इस लड़की ने तैयार की बिहार की पहली प्लास्टिक की सड़क, जीता नेशनल अवार्ड

बिहार कवरेज इस तसवीर में आपको एक लड़की कंकरीट के साथ काम करती नजर आ रही होगी. वह दरअसल प्लास्टिक की सड़क तैयार करने का मसाला बना रही है. उसने अपने स्कूल में एक प्लास्टिक कचरे की एक छोटी सी सड़क का निर्माण किया है और इस काम के लिए उसे नेशनल अवार्ड भी मिला है. इन दिनों जब प्रायोगिक परीक्षा में छात्र-छात्राओं के अनाड़ीपने की वजह से राज्य की जगहसाई हो रही है. इस बीच एक सरकारी स्कूल में ऐसे प्रयोग होने की खबर सचमुच हौसला बढ़ाने वाली है.…

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मोकामा घाट वाला वह बाघ बहादुर जिसे दुनिया ‘जिम कार्बेट’ के नाम से जानती थी

जिम कार्बेट. यह नाम लेते ही कई कहानियां सामने तैरने लगती हैं. भारत में बाघवाला सबसे मशहूर आदमी. ‘माई इंडिया’ और ‘मैनइटर ऑफ कुमायूं’ जैसे बेस्टसेलर किताबों के लेखक. बाघों के मशहूर शिकारी के साथ ही बाघों को बचाने में जीवन लगानेवाले नायक के रूप में भी जाना जाता है. नायक भी. बात जब चलती तो जिम कार्बेट का नाम तुरंत उत्तराखण्ड के गढ़वाल जिले से जुड़ता है, जहां उन्होंने आदमखोर बाघों को मारा था, जिनमें रुद्रप्रयाग का आदमखोर तेंदुआ भी शामिल था. लेकिन इन सभी कहानियों के बीच यह…

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‘जंगलराज’ तो था मगर लालू के दौर में नहीं

निराला बिदेसिया जंगलराज. राजनीति में पिछले करीब दो दशक से बेहद लोकप्रिय शब्दों में से एक है यह. यूं तो पूरे हिंदी प्रदेशों में ही शगल और सनक की तरह सर चढ़ने के बाद सबसे पॉपुलर शब्द भी है यह. जिसे कोई शब्द नहीं आता, वह फटाफट इस शब्द का इस्तेमाल करता है. विरोधी या सत्ताधारी दल को गरियाने के लिए. उसे नीचा दिखाने के लिए. आतंक-हिंसा-अराजक-अनुशासनहीन राजकाज और राजपाट को परिभाषित करने के लिए. अपने भाषण, संबोधन, वार्ता आदि में ताश के पत्ते की तरह ‘जंगलराज’ शब्द को फेंटकर…

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इस 143 साल पुरानी पार्ट टाइम आब्जर्बेटरी ने बताया, आज पूर्णिया का मौसम सबसे ठंडा है

पूरा बिहार शीतलहर की चपेट में है और इस मौसम का सबसे ठंडा दिन कल पूर्णिया में था, जब वहां का तापमान 1.2 डिग्री दर्ज किया गया. दिलचस्प है कि पूर्णिया में तापमान और मौसम के बदलाव को दर्ज करने के लिए जो आब्जर्वेटरी है, वह 1874 की बनी हुई है. तब अंगरेजों ने इसे पार्ट टाइम आब्जर्वेटरी के रूप में बनाया था. आइये जानते हैं बासुमित्र से इस आब्जर्वेटरी की दिलचस्प कहानी. बासुमित्र पूर्णिया के सबसे पुराने सरकारी कार्यालय में से एक अंग्रेजों के जमाने में स्थापित उत्तर बिहार…

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क्या केंद्र सरकार के फैसले से लौटेगा बिहार के जूट किसानों के ‘पाट का ठाठ’?

