अरुणाचल प्रदेश की औरतों को क्या सिखा रही हैं पूर्णिया की ये ग्रामीण महिलाएं?

बासु मित्र पूर्णिया जिले के विभिन्न गांवों की 12 महिलाएं हाल ही में अरुणाचल प्रदेश की एक माह की यात्रा करके लौटी हैं. दिलचस्प बात यह है कि ये औरतें घूमने फिरने के लिये वहां नहीं गयी थीं. इनकी यात्रा का मकसद वहां की औरतों को स्वयं सहायता समूह के प्रति जागरूक करना, उन्हें समूह बनाना सिखाना और समूहों को निर्माण करना था. इन दर्जन भर महिलाओं के लिए यह अनूठा अनुभव था. क्योंकि महज कुछ ही साल पहले तक इनमें से ज्यादातर महिलाएं गांव की देहरी भी नहीं लांघ…

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जिस स्कूल की गांधी ने स्थापना की उसे कुछ इस तरह जिंदा रखा भितिहरवा वालों ने

इतिहास गवाह है कि जिस-जिस प्रयोग से गांधी का नाम जुड़ा है, वहां आदर्श, इमानदारी और त्याग की भावना भी जुड़ती चली गयी. पश्चिमी चम्पारण के भितिहरवा में गांधी द्वारा खोले गये आश्रम और विद्यालय की भी कुछ ऐसी ही दास्तां हैं. गांधी की अपील पर एक स्थानीय मठ ने स्कूल के लिए जमीन दी. कस्तूरबा के नेतृत्व में वहां छह माह तक शिक्षा दान चला. फिर स्थानीय लोगों ने विद्यालय की कमान संभाल ली. एक जगह दिक्कत हुई तो दूसरी जगह और फिर तीसरी जगह जमीन दी गयी ताकि…

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वह गाय जो गुरु नानक के कहने पर मुंह में गंगाजल भर कर लाती और पटना के जेतामल को स्नान कराती

सिखों के लिए पटना साहिब का अपना ही महत्व है. इसलिए नहीं कि यहां उनके दसवें गुरु गोविंद सिंह का जन्म हुआ और बचपन गुजरा, जो गुरुनानक देव के बाद सबसे महत्वपूर्ण गुरु माने गये. बल्कि इसलिए भी कि अपनी जवानी के दिनों में नानक देव पटना से होकर गुजरे और उन्होंने यहां तीन महत्वपूर्ण गुरुद्वारों की स्थापना की. उस वक्त नानक देव 37 साल के थे. उन्होंने यहां आठ महीने से अधिक प्रवास किया. उनका पटना में प्रवास करना और शिष्यों को बनाना ही वह आधार था कि गुरुतेग…

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उजड़ने की कगार पर तो नहीं पहुंच गया है हजारों साल पुराना सोनपुर मेला?

एशिया के सबसे बड़े पशु मेला के रूप में मशहूर के इतिहास की यह संभवतः पहली घटना होगी जब दुकानदारों ने खुद ही मेले में बंदी की घोषणा कर दी है. जी हां, आज सोनपुर मेला बंद है. दिलचस्प है कि मेले के सभी दुकानदारों ने यह बंदी उन नर्तकियों की गिरफ्तारी के विरोध में किया है, जिन्होंने दो रोज पहले डांस थियेटर के संचालन की इजाजत नहीं मिलने पर विरोध प्रदर्शन किया था. स्थानीय प्रशासन का कहना था कि डांस थियेटरों के सामने लगे अश्लील पोस्टरों से लग रहा…

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आपने सुना है लिट्टी-चोखा मेला का नाम

चरित्रवन में खुले में लिट्टी पकाती महिलाएं कल ही बक्सर का लिट्टी-चोखा मेला बीत गया. कई दिनों से योजना बना कर बैठा था, छुट्टी थी, फिर भी नहीं जा पाया. अब पता नहीं कब मौका मिले. अद्भुत है पंच कोसी मेले के आखिरी दिन बक्सर शहर में लगने वाला लिट्टी-चोखा का मेला. लोग बताते हैं कि उस रोज पूरे शहर में धुआं ही धुआं उठता रहता है. पंच कोसी यात्रा करने वाले तो जगह-जगह गोइखा सुलगाकर लिट्टी पकाते ही हैं, पूरे बक्सर शहर में हर घर में इसी तरह लिट्टी…

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