‘मैंने राजकमल को कभी बेहोश नहीं देखा’

आज हिंदी-मैथिली के सबसे चर्चित-विवादित-तीखे विषैले-बदनाम कवि-कथाकार राजकमल चौधरी का जन्म दिन है. इस मौके पर हम आपके लिए लेकर आये हैं उनके बारे में उनके छोटे भाई मित्रेश्वर अग्निमित्र का यह आलेख, जो झारखंड के घाटशिला कॉलेज में इतिहास पढ़ाते हुए रिटायर हुए हैं और वहीं रहते हैं. वे खुद एक प्रतिष्ठित कवि हैं. अब तक राजकमल के जीवन पर कई लोगों ने लिखा, मगर उनके अपने परिवार की ओर से, एक प्रत्यक्षदर्शी के रूप में उनकी रचना, उनके जीवन, उनके बारे में उड़ती अफवाहों के बारे में बिल्कुल…

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तीन पत्रकार, तीन किताबें, तीनों में बिहार की अलग-अलग कहानियां

पटना बुक फेयर का आखिरी रविवार. आज बिहार के तीन पत्रकारों की किताबें एक साथ एक मंच पर रिलीज होगी. ये तीनों किताबें बिहार की अलग-अलग कहानियां लेकर आ रही हैं. तीनों का लोकापर्ण एक ही मंच से होगा, जिस पर दो वरिष्ठ कवि और एक इतिहास लेखक भी मौजूद रहेंगे. कार्यक्रम दोपहर एक बजे से दो बजे तक चलेगा. पुस्तक मेला के आखिरी रविवार को यह संयोग हिंदी के सबसे प्रतिष्ठित प्रकाशक राजकमल प्रकाशन की वजह से बना है. वे इस मेले में बिहार के तीन पत्रकारों की किताब…

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“अजीमाबाद” में आज लॉंच हो रहा है गीताश्री का पहला नॉवेल “हसीनाबाद”

जानी-मानी लेखिका गीताश्री का पहला नॉवेल हसीनाबाद आज पटना पुस्तक मेला में लॉंच हो रहा है. दोपहर साढ़े तीन बजे से पुस्तक विमोचन कार्यक्रम है. यह विमोचन हिंदी-मैथिली की सुपरिचित कथाकार उषाकिरण खान, वरिष्ठ कथाकार हृषिकेश सुलभ और अवधेश प्रीत के हाथों होगा. लॉंचिंग से पहले ही हसीनाबाद की अच्छी समीक्षाएं आ रही हैं. दिलचस्प है कि गीता श्री की दो और किताबें पटना पुस्तक मेला से ही लॉंच हुई हैं. उन्होंने इस बात को अपने इस फेसबुक पोस्ट में बड़ी शिद्दत से याद किया है. हसीन संयोग मेरा पहला…

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पुस्तक मेला आयोजकों ने बाल साहित्य की चर्चा से बचपन को ही ‘गायब’ कर दिया

शशांक मुकुट शेखर 10 दिवसीय पटना पुस्तक मेला का औचित्य हर बीतते दिन के साथ घटता जा रहा है. आयोजकों की लापरवाही से हर दिन कुछ न कुछ गड़बड़ियां हो रही हैं और लोग निराश होकर लौट रहे हैं. ऐसे में अगले साल अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला होने की बात बिहार के साहित्य जगत का सबसे बड़ा मजाक लगता है. इसी बीच सोमवार को खबर मिली कि पुस्तक मेले में हिंदी के प्रसिद्द कवि श्री केदारनाथ सिंह से हिंदी के एक और प्रसिद्द कवि श्री अरुण कमल बातचीत करने वाले हैं.…

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वह बिहारियों के गुमनाम इतिहास की कड़ियां जोड़ती रहीं और हमने उनका कत्ल कर दिया

P.M. नई पीढ़ी के कम ही बिहारी इतिहासकार पापिया घोष का नाम जानते होंगे. आज उस बात के ठीक ग्यारह साल हो रहे हैं, जब रात को कुछ डकैतों ने चोरी के इरादे से घुसकर उनका और उनकी नौकरानी का नृशंसता से कत्ल कर दिया था. उस रात हमने पापिया घोष समेत उन तमाम संभावनाओं को गंवा दिया था, जो उनके दीर्घायु होने की वजह से हम बिहार वासियों को मिलने वाला था. आधुनिक इतिहास में बिहार और पूरे साउथ एशिया में फैले बिहारियों के इतिहास के बारे में समाजशास्त्रीय…

