नई एमएसपी राहत तो देगी, मगर डेढ़ गुना वाली बात भद्दा मजाक है

मोदी सरकार ने किसानों के उपज की एमएसपी बढ़ा दी है. यह एमएसपी सौ-दो सौ टका बढ़ा कर सरकार कह रही है कि अब किसानों को उसकी लागत का डेढ़ गुना मिल जायेगा. हालांकि आज देश के किसान जिस स्थिति में हैं, उसमें उन्हें जो भी मिल जाये वह लाभ ही है. मगर यह कहना कि उन्हें उनकी लागत का डेढ़ गुना मिलेगा एक क्रूर मजाक है. दुखद तो यह है कि सरकार ने ऐन चुनावी साल में ऐसी घोषणा करते हुए यह भी नहीं बताया कि उन्होंने किसानों की…

Read More

न मेढकों की शादी से बारिश होगी, न विभाग का नाम बदलने से

  इन दिनों जब मध्य प्रदेश में मंत्री महोदय मेढ़कों की शादी करवा रहे हैं, ताकि बारिश जल्द हो, बिहार की राजधानी पटना में पूर्वी राज्यों के प्रतिनिधि ग्लोबल वार्मिंग और मौसम पर पड़ने वाले इसके कुप्रभाव की चर्चा करने और इसका समाधान तलाशने के लिए जुटे हैं. यह सरकारों के एप्रोच का फर्क है. एक सरकार का नुमाइंदा अपने आवाम को पुरातनपंथी सोच की तरफ ले जाने की कोशिश में है, तो दूसरी सरकार का मुख्यमंत्री कह रहा है, बिहार में लगातार बारिश कम हो रही है. हम पर्यावरण…

Read More

एक आरटीआई एक्टिविस्ट की हत्या

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के अरेराज कस्बे में एक आरटीआई एक्टिविस्ट की हत्या हो गयी। इन दिनों आरटीआई एक्टिविस्ट भी लगभग उसी तरह के खतरों की जद में हैं, जिस तरह का खतरा निष्पक्ष और सत्ता विरोधी पत्रकार झेलते हैं। मगर आरटीआई एक्टिविस्ट की हत्या पर उतना शोर नहीं मचता जितना पत्रकारों और लेखकों की हत्या पर मचता है। आरटीआई एक्टिविस्ट राजेन्द्र सिंह उसी अरेराज के रहने वाले हैं, जिस इलाके के जितवारपुर गांव के रवीश कुमार NDTV इंडिया के मशहूर एंकर हैं। वे भी अक्सर सत्ता पक्ष के लोगों…

Read More

क्या पटना सीखेगा रोहतास के इस गांव से साफ-सफाई का सबक?

आनंद कुमार रोहतास आबादी के लिहाज से इसलिए भी महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यहाँ प्रति हज़ार पुरुषों की तुलना में महिलाओं की गिनती ज्यादा है। औसत हर 1000 पुरुषों पर यहाँ 1036 महिलाऐं हैं। सिर्फ आंकड़ों के लिहाज से देखें तो कुछ चीज़ें अजीब भी लगेंगी। जैसे महिलाओं की गिनती ज्यादा होने के वाबजूद बाल विवाह की दर 15-19 वर्ष की स्त्रियों में 38% के आस पास है और परिवार नियोजन के उपाय अपनाने वाले करीब 45% लोगों में पुरुष भागीदारी ना के बराबर है। 40% के लगभग स्त्री-बंध्याकरण पर…

Read More

आखिर कब तक जमीन सवालों से मुंह चुरायेगी राजनीति

हरेश कुमार सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह की बातें तो ठीक है, लेकिन बिहार की चीनी मिलों, किसानों की बकाया राशि और वर्तमान स्थिति के बारे में भी कुछ कहना चाहेंगे? ओलावृष्टि से शिवहर जिला समेत बिहार के लाखों किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा है इसपर कोई एक शब्द नहीं बोल रहा. हवा-हवाई मुद्दों से आप ज्यादा तक राजनीति नहीं कर सकते. वास्तविक समस्याओं से कब तक मुंह चुराएंगे. शिवहर अकेला जिला है जो रेल नेटवर्क से नहीं जुड़ा है. शिवहर के नागरिकों को कहीं भी जाना हो तो रेल सेवा…

