चर्चिल की भतीजी, दरभंगा का जमींदार और महात्मा गांधी की कांस्य प्रतिमा

पुष्यमित्र आज महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है. इस मौके पर एक अनूठा किस्सा लेकर आया हूं. इस किस्से के तीन किरदार हैं. पहली चर्चिल की भतीजी, वही विंस्टन चर्चिल को गांधी को शातिर बुड्ढा कहता था. दूसरे दरभंगा के जमींदार कामेश्वर सिंह जिन्हें अंगरेज सरकार ने सर और नाइट कमांडर की उपाधि दी थी और तीसरे खुद महात्मा गांधी हैं, जो शांति और प्रेम के वैश्विक प्रतीक हैं. यह दिलचस्प है कि चर्चिल की भतीजी क्लेयर शेरिडन 1931 के आसपास गांधी की आवक्ष मूर्ति बनायी थी. जाहिर सी बात है…

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बसंत सबका है, खुसरो ने औलिया को पीले फूल देकर ही शोक से उबारा था

उपासना झा प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु। [ हे परम चेतना, सरस्वती के रूप में आप हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं. हममें जो आचार और मेधा है उसका आधार आप ही हैं. आपकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है.] ऋग्वेद में देवी की स्तुति इस प्रकार की गई है. माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को विद्या की अधिष्ठात्री देवी की पूजा की जाती है. तिथि के अनुसार आज ही हिंदी के सबसे बड़े कवि महाप्राण का जन्मदिन भी है. ‘मैं ही बसंत का अग्रदूत’…

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कभी लड्डू खाने पहुंचते थे, आजकल पद्मावत की प्रति देखने लोग मनेर पहुंच रहे हैं

बिहार में भले पद्मावत फिल्म लगे न लगे, मगर लोगों का आकर्षण पद्मावत के प्रति कम नहीं हो रहा. फिल्म नहीं तो मलिक मोहम्मद जायसी की किताब पद्मावत ही सही, जिसपर यह फिल्म बनी है. खबर है कि इन दिनों बड़ी संख्या में लोग इस किताब को देखने, पढ़ने और छूने मनेरशरीफ पहुंच रहे हैं. बिहार कवरेज व्याकरणशास्त्री पाणिनी और वररुचि, सूफी संत मखदूम याह्या मनेरी और मखदूम दौलत की धरती मनेर जो अपने स्वादिष्ट लड्डुओं की वजह से रही है, इनदिनों एक खास वजह से लोगों के आकर्षण का…

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पढ़िये, सच्चिदानंद सिंह की कहानी ‘पकड़वा’

इस पुस्तक मेले में साहित्यिक रचनाओं से जुड़ी कई किताबें आयीं, इनमें से ब्रह्मभोज सबसे अलग इसलिए है, क्योंकि इसकी कहानियों में पुराना क्लासिकल अंदाज तो है ही, नये जमाने की नयी सोच भी शामिल है. भूले-बिसरे दिनों की छौंक के बीच से कुछ ऐसे किस्सों को निकाल कर लेखक सच्चिदानंद सिंह लाते हैं, जो आज भी आपको उतना ही आकर्षित करती है. आज छुट्टी के दिन आप आराम से पढ़िये उनकी इस संग्रह की एक कथा पकड़वा… सच्चिदानंद सिंह भागलपुर विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के रहने के लिए छात्रावास तो…

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इस भागलपुरवासी को भी मिला है साहित्य अकादमी पुरस्कार

बिहार कवरेज साहित्य अकादमी पुरस्कार देश के 24 भाषाओं की रचनाओं के लिए दिया जाता है, मगर चर्चा में हर बार सिर्फ हिंदी का साहित्य अकादमी पुरस्कार रहता है. जैसे इस बार तीन बिहारी लेखकों को साहित्य अकादमी पुरस्कार देने की घोषणा की गयी है. मैथिली के लेखक उदय नारायण सिंह नचिकेता को साहित्य अकादमी मिलने की चर्चा कहीं-कहीं जरूर हुई, बांकी दो लेखकों की कहीं चर्चा नहीं हुई. उनमें से एक डॉ. निरंजन मिश्र हैं, तो दूसरे इंद्रकांत झा हैं. इंद्रकांत झा को तो गुजराती से मैथिली में अनुवाद…

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मैथिली का मचान दिल्ली में ही क्यों बनता है, पटना में क्यों नहीं?