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भोजपुरी की टांग खींचना छोड़कर पहले हिंदी को राष्ट्रभाषा बनायें – सौरभ पांडेय

साहित्य को प्रचार का माध्यम बनाने से सपाट रचनाएं की जाने लगी. इससे जन-मानस पर साहित्य का प्रभाव कम हुआ है- ये बात प्रभा खेतान फाउंडेशन के आखर द्वारा आयोजित बातचीत कार्यक्रम में भोजपुरी के प्रसिद्ध लेखक सौरभ पांडेय ने कही. बातचीत युवा लेखक डॉ० जितेंद्र वर्मा ने की. एक प्रश्न के उत्तर में सौरभ पाण्डेय ने कहा कि भोजपुरी में रचनाशीलता का प्रमाण सदी में गुरु गोरखनाथ से मिलता है. संत कबीर के बाद से भोजपुरी रचना की निरंतरता है. कार्यक्रम की शुरुआत में सौरभ पाण्डेय का परिचय देते…

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‘नई वाली हिंदी’ इस बार भी नहीं आयेगी पटना

कल से पटना के ज्ञान भवन में पटना पुस्तक मेला की शुरुआत हो रही है. इस मेले को लेकर कई तरह की खबरें कही जा रही है. एक तरफ पहली बार बिहार सरकार इस मेले में साझीदार बना है. फिर अगले साल से इंटरनेशनल होने की भी बात है. तो दूसरी तरफ मेले का धूप से सरकारी ज्ञान भवन की छांव में चला जाना आम पाठकों को अखर रहा है और स्टॉल कम होने की भी बातें हैं. मगर पटना के साहित्य पाठकों के लिए इस बार भी वही निराश…

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आइये जानते हैं आखर के इस बार के मेहमान सौरभ पांडेय को, आयोजन कल है

बिहार की लोकभाषाओं को लेकर चलाये जा रहे गंभीर विमर्श के मासिक आयोजन आखर में इस माह के मेहमान भोजपुरी लेखक सौरभ पांडेय होंगे. कल पटना स्थित बिहार इंडस्ट्रीज एसोशियेशन के भवन में दिन ग्यारह बजे इनसे बातचीत करेंगे लेखक-पत्रकार जीतेंद्र वर्मा. अगर आप बिहार के लोकभाषा और साहित्य पर गंभीर विमर्श में रुचि रखते हैं तो यहां समय निकाल कर पहुंचें. आइये लेखक सौरभ पांडेय का परिचय जानते हैं सौरभ पाण्डेय का मूल पैत्रिक स्थान उत्तरप्रदेश के बलिया जनपद का द्वाबा परिक्षेत्र है. विगत पच्चीस वर्षों से आपका परिवार…

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पटना पुस्तक मेला-‘ज्ञान’ को ‘भवन’ में नजरबंद करने की तैयारी

शशांक मुकुट शेखर खुला आसमान स्वछंदता का प्रतीक है और बंद दरवाजे बेशक गुलामी को दर्शाते हैं. और जब बात महिला सशक्तिकरण की करें तो आजादी के प्रतीकों का इस्तेमाल करना बेहद आवश्यक होता है. आगामी 2 दिसंबर से पटना में पुस्तक मेले का आयोजन किया जा रहा है. थीम रखा गया है ‘नारी सशक्तीकरण.’ पुस्तक मेले के सभी आयोजन में महिलाओं की भरपूर भागीदारी होने वाली है. पर महिलाओं के सशक्तिकरण पर आधारित पुस्तक मेले का गाँधी मैदान के खुले परिसर से ज्ञान भवन के बंद कमरों में शिफ्ट…

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इंटरनेशनल होने की डगर पर पटना पुस्तक मेला, इस बार महिलाओं का रहेगा राज

सत्यम कुमार झा इस बार का पुस्तक मेला एक अभ्यास है, व्यवस्थापक तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि 25 वां पुस्तक मेला जो अगले साल लगेगा अन्तराष्ट्रीय होने वाला है. मुझे वैसे ही याद है कि इसी साल फरवरी में हुए पुस्तक मेला में माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आश्वासन दिया था कि अब पटना में अंतराष्ट्रीय पुस्तक मेला लगेगा. इसके लक्षण दिखने लगे है. इस बार खुद बिहार सरकार पुस्तक मेला में सहभागिता निभा रही है. संभवतः इसी वजह से इस बार का पुस्तक मेला गांधी मैदान से हटकर ज्ञान…

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