हिंदू तीर्थ साबित करने की जिद में 2000 साल पुराने सिकलीगढ़ टीले पर मंदिर बनाने की तैयारी

इस बार होली के एक दिन पहले सिकलीगढ़ गया था. इस जगह पाये गये एक प्राचीन स्तंभ को प्रह्लाद का खंबा कहा जाता है और इस साल वहां होलिका दहन का राजकीय समारोह भी शुरू हुआ है. वहां, उस पूरे इलाके को घूमने के दौरान पता चला कि यह क्षेत्र कम से कम दो हजार साल पुरानी विरासत को अपने अंदर छिपाये हुए है. पुरातत्वविद वहां की ईंटों को दो से ढा़ई हजार साल पुराना बताते हैं. मगर जिस टीले से ये ईंटें मिली हैं वहां क्रेन से खुदाई कर…

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विचारधाराओं की खूनी जंग से जख्मी एक बौद्ध मुल्क में हिंदुओं का सबसे बड़ा मंदिर

मिहिर झा सोशलिज्म कितना खूनी हो सकता है? पूंजीवाद कितना खूनी हो सकता है? किसी देश के इतिहास का एक ऐसा कालखंड जब विभिन्न विचारधाराओं के एक के बाद एक इम्प्लीमेंटेशन ने 30 लाख (कुल आबादी का २१%) लोग मार दिए. कुछ आंकड़ों पर नज़र डालें. कम्बोडिया को फ्रेंच उपनिवेशवाद से 1953 में आजादी मिली. राजसत्ता वापस कम्बोडिया के राजकुमार सिंहनूक के हाथ में गयी. भयंकर गरीबी में जी रही जनता के राजा का सबसे प्रिय कार्य था सिनेमा बनाना! खुद ही लिखते, खुद ही डायरेक्ट करते, खुद ही अभिनय…

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जनकपुर- परदेस में सीता का एक खूबसूरत-भव्य मंदिर और प्रेम में डूबे स्त्री-पुरुष

पुष्यमित्र नेपाल स्थित जनकपुर मिथिलांचल के लोगों के लिए एक बड़ा और भावनात्मक तीर्थ है. कहते हैं, जनकपुर ही वह जगह है, जहां सीता और राम का विवाह हुआ था. वहां एक भव्य जानकी मंदिर है. जो संगमरमर से बना है. 1910 में बने इस मंदिर का आर्किटेक्ट काफी खूबसूरत है और नेपाल और भारत के मिथिलाचंल की महिलाएं इस तीर्थ से गहरा लगाव महसूस करती हैं, क्योंकि देवी सीता का यह इकलौता सबसे बड़ा मंदिर है. विकीपीडिया बताता है कि यह हिंदू-कोइरी आर्किटेक्ट का बेहतरीन नमूना है. 50 मीटर…

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नालंदा के खंडहर ही नहीं दरभंगा की हेरिटेज बिल्डिंग्स भी हमारी धरोहर हैं

सुशांत भास्कर बिहार में जब पुरातात्विक एतिहासिक धरोहर की चर्चा करते हैं तो अक्सर गया, बोधगया,  नालंदा, पटना और वैशाली जैसे कुछ क्षेत्रों पर आकर ठहर जाते हैं, जबकि पुरावस्तुओं के संबंध में बने अधिनियम, 1972 के अनुसार कम से कम एक सौ वर्ष से विद्यमान सिक्के,  भवन, कलाकृतियों, ऐतिहासिक महत्व की कोई वस्तु, पदार्थ या चीज़ आदि शामिल हैं. भारत सरकार के द्वारा बनाये गये पुरावशेष तथा बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम, 1972 सम्पूर्ण भारत मे लागू है. 1976 में बिहार सरकार ने बिहार प्राचीन स्मारक अवशेष तथा कलानिधि अधिनियम ,1976…

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एक अनोखी बस यात्रा, दो संतोषों का असंतोष और बदले बिहार को देखने आये मामू्#बिदेसियाकीचिट्ठी

