चली है. ऐसे में जोड़, जुगत, जुगाड़ या तिकड़म से सियासत को साधने वाले दौर में मधु लिमए की बरबस याद आती है. राजनीति के चरमोत्कर्ष पर हमें सन्नाटे में से ध्वनि, शोर में से संगीत और अंधकार में से प्रकाश-किरण ढूँढ लेने की प्रवीणता हासिल करने का कौशल मधु लिमये में दिखता है. प्रखर समाजवादी, उत्कृष्ट वक्ता व शानदार लेखक मधु लिमये (1 मई 1922 – 8 जनवरी 1995) की कल 22वीं पुण्यतिथि थी.…

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बिहार का भागलपुर और झारखंड का पलामू अंचल गूंजता है ब्रह्मभोज की कहानियों में

डॉ शोभना जोशी संग्रह में कुल सत्रह कहानियाँ हैं. ये कहानियां भिन्न-भिन्न काल की हैं, जो इकट्ठा होकर समकालीन विसंगतियों का शाब्दिक कोलाज रचती हैं. ‘‘मेट’’,‘‘चाइभी’’, ‘‘पुरुष’’  कहानी को छोड़ अन्य कहानियों के सूत्र और भाषिक संरचना पर बिहार क्षेत्र का प्रभाव है, पर ‘‘पकड़वा’’ पूरी तरह बिहार की कथा है. बाकी सभी कहानियाँ हिन्दुस्तान में कहीं भी घटित हो सकती हैं, घट भी रही हैं और लगता है घटती रहेंगी भी. ये कहानियाँ स्मृतियां है, अनुभव हैं, सामाजिक यथार्थ हैं पर बगैर-शोर मचाये समाज के प्रति प्रतिबद्ध हैं. ये…

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सिलेबस रटाने की दुकानों के बीच पटना के बच्चों के लिए उम्मीद की किरण है किलकारी

पुष्यमित्र आज सुबह सवा नौ बजे जब तापमान सात या आठ डिग्री होगा, हमदोनों बाप-बेटी स्कूटी पर सिटसिटाये चले जा रहे थे. दस बजे तक तकरीबन 15 किमी की दूरी तय करके किलकारी भवन पहुंचना था. हमदोनों ने ढेर सारे कपड़े पहन रखे थे. हमदोनों को मालूम था कि मौसम की परेशानियों के बावजूद वहां पहुंचना है. आज तिया का वहां पहला क्लास था. कल किलकारी में नये बैच का इंट्रोडक्शन हुआ था. उनका ऑडिटोरियम खचा-खच भरा था. सीढ़ियों तक पर लोग बैठे थे. वहां हर तबके के बच्चे थे,…

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‘लालू बिहार की माटी का लाल है, किसी के अत्याचार से खामोश नहीं होगा’

यह सजा का ऐलान होने के बाद लालू द्वारा जेल से लिखे गए पत्र का सम्पूर्ण टेक्स्ट है. जिसे तेजस्वी ने कार्यकर्ताओं को पढ़ कर सुनाया और बाद में ट्वीट किया. मेरे प्रिय बिहारवासियों, आप सबों के नाम ये पत्र लिख रहा हूँ और याद कर रहा हूँ अन्याय और ग़ैर बराबरी के खिलाफ अपने लम्बे सफ़र को, हासिल हुए मंजिलों को और ये भी सोच रहा हूँ कि अपने दलित पिछड़े और अत्यंत पिछड़े जनों के बाकी बचे अधिकारों की लड़ाई को. बचपन से ही चुनौतीपूर्ण और संघर्ष से…

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लड़ कर लिया है खेलने का हक, अब बॉल बिहार के क्रिकेट मैनेजरों के कोर्ट में है

बीसीसीआई नहीं चाहती थी कि बिहार के क्रिकेट अपने राज्य के क्रिकेट बोर्ड की तरफ से खेलें. पहले जगमोहन डालमिया ने एसोशियेट मेंबर बनाकर किनारे कर दिया, फिर अदालत में इसी एसोशियेट मेंबर की रट लगाकर बीसीसीआई हमें रणजी खेलने से वंचित करती रही. मगर हमने लड़कर न्याय हासिल किया है. शशांक मुकुट शेखर लिख रहे हैं कि अब गेंद राज्य के क्रिकेट प्रबंधकों के पाले में है कि वे अच्छी व्यवस्था बनायें, अच्छी प्रतिभा को मौके दें, ताकि बिहार के क्रिकेटर देश भर में नाम कमायें… शशांक मुकुट शेखर…

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