बजट 2018- प्राइवेट अस्पतालों का खुराक साबित होगी स्वास्थ्य बीमा योजना

बिहार कवरेज इस बजट में हेल्थ सेक्टर को लेकर बड़ी घोषणाएं हुई हैं. पहली घोषणा है ओबामा केयर के तर्ज पर मोदी केयर जैसी स्वास्थ्य बीमा को लागू करने की. इसके तहत 10 करोड़ परिवारों को पांच लाख रुपये की स्वास्थ्य बीमा का लाभ देना है. अमेरिका में ओबामा केयर काफी हिट रहा था. इस योजना के बाद ओबामा की वापसी भी हुई थी. संभवतः उसी को भारत में लागू कराकर मोदी सरकार राजनीतिक लाभ लेना चाहती है. मगर सवाल यह है कि क्या भारत का हेल्थ सेक्टर हेल्थ इंश्योरेंस…

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50 पैसे लीटर वाला इथेनॉल बदल तो सकता है बिहार की तसवीर, मगर… ?

बिहार कवरेज मीडिया में आयी नीतीश और गडकरी की एक ऑटो पर बैठी तसवीर एक सुखद खबर लेकर आयी है. केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गड़करी वाहनों के चलने के लिए इंधन के तौर पर इथेनॉल को प्रमोट करना चाह रहे हैं और यह दाव वे बिहार के साथ खेलना चाहते हैं. कल जब बजट से एक रोज पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली में थे तो गडकरी ने उन्हें इथेनॉल से चलने वाला ऑटो और बाइक दिखाया. नीतीश की भी इसमें रुचि थी, क्योंकि बिहार में इथेनॉल उत्पादन की…

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पोलिटिकल रैलियों से लेकर मर्डर तक की सुपाड़ी लेने लगे हैं बाइकर्स गैंग

सड़कों पर लहरिया काटते हुए आड़े-तिरछे बाइक चलाने वाले युवक आपको पहली निगाह में मौत की परवाह न करने वाले सनकी युवक लग सकते हैं. मगर पटना में इन बाइकर्स की तफ्तीश करने वाले बताते हैं कि इनका गैंग बनाना तो महज ब्रांडिंग और पब्लिसिटी है. असली मकसद पोलिटिकल पार्टियों से रैली करने, हंगामा मचाने और जमीन पर कब्जा करने से लेकर मर्डर तक का ठेका लेना है. पिछले दिनों पटना में कई अपराधों में इन बाइकर्स गैंग का हाथ रहा है. पद्मावत का विरोध करने के अभियान में भी…

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दशकों बाद हो रहे छात्रसंघ चुनाव से क्या बदलेगी बिहार के कॉलेज कैंपसों की सूरत?

आदित्य मोहन झा मौजूदा बिहार के राजनीति के सभी बड़े नेता छात्र राजनीति के उपज हैं. चाहे वो लालू प्रसाद यादव हों या नीतीश कुमार, सुशील मोदी हों या रामविलास पासवान. ये सभी कद्दावर नेता अपने छात्र जीवन मे जेपी आंदोलन से राजनीति में प्रवेश किए और फिर दशकों तक बिहार की राजनीति इन्हीं के आस-पास घूमती रही. शायद इसलिए इन्होंने सुनियोजित ढंग से छात्रसंघ चुनावों को विश्वविद्यालयों में बंद ही करवा दिया ताकि भविष्य में इन्हें ललकारने और इनसे टकराने के लिए कोई नई पौध ही न जड़ जमाए.…

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भंसाली है कलप्रिट नंबर वन, करनी सेना तो चौथे नंबर की गुनहगार है

पुष्यमित्र आज जब पद्मावत फिल्म रिलीज हो रही है और पूरा देश करनी सेना की करनी से तबाह है. ऐसे में अगर मुझसे पूछा जाये तो इस तबाही के दोषियों में करनी सेना को चौथे नंबर पर रखूंगा. पहले नंबर पर इस फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली होंगे, दूसरे पर केंद्र और राज्यों की सरकार है, तीसरे नंबर पर हमलोग मीडिया वाले हैं. करनी सेना तो मूर्खताओं का एक वायसर है, जो महज पब्लिसिटी की ख्वाहिश में रक्तबीज की तरह पूरे देश में बेवजह फैल रहा है. अगर मुझे इस…