कल केंद्र सरकार ने यह घोषणा की है कि चीनी और खाद्य पदार्थों की पैकिंग अब अनिवार्य रूप से जूट के बोरे में की जायेगी. जाहिर है इस फैसले से देश में जूट की मांग बढेगी. मगर क्या इस फैसले का लाभ उत्तर बिहार के उन किसानों को मिलेगा जो कई दशकों से जूट की खेती करते आये हैं. क्या उत्तर बिहार के बंद पड़े जूट मिलों में उत्पादन शुरू होगा, यह बड़ा सवाल है. कभी बंगाल से सटे इस इलाके के लिए जूट गोल्डेन पाइबर हुआ करता था. इसकी…

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वह ‘नरेंद्र’ जिसने ‘नीतीश’ को मैथिली बोलना सिखाया #sundaystory

राजनीति की दुनिया में नरेंद्र और नीतीश का नाता बड़ा दिलचस्प रहा है, कभी बिहार के सीएम नीतीश कुमार गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी के फैन हुआ करते थे. वह बिहार को भी गुजरात जैसा नंबर वन स्टेट बनाना चाहते थे. मगर पीएम पद की रेस में दोनों के बीच ऐसी दरार पड़ेगी कि भोज की थाली छीनने तक की नौबत आ गयी. एक ने हाथ थामा तो दूसरे का मन हाथ झटकने का होने लगा. अब फिर से दोनों मित्रवत हैं. एक दूसरे की तारीफ करते हैं और एक…

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मैथिली का अभिनव प्रयोग – पद्मश्री की कथाओं पर पद्मश्री के रंग

बिहार कवरेज मैथिली की दुनिया में यह अभिनव प्रयोग होने जा रहा है. रामायण, महाभारत, पुराण और बोधिसत्व की कथाओं पर चित्रावलियां हमने आपने खूब देखी हैं. मगर किसी आधुनिक साहित्यिक कृति पर चित्रावलियां बनने की यह संभवतः पहली घटना है. अब यह खबर कंफर्म है, मैथिली की कथाकार पद्मश्री उषाकिऱण खान की दो कृतियों पर मिथिला पेंटिग की चित्रावलियां तैयार हो रही हैं और यह काम करने का बीड़ा चित्रकार पद्मश्री बौआ देवी और सहयोगी चित्रकारों ने उठाया है. नई दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला में सात जनवरी को…

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यहां वनभोज के लिए जमा किये जा रहे हैं दस-दस के नोट

सांकेतिक तसवीर मिथिलेश कुमार राय पहली जनवरी अब बिलकुल पास आ गयी है तो लोग इसके बारे में तरह-तरह की योजना बनाने में दिमाग के घोड़े दौड़ाने लगे हैं. हालाँकि हद से ज्यादा व्यस्त हो चुके जीवन में अब रोजमर्रा के रूटीन को तोड़ने और कुछ अलग करने की भावना वैसी नहीं रह गई है. लेकिन पहली जनवरी की बात ही कुछ और है. यह सुबह की अच्छी शुरुआत की तरह ही अब भी महत्वपूर्ण माना जाता है. सभी लोग चाहते हैं कि वर्ष का पहला दिन खुशी-खुशी इस तरह…

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‘बिहार का पहला पिछड़ा सीएम तो मैं था, मगर सामाजिक न्याय के पहरुए मुझे भूल गये’

‘पिछड़ा समुदाय से पहला सीएम मैं था. मैंने ही बीपी मंडल के एमएलसी बनने का प्रस्ताव दिया और उनके लिए कुरसी छोड़ी. बाद में कर्पूरी समेत कई बने, फिर और कई. लेकिन यहां जब भी सामाजिक न्याय की बात होती है तो लालू-नीतीश से ही पिछड़ों-दलितों की राजनीति की शुरुआत मानी जाती है.’ राजधानी पटना के एक छोटे से सरकारी आवास में रहने वाले महज दस दिन के सीएम सतीश प्रसाद सिंहा एक जिंदा इतिहास हैं. पिछले दिनों निराला जी ने उनसे उस दौर और इस दौर के राजनीति के…

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क्यों बिहार के इस कस्बे को पहली के बदले दूसरी जनवरी का इंतजार रहता है?

बिहार कवरेज दिसंबर का महीना आते ही जहां पूरी दुनिया में नए साल का इंतजार शुरू हो जाता है, परंतु इसी धरती का एक ऐसा हिस्सा भी है, जहां लोग एक के बजाय दो जनवरी का इंतजार करते हैं. जैसे-जैसे यह दिन नजदीक आता है, हर चौक-चौराहे, बाजार, खेत-खलिहान, दुकान-दफ्तर पर एक ही चर्चा होती है, इस बार क्या होने वाला है. यह इलाका है औरंगाबाद जिले का हसपुरा प्रखंड. दरअसल, दो जनवरी को हसपुरा में हर साल रामरूप मेहता महोत्सव का आयोजन होता है. यह आयोजन एक स्थानीय जननायक…

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