बुकानन से क्रिस्टोफर हिल तक, सृजनशील लोगों को क्यों अपनी तरफ खींचती है कोसी?

कोसी नदी पर महत्वपूर्ण पुस्तक ‘रिवर ऑफ सोरो’ लिखने वाले क्रिस्टोफर हिल ने कल एक पोस्ट लिख कर बताया कि पूर्णिया और कोसी नदी से संबंधित अपनी तमाम शोध सामग्रियों को यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया की लाइब्रेरी में रख छोड़ा है. अगर कोई व्यक्ति इस मसले पर शोध करे तो यहां आकर इन सामग्रियों का इस्तेमाल कर सकता है. यह प्रसंग आया तो इतिहास औऱ साहित्य के गंभीर अध्येता, सेंटर फॉर सोशल स्टडीज के एसोसियेट प्रोफेसर सदन झा के मन में सहज ही यह जिज्ञासा उठी कि आखिर कोसी नदी और…

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SUNDAY STORY-जब मेरी मुलाकात रियल लाइफ ‘पैड-मैन’ से हुई

बहुत मुमकिन है आप आज भी अरुणाचलम मुरुगनाथम को नहीं जानते हों, हो सकता है जानते भी हों. दरअसल वही असली पैड-मैन हैं, वही जिन पर पैड-मैन पिक्चर बन रही है, अक्षय कुमार वाली. वे लो-कॉस्ट सेनेटरी नैपकीन के आविष्कारक माने जाते हैं. जिन्होंने गांव की औरतों को सस्ते में सेनेटरी नैपकीन उपलब्ध कराने के लिए खुद अपने ऊपर उस नैपकीन का एक्सपेरिमेंट किया था. साइकिल पर बैठ जाते थे और अपने जांघिये में नैपकीन के नीच लाल रंग की थैली रखकर साइकिल चलाते थे. उनका प्रयोग सफल रहा और…

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पूर्णिया में नहीं लगी पंचलैट तो इस शख्स ने करा लिया है पूरा सिनेमा हॉल बुक

कहते हैं, अक्सर छोटे-छोटे शहरों में बड़े-बड़े काम हो जाया करते हैं. यह खबर इसी बात का नमूना है. पिछले दिनों रेणु की कहानी पर बनी फिल्म पंचलैट रिलीज हुई थी. रेणु के पुराने शहर पूर्णिया के लोग अपने लेखक की कहानी पर बनी इस फिल्म को देखना चाहते थे. मगर शहर के किसी हॉल में यह फिल्म रिलीज नहीं हुई. ऐसे में एक दीवाने ने अपने शहर के एक सिनेमा हॉल का एक पूरा शो ही बुक करा लिया है. वह अपने शहर के बुजुर्गों को यह फिल्म मुफ्त…

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बाल विवाह रोकने के लिए किशोरियों ने बिहार सरकार को दिये कमाल के टिप्स

पिछले दिनों राजधानी पटना में बिहार के अलग-अलग जिलों की सौ किशोरियां जुटी थीं. दो दिन के कार्यक्रम के दौरान उन्हें कई जानकारियां हासिल कीं, अपने मसलों पर चर्चाएं कीं, मौज-मस्ती कीं और जाते-जाते बिहार सरकार को कई सुझाव देकर गयीं. ये सुझाव उन्होंने राज्य के शिक्षा मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, समाज कल्याण मंत्री और पंचायत मंत्री को सौंपे हैं. ये ऐसे सुझाव हैं कि अगर सरकार इन पर अमल करे तो बाल-विवाह की समस्या से आसानी से निजात पाया जा सकता है. इनमें कुछ ऐसे सुझाव भी हैं जो किशोरियों…

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बिहार के इस गांव ने तय किया है, अब किसी की मौत पर नहीं होगा भोज

सांकेतिक तसवीर रूपेश कुमार मृत्यु भोज की प्रथा गरीबों को कैसे भीतर से तोड़ देती है यह किस्सा हम प्रेमचंद के गोदान के वक्त से पढ़ते आये हैं. हम सब जानते हैं कि कई बार इसके लिये ली गयी कर्ज को दूसरी पीढ़ी भी झेलती है. मगर हम इस क्रूर सामाजिक परंपरा को आज तक बदल नहीं पाये. पैसे वाले लोग श्राद्ध भोज को किसी जश्न की तरह करते हैं और दसियों लाख लुटाते हैं, जैसे इससे उनकी प्रतिष्ठा बढ़ती हो, गरीबों के लिए यह परंपरा बोझ बन जाती है.…