निराला बिदेसिया बात थोड़ी पुरानी हो चली है लेकिन जब-तब मानस पटल पर ताजगी के साथ चस्पां हो जाने को बेताब हो जाती है. हम रोहतास जिले के एक बाजार राजपुर से सासाराम पहुंचे. मैं ट्रेन से रांची निकलने के मूड में था. लेकिन साथ में चल रहे मामू ने कहा- बस का आनंद लो बबुआ, मजा आएगा. थोड़ा गाना बजेगा, कुछ देर लाइन होटल पर रूकेंगे, वगैरह-वगैरह. मैं आग्रह करता रहा कि बिना रिजर्वेशन के भी ट्रेन में चलना बस की तुलना में आरामदेह होता है और कुछ हद…

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गालिब शराब छूटती नहीं, कोसी वाले न्यू इयर मनाने नेपाल चले गये

मामला सिर्फ बिहार के नगर विकास मंत्री और उनके अंगरक्षकों का नहीं है. बिहार के युवा इस साल न्यू इयर सेलिब्रेट करने बड़ी संख्या में राज्य से बाहर गये थे. कोई बंगाल पहुंचा तो, कोई झारखंड, कोसीवालों के लिए नेपाल नजदीक था तो वे सीधे बार्डर क्रास कर गये. नेपाल की सड़कों और वहां के होटलों-पबों में किस कदर बिहारियों की भीड़ थी इसका आंखों-देखा हाल रिपोर्टर आयुष कुमार बता रहे हैं, अपनी इस रिपोर्ट में… आयुष इसी साल अप्रैल में शराबबंदी के दो साल पूरे हो जायेंगे. इन दो…

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मॉस्को नाइट : वरजिन्स मेन्स क्लब जहाँ लोग ऑर्गेज्म ख़रीदते हैं

बकर पुराण के लेखक अजीत भारती अपने मित्र धैर्यकांत के साथ इन दिनों रूस की यात्रा पर हैं और सोशल मीडिया पर वे लगातार वहां की दुनिया के बारे में लिख रहे हैं. उनका यह पीस वरजिन्स मेंस क्लब के बारे में है. यूरोप के कई मुल्कों में न्यूड और सेमीन्यूड डांस क्लबों की मौजूदगी बहुत आम-फहम बात है, उन्हें कानूनी इजाजत भी है. हालांकि अपने यहां सोनपुर मेला में भी थियेटरों में होने वाले डांस प्रशासन की आंख में धूल झोंक कर अक्सर सेमी न्यूड और न्यूड हो जाया…

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भूतों के नाम पर लड़ रहे हैं ‘बिहार सरकार’ के पोते और गांव के लोग मजा ले रहे हैं

निराला जी बिहार-झारखंड की पत्रकारिता का ऐसा नाम हैं, जिन्हें परिचय की जरूरत नहीं है. खास कर बिहार के सामाजिक-सांस्कृतिक मसलों पर उनकी गहरी पकड़ है. प्रभात खबर और तहलका जैसे मीडिया संस्थानों में छपने वाली उनकी रिपोर्ट से हम सब वाकिफ हैं. अब वे बिहार कवरेज के लिए नियमित रूप से बिदेसिया की डायरी लिखना शुरू कर रहे हैं. इस डायरी में वे उन किस्से कहानियों का जिक्र करेंगे, जो अलग-अलग इलाकों में घूमते हुए उनके संपर्क में आते हैं. उनकी मोहक भाषा का आनंद अलग से मिलेगा. आइये…

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फोटो स्टोरी-यह क्या सचमुच पुस्तक मेला ही है?

इस बार के पटना पुस्तकमेला को नया और आधुनिक भले बताया जाए मगर यह कुल मिलाकर अजीब है. एक तो यह खुले मैदान से उठ कर भवन में चला गया यह तो लोगों को पहले ही अखर रहा है. मगर गौर से घूमेंगे तो पता चलेगा इसमें और भी कई गड़बड़ियां हैं. आपको किताबों की दुकानें बहुत कम नजर आएंगी. आपको आधी से अधिक दुकानें प्रचार वाली और दूसरी सामग्रियां बेचने वाली नजर आएंगी. एक पूरी कतार बिहार सरकार के विभिन्न विभागों की है. जिसमें सबसे प्रमुख मद्यनिषेद विभाग है.…

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