सोशल मीडिया का दम- धड़ाधड़ मुआवजा राशि लौटा रहे हैं फर्जी बाढ़ पीड़ित

इन दिनों बिहार के किशनगंज जिले के कोचाधामन में उल्टी गंगा बह रही है. अब तक 292 फरजी बाढ़पीड़ितों ने सरकारी खजाने में 17.52 लाख जमा कराये हैं. इतना ही नहीं पंचायत प्रतिनिधि भी पीड़ितों से लिया गया कमीशन वापस कर रहे हैं. खबर सीमांचल नामक फेसबुक और वाट्सएप ग्रुप के खुलासे से यह दबाव बना है. पुष्यमित्र किशनगंज के कोचाधामन प्रखंड में इन दिनों उल्टी गंगा बह रही है. ऐसे लोग जिन्होंने गलत जानकारी देकर बाढ़ पीड़ितों का मुआवजा हासिल कर लिया था, वे अब  मुआवजा लौटा रहे हैं. अब तक…

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कहानी उन देहाती औरतों की जिन्हें नेसडेक्स ने माना वायदा कारोबार का एक्सपर्ट

बासुमित्र सात सितंबर की उस शाम को धमदाहा की लाल देवी और शमशीदा खातून कभी भूल नहीं सकतीं. नई दिल्ली के ताजमहल होटल में उन्हें रामविलास पासवान और अर्जुन मेघवाल जैसे केंद्रीय मंत्री के हाथों पुरस्कृत होने का मौका मिला. और यह अवसर भी एक ऐसे काम के लिए जिसमें अर्थशास्त्र के बड़े-बड़े ज्ञाता दिमाग खपाते रहते हैं. नेशनल कमोडिटी एंड डेरिएटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (नेसडेक्स) ने इन्हें वायदा कारोबार में इनकी दक्षता और सूझबूझ के लिए कृषि प्रगति पुरस्कार से सम्मानित किया. ये औरतें भले ही बहुत पढ़ी लिखी न हों, मगर खरीद-बिक्री…

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चंपारण की लड़कियों ने लिखी चिट्ठी ‘बाल विवाह से बचा लीजिये मुख्यमंत्री जी’

पुष्यमित्र पश्चिमी चंपारण के सुखावारी गांव की पांच लड़कियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को चिट्ठी लिख कर उन्हें बाल विवाह का शिकार होने से बचाने की गुहार लगायी है. पत्र में इन लड़कियों ने लिखा है कि गांव में हाइ स्कूल नहीं होने की वजह से आठवीं के बाद उनकी पढ़ाई बंद हो गयी है और घरवाले शादी के लिए जोर डाल रहे हैं. इन लड़कियों ने गुहार लगायी है कि गांव में एक हाइ स्कूल खुलवा दें ताकि उनकी पढ़ाई जारी रह सके और वे बाल विवाह का शिकार…

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अरुणाचल प्रदेश की औरतों को क्या सिखा रही हैं पूर्णिया की ये ग्रामीण महिलाएं?

बासु मित्र पूर्णिया जिले के विभिन्न गांवों की 12 महिलाएं हाल ही में अरुणाचल प्रदेश की एक माह की यात्रा करके लौटी हैं. दिलचस्प बात यह है कि ये औरतें घूमने फिरने के लिये वहां नहीं गयी थीं. इनकी यात्रा का मकसद वहां की औरतों को स्वयं सहायता समूह के प्रति जागरूक करना, उन्हें समूह बनाना सिखाना और समूहों को निर्माण करना था. इन दर्जन भर महिलाओं के लिए यह अनूठा अनुभव था. क्योंकि महज कुछ ही साल पहले तक इनमें से ज्यादातर महिलाएं गांव की देहरी भी नहीं लांघ…

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