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पटना में स्वागत कीजिये बाल विवाह के खिलाफ डट खड़ी हुई इन सौ किशोरियों का

ये किशोरियां कल शाम ही अलग-अलग जिलों से बिहार की राजधानी पटना पहुंच गयी हैं. इनकी खासियत है कि ये सभी अपने-अपने इलाकों में बाल विवाह के खिलाफ संघर्ष में जुटी हैं. या तो इन्होंने खुद को बाल विवाह का शिकार होने से बचाया है, या अपनी सहेलियों को. बिहार के पांच जिलों मुजफ्फरपुर, रोहतास, जमुई, शिवहर व पश्चिमी चम्पारण से आयीं ये किशोरियां अपने-अपने गांवों में समूह बनाकर रहती हैं और न सिर्फ बाल विवाह बल्कि किशोरियों के दूसरे अधिकार जैसे पढ़ाई-लिखाई, खेलना, बराबरी का हक आदि के लिए…

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150 लोगों का देहदान सबसे बड़ी उपलब्धि है सुशील मोदी के बेटे के आदर्श विवाह की

बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी के पुत्र के विवाह में बिना दान दहेज के, बिना भोज-भात के शादी होने की बात तो खूब प्रचारित हुई. जो एक बात सबसे कम प्रचारित हुई वह यह कि इस विवाह समारोह में 150 के करीब लोगों ने संपूर्ण देहदान की लिखित सहमति दी है. हालांकि इस लिखित सहमति को वास्तविक दान में बदलना बड़ी चुनौती होती है, मगर एक ही दिन में इतने लोगों की देहदान की सहमति एक बड़ी घटना है. विवाह में आये इन लोगों ने देहदान की सहमति…

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19-20 साल ने इन दो लड़कों ने कहा, आइये करें कोसी के सवालों पर बात

बाढ़, पलायन, अशिक्षा और भीषण गरीबी से जूझने वाला कोसी क्षेत्र हर साल मानसून के सीजन में मीडिया की सुर्खियां बटोरने लगता है. अचानक कई कोसी विशेषज्ञ सामने आ जाते हैं. बाढ़ का पानी जब तक गांवों को डुबोता रहता है, कोसी चर्चा भी तभी तक होती है. बाढ़ का पानी उतरते ही मीडिया से कोसी चर्चा भी उतर जाती है. कभी ऐसा नहीं होता कि लोग एकजुट होकर बतियायें कि कोसी क्षेत्र की यह हालत क्यों है? इसका समाधान क्या है? अगले साल पहली दफा यह काम होने जा…

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‘नेट आजादी’ के इस नायक को भूल नहीं सकता सहरसा, पूर्णिया और बेगूसराय

न्यूट्रलिटी यानी भारत में नेट की आजादी पर आखिरी मोहर लगा दी है. यानी अब इंटरनेट प्रोवाइडर ऐसा नहीं कर पायेगा कि फेसबुक, व्हाट्सएप जैसी साइटों को बेहतर स्पीड दे और आपकी हमारी छोटी-छोटी साइटों के साथ स्पीड के मामले में भेदभाव करे. अब फ्री इंटरनेट के नाम पर गूगल, फेसबुक या एयरटेल जैसी कंपनियों को एकाधिकार जमा लेने का मौका नहीं मिलेगा. यह भारत के करोड़ों नेट यूजरों की बड़ी जीत है. मगर क्या आप जानते हैं कि पूंजीवाद के इस दौर में इन भारी-भरकम कंपनियों के खिलाफ किसने…

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जब पूर्णिया की गुड़िया ने संसद भवन में किशोरियों के लिए आवाज उठायी

बासु मित्र किशोरियों का मसला बिल्कुल अलग है. वे न बच्ची होती हैं, जिन्हें बहुत अधिक संरक्षण की जरूरत होती हैं. न ही वे युवा होती हैं, जिन्हें सबकुछ करने का संवैधानिक अधिकार मिला होता है. मगर नीतिगत कमियों की वजह से वे इन दोनों पाटों के बीच पिसती रहती हैं. मगर इस साल वैश्विक बाल दिवस(20 नवंबर) का दिन भारत भर की किशोरियों के लिए खास रहा. क्योंकि इस मौके पर संसद में जिन आठ बच्चों को सांसदों को संबोधित करने का मौका मिला, उनमें पूर्णिया की किशोरी गुड़िया…

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