तीन-तीन नाकाम मुहब्बतों की तड़प ने बना दिया महेंदर मिसिर को बटोही

नदियों के प्रेम में देश भर में भटकने वाले निलय उपाध्याय अब भोजपुरी गीतों के उस्ताद महेंदर मिसिर की कहानी लिखने की तैयारी कर रहे हैं. इससे पहले वे दशरथ मांझी के जीवन पर पहाड़ उपन्यास लिख चुके हैं. कल उन्होंने महेंदर मिसिर की जयंती पर यह लंबा पोस्ट लिखा था, जिसमें उनके जीवन की नाकाम मुहब्बतों की कहानी थी. उनकी इजाजत से यह पोस्ट जो उनके अगले उपन्यास बटोहिया की आधारभूमि होगी, यहां पेश है…. निलय उपाध्याय भोजपुरी के इस महान नायक महेन्दर मिसिर को अपने गीतों के कारण…

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इसे पढ़कर कहीं आप प्यार न करने लगें ओल्डएज होम से

पिछले दिनों टीएन शेषण के ओल्डएज होम में पाये जाने पर एक बहस शुरू हुई थी. ज्यादातर लोगों ने इस खबर पर शेषण के लिए अफसोस जताया था. मगर कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने दमदार तरीके से अपनी बात रखी थी कि आज के जमाने में ओल्डएज होम बुजुर्गों के लिए जरूरत बन गयी है और कई दफा वे घरों से बेहतर आनंद ओल्डएज होम में पाते हैं. इसी मसले पर अमेरिका के कैलिफोर्निया शहर में रहने वाली चिकित्सक डॉ. अर्चना पांडे ने बिहार कवरेज के लिए यह आलेख…

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हम क्यों श्रीदेवी को इतनी शिद्दत से याद कर रहे हैं

पुष्यमित्र हर रोज सुबह उठने के बाद एक बार मोबाइल का नोटिफिकेशन चेक कर लेना एक आदत सी बन गयी है. कल भी वही किया और इसका खामियाजा उठाना पड़ा. राज झा सर ने श्रीदेवी की सदमा वाली तसवीर पोस्ट की थी और किसी से सवाल किया था कि क्या यह सच है? नीचे कमेंट बॉक्स में कई RIP थे. अभी हफ्ता भी शायद ही गुजरा हो. किसी चैनल पर मिस्टर इंडिया आ रहा था. इस फिल्म को मैं अक्सर देखने बैठ जाता हूं. श्रीदेवी के लिए नहीं, न ही…

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नथुने में गोबर की गंध जाते ही याद आता है, अरे आज तो कोई त्योहार है

मिथिलेश कुमार राय गोबर का जिस अर्थ में प्रयोग गुड़ के साथ होता है या गणेश के साथ, गांव में यह वैसा ही नहीं रह जाता है. गुड़ अपनी जगह ठीक है और गनेश तो हैं ही. लेकिन यहां गोबर भी इससे कम महत्व का नहीं होता. विश्वास न होता हो तो त्योहार के दिनों में बगल के किसी गांव में घूम आइए. गोबर के वैसे तो बहुत से काम होते हैं. जैसे इसका उपले थोप लीजिये. इसे सड़ा कर खाद बना लीजिए. गोब गैस की परिकल्पना तो है ही.…

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विचारधाराओं की खूनी जंग से जख्मी एक बौद्ध मुल्क में हिंदुओं का सबसे बड़ा मंदिर

मिहिर झा सोशलिज्म कितना खूनी हो सकता है? पूंजीवाद कितना खूनी हो सकता है? किसी देश के इतिहास का एक ऐसा कालखंड जब विभिन्न विचारधाराओं के एक के बाद एक इम्प्लीमेंटेशन ने 30 लाख (कुल आबादी का २१%) लोग मार दिए. कुछ आंकड़ों पर नज़र डालें. कम्बोडिया को फ्रेंच उपनिवेशवाद से 1953 में आजादी मिली. राजसत्ता वापस कम्बोडिया के राजकुमार सिंहनूक के हाथ में गयी. भयंकर गरीबी में जी रही जनता के राजा का सबसे प्रिय कार्य था सिनेमा बनाना! खुद ही लिखते, खुद ही डायरेक्ट करते, खुद ही अभिनय…

