24 संग्रहालय, सात क्यूरेटर, बंद रहते हैं बिना स्टाफ वाले छह म्यूजियम, सुरक्षा भगवान भरोसे

एक तरफ जगमग करता नया नवेला, नीतीश जी का दुलारा बिहार म्यूजियम तो दूसरी तरफ बिना कर्मचारियों के धूल-धक्कड़ खाते और विरासत की आभा लुटाते राज्य के दूसरे 25 म्यूजियम. यह कहानी उस राजा के राज्य की है, जो खुद को समावेशी विकास का पैरोकार बताता है. मगर हकीकत यह है कि राज्य के दूसरे म्यूजियम स्टाफ की भारी कमी झेल रहे हैं. छह म्यूजियम तो खुलते भी नहीं हैं, क्योंकि वहां कोई स्टाफ नहीं. सात क्यूरेटरों के जिम्मे है 24 म्यूजियम का प्रभार और इनकी देखरेख के लिए कुल…

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हिंदू तीर्थ साबित करने की जिद में 2000 साल पुराने सिकलीगढ़ टीले पर मंदिर बनाने की तैयारी

इस बार होली के एक दिन पहले सिकलीगढ़ गया था. इस जगह पाये गये एक प्राचीन स्तंभ को प्रह्लाद का खंबा कहा जाता है और इस साल वहां होलिका दहन का राजकीय समारोह भी शुरू हुआ है. वहां, उस पूरे इलाके को घूमने के दौरान पता चला कि यह क्षेत्र कम से कम दो हजार साल पुरानी विरासत को अपने अंदर छिपाये हुए है. पुरातत्वविद वहां की ईंटों को दो से ढा़ई हजार साल पुराना बताते हैं. मगर जिस टीले से ये ईंटें मिली हैं वहां क्रेन से खुदाई कर…

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हमारे लाखों बैंककर्मियों की दुनिया का भयावह दस्तावेज़

रवीश कुमार बैंक कर्मचारियों के सैंकड़ों मैसेज पढ़ गया. उनकी व्यथा तो वाक़ई भयानक है. क्या किसी को डर नहीं है कि दस लाख लोगों का यह जत्था उसे कितना राजनीतिक नुकसान पहुंचा सकता है? कई दिनों से हज़ारों मेसेज पढ़ते हुए यही लगा कि बैंक के कर्मचारी और अधिकारी भयंकर मानसिक तनाव से गुज़र रहे हैं. उनके भीतर घुटन सीमा पार कर गई है. आज जब बैंकों को बेचने की बात हो रही है तो याद आया है कि तब क्यों नहीं हो रही थी जब नोटबंदी हो रही…

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नहीं टूटा मिथक. झारखंड के इस राजकीय महोत्सव का नाम आते ही मुख्यमंत्रियों के छूटते हैं पसीने

-डॉ आरके नीरद झारखंड के इस राजकीय महोत्सव का नाम आते ही मुख्यमंत्रियों के पसीने छूट जाते हैं. रघुवर दास ने भी खुद को इसका अपवाद साबित करने का मौका चौथी बार भी गंवा दिया. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो साहस नोएडा जाकर दिखाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिसके लिए उनकी जम कर प्रशंसा की, झारखंड के मुख्यमंत्री वह साहस नहीं कर सके. 16 फरवरी से झारखंड की उपराजधानी दुमका में राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव शुरू हुआ है. यह मेला 1890 में शुरू हुआ था…

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सात साल तक बिना पेशी के जेल में पड़े रहे, दो दिन पहले पेश हुए तो अदालत ने कहा इनके खिलाफ कोई मुकदमा नहीं है

बिहार कवरेज यह पिछले सात साल से जेल में बंद कथित नक्सली नेता विजय आर्य की कहानी है. पुलिस और सरकार कहती है कि वे नक्सली हैं, जबकि उनके परिवार वाले कहते हैं कि वे एक राजनैतिक-सामाजिक कार्यकर्ता हैं. सामंतों के कुकर्मों के खिलाफ गरीबों के हक की लड़ाई लड़ते रहे हैं. वर्षों से बंद पड़े गुरारू चीनी मिल के मजदूरों के हक की लंबी लड़ाई उन्होंने लड़ी है. इसी संघर्ष की ताकत से घबराकर तत्कालीन बिहार सरकार ने उन्हें नक्सली घोषित कर दिया है. बहरहाल सवाल यह नहीं है…

