चोरों के रहमोकरम पर है खंडहर में बदलती कोसी परियोजना की कर्मशाला

कोसी परियोजना के मुख्यालय होने की वजह से सुपौल जिले के बीरपुर कस्बे आज भी अलग तरह की रौनक दिखती है. यह रौनक उन दिनों अद्भुत हुआ करती थी, जब यहां भीमनगर बराज और कोसी तटबंध का निर्माण हुआ करता था. उस वक्त का जिक्र रेणुजी ने अपने उपन्यास परती परिकथा में किया है. हालांकि बड़ी उम्मीद से बनी बराज, बांध और नहरें हमारे क्षेत्र को कितनी समृद्धि दे पायी यह कहना मुश्किल है, मगर उस सुनहले दौर की यादें आसपास के निवासियों के मन में आज भी है. उन्हीं…

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एवरेस्ट के लिये पूर्णिया से उड़ा था पहला विमान और इस पर बनी फिल्म को मिला था ऑस्कर

बासु मित्र आज हमारा जिला अपनी 248 वां स्थापना दिवस मना रहा है. बहुत की कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि माउंट एवरेस्ट के लिये 1933 में पहला विमान ने पूर्णिया से उड़ान भरी थी. यह हिमालय  क्षेत्र का पहला विस्तृत और वैज्ञानिक सर्वेक्षण था. और इस पर बनी फिल्म को 1936 में  ऑस्कर अवार्ड से सम्मानित किया गया था. जब भी ऑस्कर की बात आती है तो हम रिचर्ड एडिनबरो  की गांधी, स्लम डॉग मिलेनियर, रसल कुट्टी जैसे नाम को याद कर खुश हो जाते हैं. यह बहुत…

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टिकुली आर्ट से सजेगा राजेंद्र नगर टर्मिनल, आइये जानते हैं इस खूबसूरत चित्रकला की कहानी

आज दैनिक भास्कर अखबार के पन्ने पर यह खबर दिखी कि राजेंद्र नगर स्टेशन को टिकुली आर्ट से सजाया जायेगा. मधुबनी स्टेशन से शुरू हुई अपने स्टेशनों को स्थानीय चित्रकला से सजाने की परंपरा का यह विस्तार सुखद है. टिकुली कला का जन्म पटना के आसपास के इलाके में ही हुआ है, लिहाजा इसका राजेंद्र नगर स्टेशन की दीवारों पर उतरना न सिर्फ स्टेशन को खूबसूरत बनायेगा, बल्कि इसे एक स्थानीय पहचान भी देगा. मगर क्या आप टिकुली चित्रकला और इसकी खूबियों के बारे में जानते हैं? अगर नहीं तो…

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चर्चिल की भतीजी, दरभंगा का जमींदार और महात्मा गांधी की कांस्य प्रतिमा

पुष्यमित्र आज महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है. इस मौके पर एक अनूठा किस्सा लेकर आया हूं. इस किस्से के तीन किरदार हैं. पहली चर्चिल की भतीजी, वही विंस्टन चर्चिल को गांधी को शातिर बुड्ढा कहता था. दूसरे दरभंगा के जमींदार कामेश्वर सिंह जिन्हें अंगरेज सरकार ने सर और नाइट कमांडर की उपाधि दी थी और तीसरे खुद महात्मा गांधी हैं, जो शांति और प्रेम के वैश्विक प्रतीक हैं. यह दिलचस्प है कि चर्चिल की भतीजी क्लेयर शेरिडन 1931 के आसपास गांधी की आवक्ष मूर्ति बनायी थी. जाहिर सी बात है…

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बिहार में अब गांवों में भी लोग चंदा करके सीसीटीवी कैमरा लगवाने लगे हैं

इन दिनों न सिर्फ शहरी बल्कि बिहार के ग्रामीण इलाकों से भी चोरी और अपराध से जुड़ी खबरें खूब आ रही हैं. बताया जा रहा है कि पुलिस प्रशासन की पूरी ताकत शराबबंदी सफल कराने जैसे काम में लगी है, जिससे दूसरे अपराध लगातार बढ़ रहे हैं और लोग परेशान हैं. ऐसे में बिहार के एक गांव के युवकों ने गांव में क्राइम कंट्रोल करने के लिए डिजिटल तकनीक को अपनाया है. उन लोगों ने पूरे गांव में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगवा लिये हैं. आइये जानते हैं उस गांव की…