खबर आ रही है कि दिल्ली के अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला में मैथिली पुस्तकों, लेखकों और कलाचारों के जुटान के लिए ‘मैथिली मचान’ के नाम से एक स्टॉल बुक कराया गया है. इस खबर ने सहज ही पटना के मैथिली भाषियों के मन में इस कचोट को पैदा कर दिया कि यह मचान पटना पुस्तक मेला में क्यों नहीं बना. पटना जो बिहार की राजधानी है, वहां लगातार मैथिली का सम्मान घटता जा रहा है, जबकि देश की राजधानी दिल्ली में पिछले दिनों लगातार मैथिली मजबूत हुई है. इस सवाल को…

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तकलीफदेह है यह सोचना कि अब पटना में स्निग्ध जी से मुलाकात नहीं होगी

जाने–माने कवि–कथाकार सुरेंद्र स्निग्ध का कल निधन हो गया. वे पटना के साहित्यिक जीवन में एक जाना–पहचाना और आत्मीय नाम थे. पूर्णिया जिले से वास्ता रखने वाले स्निग्ध जी के जाने पर पूरे सोशल मीडिया में उदासी तारी है. इस मौके पर जाने–माने पत्रकार और फिल्म निर्देशक, हम सबके अविनाश भाई ने बहुत शार्ट नोटिस में यह दिल को छू लेने वाला स्मृति लेख लिखा है. आपके लिए… अविनाश सुरेंद्र स्निग्ध चले गये. सबको एक दिन चले जाना होता है. लेकिन जाने की एक सम्मानजनक उम्र होती है. सुरेंद्र स्निग्ध…

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देखिये पटना पुस्तक मेला की यह मजेदार वीडियो रिपोर्ट

पटना पुस्तक मेला बीत चुका है. इस मेले को लेकर कई रिपोर्ट लिखे गये हैं. मगर ज्यादातर रिपोर्ट बुक लांचिंग और साहित्यिक गतिविधियों को केंद्र में रख कर लिखे गये हैं. इस बीच हमारे साथी अजय कुमार ने एक अलग किस्म की वीडियो रिपोर्ट तैयार की है. जो मजेदार भी है और आम लोगों को ध्यान में रख कर बनायी गयी है. आप भी देखें और आनंद लें…  

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जानिये उस आचार्य को जिसने नचनिया-बजनिया ‘भिखारी’ को सबसे पहले लोकनायक कहा

आज भिखारी ठाकुर की जयंती है. इस बार की जयंती खास वर्ष में है. भिखारी ठाकुर के नाच के सौ साल पूरे हुए हैं. उनकी रंगयात्रा का शताब्दी वर्ष है. अब भिखारी को रंगकर्म, गीतकारी, महान रचनाकार, समाजसुधारक, अपने समय के सवालों से मुठभेड़ करनेवाले नायक के रूप में रखकर आकलन किया जा रहा है. लेकिन जब वे थे, तब ऐसी स्थिति नहीं थी. तब ऐसे कर्म करनेवाले को महज नचनिया-बजनिया-लौंडा ही कहा जाता था. उस समय सबसे पहले एक व्यक्ति खड़ा हुआ था जो हिंदी साहित्य की दुनिया में…

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शैलेंद्र उर्फ बोस्की की कमीज और सिगरेट का डब्बा- गुलजार

आज गीतकार शंकर शैलेंद्र (पूरा नाम- शंकरदास केसरीलाल शैलेंद्र) की पुण्यतिथी है. हम बिहार वाले अक्सर भूल जाया करते हैं कि शैलेंद्र हमारे अपने थे. भले ही वे रावलपिंडी में पैदा हुए और मथुरा में पढ़े-लिखे. मगर उनकी जड़ें बिहार के आरा के अख्तियारपुर में थी. तभी उन्होंने जो इकलौती फिल्म बनायी वह बिहार के कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी तीसरी कसम थी. बहरहाल, आज उनकी पुण्यतिथि पर यह आलेख पढ़िये, जो उनके ठीक जूनियर गीतकार गुलजार ने लिखा है, जो उनके बाद गीत पसंद करने वालों के दिलों पर…

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