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हैप्पी वेलेंटाइन्स डे सुशील मोदी जी, जरा अपने संगठन और अपनी पार्टी की सोच भी बदलिये

पुष्यमित्र अगर मैं कहूंगा कि वेलेंटाइन्स डे की शुभकामनाओं के असली हकदार सुशील मोदी जैसे व्यक्ति हैं तो आप हैरत में पड़ जायेंगे. मगर सच यही है. उनके जैसा आशिक मिलना मुश्किल है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे कट्टर हिंदूवादी संस्था का सदस्य रहने के बावजूद प्रेम किया तो केरल की एक कैथोलिक युवती से और कहते हैं कि उस युवती से विवाह करने के लिए उन्होंने अपना अजीवन अविवाहित रहने का प्रण भी तोड़ दिया. सच्चे अर्थों में ऐसे व्यक्ति को ही वेलेंटाइन्स डे का ब्रांड अंबेस्डर बनाया जाना चाहिए.…

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सरकारें यही चाहती है की कॉलेज में क्लासेज बंद रहे

आदित्य मोहन झा सरकारें यही चाहती है की कॉलेज में क्लासेज बंद रहे, आपके बच्चे गेस पेपर पढ़के परीक्षा दें और प्रोफेसर पैरवी देख के नम्बर. डिग्री लेने के बाद कुछ दिन आरएस अग्रवाल, प्रतियोगिता दर्पण रगड़ के बैंक-एसएससी-रेलवे की तैयारी हो और फिर हार के आपके बच्चे बिहार संपर्क क्रांति के स्लीपर बोगी में फाइन देके दिल्ली निकल जाए नौकरी करने. वो चाहते ही नहीं कि विश्वविद्यालय में पढ़ाई हो और लोग पढ़ लिख के योग्य बनें, नहीं तो उनकी भ्रष्ट, जाति-धर्म और नकारापन से भरी राजनीति पे सवाल…

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अगर सारे बजरंगी पकौड़ा तलने लगे तो आपकी पार्टी का क्या होगा अध्यक्षजी

पुष्यमित्र सुना है, अध्यक्षजी ने कल संसद में कहा है कि बेरोजगार रहने से बेहतर है पकौड़ा बेचना. नीति वाक्य के तौर पर इस वाक्य से कतई असहमत नहीं हुआ जा सकता. खास तौर पर मेरे जैसा आदमी जो खाना पकाने, खाने और खिलाने से बेहतर किसी और काम को मानता ही नहीं है. और उसमें भी पकौड़ा… क्या बात है. यह अलग बात है कि आजकल पकौड़े को सेहत के लिए नुकसानदेह मान लिया गया है. बीपी-सुगर जैसी बीमारियों ने आम लोगों को भी इस लजीज व्यंजन के स्वाद…

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चौबीस साल साल से बिहार की नदियों पर कोई अध्ययन नहीं हुआ है नीतीश जी

नीतीश कुमार जी की मासूमियत का कोई जवाब नहीं. कल वे एनआईटी में छात्रों से बोल आये कि आपको बिहार की नदियों पर अध्ययन करना चाहिए. मगर उनकी सरकार का जल संसाधन विभाग नदियों पर क्यों अध्ययन नहीं करता, इस बारे में वे कुछ नहीं बोले. हकीकत यह है कि 1994 के बाद बिहार की नदियों पर कोई अध्ययन नहीं हुआ है. जबकि कायदे से हर दस साल में जलसंसाधन विभाग को इरिगेशन कमीशन का गठन कर इन नदियों का अध्ययन कराना चाहिए था. नीतीश कुमार ने कल ठीक कहा…

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पीरियड एक फ़िल्म भर का मुद्दा नहीं है

अपनी बात- अरुणाचलम मुरुगनाथम जिसके जीवन पर यह फिल्म पैडमैन बन रही है ने लो-कॉस्ट सेनेटरी नैपकीन इसलिए तैयार किया था कि देश की गरीब महिलाओं को भी सस्ता नैपकीन मिल सके. वे इसे बड़ी नैपकीन कंपनियों के लाभ का धंधा बने नहीं रहने देना चाहते थे. इसलिए उन्होने कम कीमत में छोटी-छोटी मशीनें बनायी, बाद में उन्हें देश भर की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को उपलब्ध कराया. उनकी मुहिम ब्रांडेड सेनेटरी नैपकीन कंपनियों के खिलाफ थी. मगर अक्षय कुमार की फिल्म पैडमैन मुरुगनाथम की संवेदनशील कहानी को भुनाने…

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