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अपमान का घूंट पीकर बदलाव की इबारत लिखने वाला योद्धा #कर्पूरीजयंतीविशेष

जयन्त जिज्ञासु (लेखक ) पिछड़ों-दबे-कुचलों के उन्नायक, बिहार के शिक्षा मंत्री, एक बार उपमुख्यमंत्री(5.3.67 से 31.1.68) और दो बार मुख्यमंत्री (दिसंबर, 70– जून, 71 एवं जून, 77-अप्रैल, 79) रहे जननायक कर्पूरी ठाकुर (24.1.1924 – 17.2.88) के जन्मदिन की आज 94वीं वर्षगांठ है. आज़ादी की लड़ाई में वे 26 महीने जेल में रहे, फिर आपातकाल के दौरान रामविलास पासवान और रामजीवन सिंह के साथ नेपाल में रहे. 1952 में बिहार विधानसभा के सदस्य बने. शोषितों को चेतनाशील बनाने के लिए वो अक़्सर अपने भाषण में कहते थे- उठ जाग मुसाफिर भोर…

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इस बिहारी राजनेता ने दी थी नेताजी के साइबेरिया में कैद होने की कांस्पिरेसी को हवा

नोट- इस आलेख का मकसद कहीं से इस बहस में नहीं पड़ना है कि 1945 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु हुई थी या नहीं. क्योंकि उनकी जांच के लिए गठित तीन आयोगों में से दो मान चुकी है कि नेताजी की मौत विमान हादसे में हुई थी और सरकार भी इस बात को स्वीकार कर चुकी है. हम उस राजनेता की भूली-बिसरी कहानी सामने लाना चाहते हैं, जिसने नेताजी के जिंदा होने के दावे के पक्ष में सबसे सनसनीखेज तथ्य पेश किये थे. पुष्यमित्र यह कहानी दरभंगा के…

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विदेह से दरभंगा राज तक सहस्राब्दियों में पसरा है मिथिलांचल का राजनीतिक इतिहास

पिछले दिनों बिहार कवरेज में प्रकाशित एक आलेख को लेकर यह सवाल उठ खड़ा हुआ था कि क्या दरभंगा राज एक रियासत रही है या महज एक जमींदारी. इस सवाल को लेकर खूब चर्चा हुई. ऐसे में इतिहास के शोधार्थी सुशांत भास्कर ने हमारे लिए एक आलेख लेकर मिथिलांचल के इतिहास के अनछुए दृष्टांतों को सामने लाने की कोशिश की है. आप भी पढ़ें… सुशांत भास्कर प्राचीन काल में उत्तरी बिहार और नेपाल की तराई में विदेह नाम का एक प्रदेश में राजतंत्र था और मिथिला उसकी राजधानी. कालान्तर में…

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कभी लड्डू खाने पहुंचते थे, आजकल पद्मावत की प्रति देखने लोग मनेर पहुंच रहे हैं

बिहार में भले पद्मावत फिल्म लगे न लगे, मगर लोगों का आकर्षण पद्मावत के प्रति कम नहीं हो रहा. फिल्म नहीं तो मलिक मोहम्मद जायसी की किताब पद्मावत ही सही, जिसपर यह फिल्म बनी है. खबर है कि इन दिनों बड़ी संख्या में लोग इस किताब को देखने, पढ़ने और छूने मनेरशरीफ पहुंच रहे हैं. बिहार कवरेज व्याकरणशास्त्री पाणिनी और वररुचि, सूफी संत मखदूम याह्या मनेरी और मखदूम दौलत की धरती मनेर जो अपने स्वादिष्ट लड्डुओं की वजह से रही है, इनदिनों एक खास वजह से लोगों के आकर्षण का…

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कमला नदी के पश्चिमी किनारे जो मधु का वन था, वही आज मधुबनी है

अगर सच पूछा जाये तो मधुबनी ही बिहार की सांस्कृतिक राजधानी होने की हकदार है. यहां की चित्रकला, यहां की धरोहरें और यहां की ज्ञान की परंपरा अद्भुत है. मधु जैसी मिठास के साथ यह जिला पग-पग में आश्चर्य को समेटे हुए है. आइये इस मधुबनी की कहानी जानते हैं गजानन मिश्र जी से. बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के एडीशन सेक्रेटरी पद से हाल ही में रिटायर हुए गजानन मिश्र मूलतः नदियां और संस्कृति के प्रेमी और गंभीर अध्येता हैं. सरकार उनके कौशल का लाभ नहीं ले पायी,…

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