सलाम कीजिये इन बच्चियों को, इन्होंने अपनी सहेली को बाल विवाह का शिकार होने से बचाया

बिहार कवरेज बाल विवाह को लेकर राज्य सरकार मानव श्रृंखला जैसे तामझाम तो खूब करती है, मगर जमीन पर कोई बच्ची बाल विवाह का शिकार हो रही हो तो उसे बचाने की कोई सटीक व्यवस्था नहीं है. यह बात तब जाहिर हुई जब गया में बाल विवाह का शिकार हो रही एक बच्ची को बचाने के लिए उसकी सहेलियों ने हेल्पलाइन पर फोन किया मगर किसी ने फोन नहीं उठाया. बाद में इन लड़कियों ने खुद थाने जाकर शिकायत की और अपनी सहेली को बाल विवाह का शिकार होने से…

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इस लड़की ने तैयार की बिहार की पहली प्लास्टिक की सड़क, जीता नेशनल अवार्ड

बिहार कवरेज इस तसवीर में आपको एक लड़की कंकरीट के साथ काम करती नजर आ रही होगी. वह दरअसल प्लास्टिक की सड़क तैयार करने का मसाला बना रही है. उसने अपने स्कूल में एक प्लास्टिक कचरे की एक छोटी सी सड़क का निर्माण किया है और इस काम के लिए उसे नेशनल अवार्ड भी मिला है. इन दिनों जब प्रायोगिक परीक्षा में छात्र-छात्राओं के अनाड़ीपने की वजह से राज्य की जगहसाई हो रही है. इस बीच एक सरकारी स्कूल में ऐसे प्रयोग होने की खबर सचमुच हौसला बढ़ाने वाली है.…

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सामाजिक सहयोग पिछले 67 सालों से ज्ञान की रोशनी जला रहा है यह ग्रामीण पुस्तकालय

दो रोज पहले बिहार कवरेज ने सरकारी फंड के अभाव में राज्य की 497 पब्लिक लाइब्रेरीज के बंद हो जाने की खबर छापी थी. इस निराशाजनक खबर के बीच एक उम्मीद की रोशनी है इस ग्रामीण पुस्तकालय की कहानी जिसे पिछले 67 सालों से समाज अपने तरीके से संचालित कर रहा है. हमारे अनुरोध पर यह रिपोर्ट अनुराग मिश्र ने लिखी है. अनुराग मिश्र राष्ट्रीय राजमार्ग 57. लगातार चलती ट्रकों और बसों की धमक और शोर से हिलता एक मकान और उस मकान में अपने अपने किताबों में मशरूफ लोग,…

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इस ‘मचान’ ने एक झटके में बदल दी मैथिली की किताबों की दुनिया

पुष्यमित्र इन दिनों नई दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय पुस्तकमेला में जहां बड़े-बड़े प्रकाशन अपने स्टॉल पर लोगों को जुटाने के लिए तरह-तरह के आजमाइशों का सहारा ले रहे हैं. लेखक अपने किताबों का प्रचार करने में जुटे हैं, कुछ संस्थानों ने तो कौड़ियों के दाम अपनी किताबों को बेचने के लिए फेरी वालों तक को हायर कर लिया है. एक छोटे से बुक स्टॉल पर अनायास ही भीड़ उमड़ रही है. इतनी भीड़ के पास-पड़ोस के बुक स्टॉल वाले बार-बार परेशान होकर इसकी शिकायत कर आते हैं. स्टॉल वाले को चेतावनी…

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कड़ाके की ठंड में जुटे थे दसियों हजार लोग, दागे जा रहे थे किक पर किक

बिहार कवरेज कड़कड़ाती ठंड भी लोगों के उत्साह और रामरूप मेहता महोत्सव के प्रति लगाव को कम नहीं कर सकी. मंगलवार को हसपुरा फील्ड में रामरूप मेहता महोत्सव में मौसम और काम को नजरअंदाज कर दसियों हजार लोग वहां पहुंचे और समाजवादी नेता शहीद रामरूप मेहता को श्रद्धांजलि दी. कार्यक्रम के दौरान हसपुरा और इसके आसपास के तमाम रास्ते जाम की हालत में रहे. हसपुरा बाजार करीब चार घंटे तक पूरी तरह से जाम रहा. दोपहर 12 बजे से ही हसपुरा के तमाम रास्तों पर लोग आयोजन स्थल पर जाते…