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जनकपुर- परदेस में सीता का एक खूबसूरत-भव्य मंदिर और प्रेम में डूबे स्त्री-पुरुष

पुष्यमित्र नेपाल स्थित जनकपुर मिथिलांचल के लोगों के लिए एक बड़ा और भावनात्मक तीर्थ है. कहते हैं, जनकपुर ही वह जगह है, जहां सीता और राम का विवाह हुआ था. वहां एक भव्य जानकी मंदिर है. जो संगमरमर से बना है. 1910 में बने इस मंदिर का आर्किटेक्ट काफी खूबसूरत है और नेपाल और भारत के मिथिलाचंल की महिलाएं इस तीर्थ से गहरा लगाव महसूस करती हैं, क्योंकि देवी सीता का यह इकलौता सबसे बड़ा मंदिर है. विकीपीडिया बताता है कि यह हिंदू-कोइरी आर्किटेक्ट का बेहतरीन नमूना है. 50 मीटर…

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जानिये, एक बूढ़े पेड़ के लिए क्यों उमड़ पड़ा पूरा रायपुर शहर

रूपेश गुप्ता रायपुर के सिटी कोतवाली के सामने पीपल के चार सौ साल पुराने वृक्ष को काटने के खिलाफ जब शाम 7 बजे लोग सड़कों पर उतरे तो सबके हाथ में एक मोमबत्ती और आंखों में पीड़ा और आक्रोश के मिश्रित भाव थे. सबने नारेबाज़ी करते हुए पीपल पर मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि दी. इसके बाद उसकी जड़ के चारों तरफ खुदी मिट्टी को पाटकर वहां पानी डाला. ताकि उसी पेड़ से नई कोंपलें फूट सके. इस अनोखे प्रदर्शन में समाज के हर तबके के लोग थे. क्या राजनेता, क्या सामाजिक…

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यहां आज भी अपने घर का सपना सीमेंट-बालू से नहीं बांस से पूरा होता है

कोसी के इलाके में बांस का इस्तेमाल किस-किस रूप में होता है, आप उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते. यह तसवीर सुपौल के एक स्कूल की है, जो पूरी तरह बांस से बनी है. तसवीर डाउन टू अर्थ से साभार… मिथिलेश कुमार राय बांस के बारे में कभी कुछ सुनता हूँ तो आँखों के सामने हठात् ही कुछ दृश्य कौंध जाते हैं. कुछ दिन पहले की बात है. कपलेश्वर की विधवा कह रही थीं कि उस दिन कुछ बाँस बिक गए तो थोड़े से पैसे आए हैं हाथ में. सोच…

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नालंदा के खंडहर ही नहीं दरभंगा की हेरिटेज बिल्डिंग्स भी हमारी धरोहर हैं

सुशांत भास्कर बिहार में जब पुरातात्विक एतिहासिक धरोहर की चर्चा करते हैं तो अक्सर गया, बोधगया,  नालंदा, पटना और वैशाली जैसे कुछ क्षेत्रों पर आकर ठहर जाते हैं, जबकि पुरावस्तुओं के संबंध में बने अधिनियम, 1972 के अनुसार कम से कम एक सौ वर्ष से विद्यमान सिक्के,  भवन, कलाकृतियों, ऐतिहासिक महत्व की कोई वस्तु, पदार्थ या चीज़ आदि शामिल हैं. भारत सरकार के द्वारा बनाये गये पुरावशेष तथा बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम, 1972 सम्पूर्ण भारत मे लागू है. 1976 में बिहार सरकार ने बिहार प्राचीन स्मारक अवशेष तथा कलानिधि अधिनियम ,1976…

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वसंत में घास के फूल

मिथिलेश कुमार राय भले ही सरसों के पीले-पीले फूलों को देखकर लोगों को वसंत के आ जाने का पता चलता हो लेकिन जब भी वसंत आता है वह घास को भी फूल का उपहार देता है. यह अलग बात है कि हमारी दृष्टि पीले चकाचौंध में फंसकर रह जाती है और हम छोटी और निचली चीजों के सौंदर्य को देखने से चूक जाते हैं. परंतु कुछ दिन पहले मेरी नज़रों ने इन नजारों को भी देख ही लिया. शायद वो एक घास थी. या घास भी नहीं थी। कोई बेकार…

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