Read More

नीलहे गये-मिलहे आये #चंपारण-गांधी के बाद -3

  हालांकि यह क्षणिक मामला था. सिर्फ बदला लेने के लिये नील प्लांटर सालों तक खेती नहीं कर सकते थे. तमाम कोशिशों के बावजूद नील प्लांटरों के घाटे की भरपाई नहीं हो सकी. 1920 के बाद धीरे-धीरे नील प्लांटरों ने अपनी कोठियों को बेचकर यहां से जाना शुरू कर दिया. चंपारण के किसानों की असली परेशानी इसके बाद शुरू हुई. इसका जिक्र 1950 की लोहिया आयोग रिपोर्ट में मिलता है. लोहिया आयोग रिपोर्ट एक स्वतंत्र जांच रिपोर्ट है, जिसे प्रख्यात समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया की अध्यक्षता में 1950 में…

Read More

तिनकठिया बंद हो गयी मगर कम नहीं हुआ अत्याचार #चंपारण-गांधी के बाद-2

चंपारण सत्याग्रह के बाद जब तिनकठिया प्रथा को खत्म करने का एक कानून बन गया और महात्मा गांधी को अहमदाबाद मिल मजदूरों के आंदोलन की वजह से यहां से जाना पड़ा तो शायद वे मन में एक संतुष्टि का भाव लेकर गये होंगे कि अब कम से कम नील किसानों को शोषण की उस संवेदनहीन प्रक्रिया से गुजरना नहीं पड़ेगा. मगर जब आप गांधी के चंपारण से जाने के बाद के दिनों पर गौर करेंगे तो पायेंगे कि यह खुशी बहुत अधिक दिनों तक बरकरार नहीं रही. इस बात के…

Read More

क्या चंपारण सत्याग्रह आधा-अधूरा किसान आंदोलन था? चंपारण-गांधी के बाद-1

बेतिया के किसान नेता राजकुमार शुक्ल की जिद पर नील किसानों की समस्या को समझने के लिए 10 अप्रैल, 1917 को गांधी पहली बार बिहार आये थे. उन्होंने शुक्लजी से कह रखा था कि वे महज तीन-चार रोज रुकेंगे और किसानों से बात कर उनकी समस्या को समझने की कोशिश करेंगे. मगर पहले तिरहुत के कमिश्नर मोरशेड की बेरुखी और फिर मोतिहारी कचहरी में पेशी के आदेश के बाद उन्हें समझ में आ गया कि वे समस्या को जितनी छोटी समझते हैं, उतनी छोटी है नहीं. उन्होंने तय कर लिया…

Read More

विशेष दर्जा तो बिहार को चाहिए

इन दिनों विशेष राज्य के मुद्दे पर आंध्र प्रदेश की सरकार केंद्र से नाराज है, वहां के सांसद एकजुट होकर लोक सभा में आंदोलन कर रहे हैं, मगर बिहार की सरकार ने भाजपा से समर्थन लेने के बाद विशेष राज्य की दावेदारी छोड़ दी है और बिहार के सांसद भी इस मसले पर कोई सवाल नहीं कर रहे. इन्हीं मसलों पर प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मोहन गुरुस्वामी ने अपने फेसबुक वाल पर यह पोस्ट डाली है और आंकड़ों और ऐतिहासिक परिस्थितियों के जरिये बिहार के विशेष दर्जे की वकालत की है. यह…

Read More

अजब हैं बिहार के किसान, न आंदोलन करते हैं, न आत्महत्या, बस ट्रेन पकड़ के पंजाब निकल लेते हैं

पुष्यमित्र मुम्बई के किसान आंदोलन से याद आ गया, हमारे बिहार में भी किसान हैं. और हमारे वाले जो किसान हैं, वे अद्भुत हैं. वे कमाने के लिए भले ही पंजाब, दिल्ली, बंबई, मद्रास या श्रीनगर चले जायें, मौका मिले तो मिडिल ईस्ट भी घुस जायें, लेकिन आंदोलन के लिए पटना भी नहीं पहुंचते. पटना तभी आते हैं, जब लालू जी फिरी में रैली के लिए बुलाते हैं. अपने मसलों के लिए नहीं. अभी घर गया था तो पता चला कि पूरे इलाके में जहां-तहां मकई के भुट्टे से दाना…

Read More