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Good News-नये साल पर फेसबुक ने मिलाया दस साल पहले बिछड़े मां-बेटे को

आपने फेसबुक-वाट्सएप पर किसी गुमशुदा की शेयर होती तस्वीरें खूब देखी होंगी, मगर इन शेयर होती तस्वीरों के जरिये एक मां और बेटे के मिलन का किस्सा अपने पड़ोस में घटित होता मैं पहली बार देख रहा हूँ. यह किस्सा भागलपुर का है, जहां नये साल के पहले दिन तेलंगाना की एक वृद्ध महिला का मिलन उसके बेटे से हुआ. इस मिलन का दिलचस्प बयान एक सज्जन ने फेसबुक पर किया है, जो इस प्रसंग का गवाह था. साकेत विनायक नववर्ष पर 10 सालों से बिछड़े एक परिवार का मिलन!…

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खिजरसराय के गांवों में मुम्बइया पूजा ने न जाने कितने फूल खिला रखे हैं

निराला जी पिछले दिनों खिजरसराय के कुछ गांवों की यात्रा पर थे. वहां उनकी मुलाकात एक मुम्बइया लड़की पूजा से हुई जो मध्य बिहार के इस ठेठ देहात में स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में सकारात्मक बदलाव लाने में जुटी थी. उनके मन में सहज सवाल था कि एक महानगर की यह लड़की बिहार के गांवों में कैसे रह रही है और कैसे उसने यह सब मुमकिन किया. इन्हीं बातों का जवाब इस रिपोर्ताज में है. निराला बिदेसिया पूजा से पहले कभी आमने-सामने की कोई बात-मुलाकात नहीं थी. सिर्फ एक दफा…

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जानिये, रक्सौलवासियों ने कैसे लड़कर बचाया अपने शहर का पर्यावरण?

वैसे तो बिहार आंदोलनों की प्रयोगशाला रहा है, मगर कल राज्य के सीमावर्ती कस्बे रक्सौल में जो आंदोलन हुआ है वह किसी राजनीतिक बदलाव के लिए नहीं हुआ, न सामाजिक न्याय के लिए या सरकारी योजना का लाभ हासिल करने के लिए. यह आंदोलन हुआ शहर के पर्यावरण को बचाने के लिए. दिलचस्प है कि इस आंदोलन में किसी एनजीओ या एक्टिविस्ट की भूमिका नहीं थी. यह शहर का स्वतःस्फूर्त आंदोलन था. कल रक्सौलवासियों ने यह आंदोलन जीत लिया. आइये इस अनूठे आंदोलन के बारे में जानें और वहां के…

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बुकानन से क्रिस्टोफर हिल तक, सृजनशील लोगों को क्यों अपनी तरफ खींचती है कोसी?

कोसी नदी पर महत्वपूर्ण पुस्तक ‘रिवर ऑफ सोरो’ लिखने वाले क्रिस्टोफर हिल ने कल एक पोस्ट लिख कर बताया कि पूर्णिया और कोसी नदी से संबंधित अपनी तमाम शोध सामग्रियों को यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया की लाइब्रेरी में रख छोड़ा है. अगर कोई व्यक्ति इस मसले पर शोध करे तो यहां आकर इन सामग्रियों का इस्तेमाल कर सकता है. यह प्रसंग आया तो इतिहास औऱ साहित्य के गंभीर अध्येता, सेंटर फॉर सोशल स्टडीज के एसोसियेट प्रोफेसर सदन झा के मन में सहज ही यह जिज्ञासा उठी कि आखिर कोसी नदी और…

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SUNDAY STORY-जब मेरी मुलाकात रियल लाइफ ‘पैड-मैन’ से हुई

बहुत मुमकिन है आप आज भी अरुणाचलम मुरुगनाथम को नहीं जानते हों, हो सकता है जानते भी हों. दरअसल वही असली पैड-मैन हैं, वही जिन पर पैड-मैन पिक्चर बन रही है, अक्षय कुमार वाली. वे लो-कॉस्ट सेनेटरी नैपकीन के आविष्कारक माने जाते हैं. जिन्होंने गांव की औरतों को सस्ते में सेनेटरी नैपकीन उपलब्ध कराने के लिए खुद अपने ऊपर उस नैपकीन का एक्सपेरिमेंट किया था. साइकिल पर बैठ जाते थे और अपने जांघिये में नैपकीन के नीच लाल रंग की थैली रखकर साइकिल चलाते थे. उनका प्रयोग सफल रहा और…

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