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मैं राजपूत हूं और मुझे आपको राजपूत कहते शर्म आती है

यह आलेख एक उन्नीस साल के युवक ने लिखा है, जिसने पत्रकारिता की पढ़ाई की है. उम्र के हिसाब से तो इसे करनी सेना वालों के पीछे तलवार उठाकर हू-हू करना चाहिए था. मगर इसने बहुत समझदारी से पूरे मसले को यहां रखा है और काफी विनम्र शब्दों में अपनी आपत्ति दर्ज की है. प्रकाश अजेय कुमार मैं एक राजपूत हूँ. और आज मैं जो लिखने जा रहा हूँ उससे हो सकता है कि कुछ राजपूतों की भावनाओं को ठेस पहुँचे, उसके लिए मैं पहले ही माफी मांगता हूँ. मैं…

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छात्र-राजनीति की उपज नीतीश कुमार छात्रों के जगने से इतना डरते क्यों हैं?

आदित्य मोहन झा (लेखक मिथिला स्टूडेंट यूनियन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी हैं.) बिहार के मौजूदा सरकार और विपक्ष में भी आज जो भी राजनेता हैं कभी वो छात्र राजनीति के उपज रहे हैं पर कालांतर में छात्रसंघ चुनावों को बंद कर दिया गया ताकि इनका कम्पीटिशन और सवाल करने वाली नेताओं की नई पौध विकशित ही न हो. 15 नवंबर को #LNMU में मिथिला स्टूडेंट यूनियन का जो छात्र आंदोलन हुआ था वो विश्वविद्यालय के कुव्यवस्थाओं के खिलाफ हुआ था पर इसे अपार जनसमर्थन-मीडिया कवरेज मिला. नियमित क्लास-नियमित सत्र-लायब्रेरी-लेबोरेट्री-स्पोर्ट्स-कल्चरल इवेंट्स-रिक्त…

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स्कूलों में पहले किताबें पहुंचाइये सीएम साहब, समाज सुधार का संदेश थोड़ी देर में भी पहुंचेगा तो चलेगा

डियर नितीश कुमार जी शराबबंदी या फिर यूं कहें कि पूर्ण शराबबंदी के समर्थन में मैं भी हूं. सिर्फ पूर्ण शराबबंदी ही नहीं अपितु मैं तो पूर्ण नशामुक्ति का भी पक्षधर हूं. आपने बिहार में पूर्ण शराबबंदी करके एक नेक कार्य किया है जो निश्चित रूप से सराहनीय है. इससे न जाने कितने परिवार में फिर से खुशियां लौटी हैं. आपको उन सब की दुआएं मिल रही हैं. अधिक सम्भव है कि वो चुनाव के दौरान अथवा उसके परिणाम आने पर आपको दिखे भी. इन दिनों आप समीक्षा यात्रा पर…

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बस… बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ अब और नहीं

(इस टिप्पणी के साथ लगी तसवीर गुड़गांव के एक मॉल की है, तसवीर को खुद राकेश सिंह ने ही कैमरे में कैद किया है.)   वेबपोर्टल मधेपुरा टाइम्स के संपादक राकेश सिंह की गिनती अब उन लोगों में होती है, जो मधेपुरा और कोसी की आवाज बन रहे हैं. न्यायपालिका से जुड़े राकेश जी की सक्रियता वेब मीडिया और सोशल मीडिया में काफी अधिक है और उनकी बातों का अपना महत्व है. हमारे अनुरोध पर उन्होंने यह आलेख हमारे लिये लिखा है. राकेश सिंह बिहार के मधेपुरा में घटी ये…

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लोकतंत्र में कातर जनता की असली जगह कतार ही है #मानवश्रृंखला

पिछले साल जब शराबबंदी के खिलाफ मानव श्रृंखला का पहला आयोजन हुआ था तो यह फेसबुक पोस्ट लिखी थी. आज एक मित्र ने इस पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा है कि इस आलेख में शराबबंदी के साथ दहेज प्रथा और बाल विवाह का विरोध भी जोड़ दें तो यह आलेख आज के लिए भी फिट है. बस इस बार के आंकड़े थोड़े अलग होंगे… पुष्यमित्र लोकतांत्रिक शासकों के ऊपर भी कभी-कभार मध्यकालीन सत्ताधीशों वाली सनक सवार हो जाती है. वे भी जमीनी काम छोड़ कर भांति-भांति के करतबों को…

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