‘जंगलराज’ तो था मगर लालू के दौर में नहीं

निराला बिदेसिया जंगलराज. राजनीति में पिछले करीब दो दशक से बेहद लोकप्रिय शब्दों में से एक है यह. यूं तो पूरे हिंदी प्रदेशों में ही शगल और सनक की तरह सर चढ़ने के बाद सबसे पॉपुलर शब्द भी है यह. जिसे कोई शब्द नहीं आता, वह फटाफट इस शब्द का इस्तेमाल करता है. विरोधी या सत्ताधारी दल को गरियाने के लिए. उसे नीचा दिखाने के लिए. आतंक-हिंसा-अराजक-अनुशासनहीन राजकाज और राजपाट को परिभाषित करने के लिए. अपने भाषण, संबोधन, वार्ता आदि में ताश के पत्ते की तरह ‘जंगलराज’ शब्द को फेंटकर…

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मधु लिमये ‘बम्बैया’, जिसने बिहार के मुंगेर औऱ बांका की जनता की रहनुमाई की

जयन्त जिज्ञासु आज भारतीय लोकतंत्र का जिस्म तो बुलंद है, पर इसकी रूह रुग्ण हो चली है. ऐसे में जोड़, जुगत, जुगाड़ या तिकड़म से सियासत को साधने वाले दौर में मधु लिमए की बरबस याद आती है. राजनीति के चरमोत्कर्ष पर हमें सन्नाटे में से ध्वनि, शोर में से संगीत और अंधकार में से प्रकाश-किरण ढूँढ लेने की प्रवीणता हासिल करने का कौशल मधु लिमये में दिखता है. प्रखर समाजवादी, उत्कृष्ट वक्ता व शानदार लेखक मधु लिमये (1 मई 1922 – 8 जनवरी 1995) की कल 22वीं पुण्यतिथि थी.…

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इस 143 साल पुरानी पार्ट टाइम आब्जर्बेटरी ने बताया, आज पूर्णिया का मौसम सबसे ठंडा है

पूरा बिहार शीतलहर की चपेट में है और इस मौसम का सबसे ठंडा दिन कल पूर्णिया में था, जब वहां का तापमान 1.2 डिग्री दर्ज किया गया. दिलचस्प है कि पूर्णिया में तापमान और मौसम के बदलाव को दर्ज करने के लिए जो आब्जर्वेटरी है, वह 1874 की बनी हुई है. तब अंगरेजों ने इसे पार्ट टाइम आब्जर्वेटरी के रूप में बनाया था. आइये जानते हैं बासुमित्र से इस आब्जर्वेटरी की दिलचस्प कहानी. बासुमित्र पूर्णिया के सबसे पुराने सरकारी कार्यालय में से एक अंग्रेजों के जमाने में स्थापित उत्तर बिहार…

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मराठाओं ने अछूत मानकर सेना में जगह नहीं दी, महारों ने लड़कर अपनी ताकत दिखा दी

कोरेगांव शौर्य दिवस पर बड़ा कंफ्यूजन है, कुछ लोगों को लग रहा है कि दलित इस मुद्दे पर मराठाओं पर विदेशी ताकतों की जीत का जश्न मना रहे हैं, यह कैसा जश्न है. मगर भीमा कोरेगांव की कहानी बिल्कुल अलहदा है. यह अंगरेजों की जीत का जश्न नहीं, उन पांच सौ महार दलित सैनिकों की शौर्य की गाथा है, जिन्हें जातीय दर्प में मराठाओं ने अपनी सेना में जगह नहीं दी थी. संजय तिवारी जी ने विस्तार से लिखा है… संजय तिवारी पुणे महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी कही जाती है.…

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एक ‘हींग की थैली’ की वजह से मिली थी लालू को पहली सजा

बिहार कवरेज आज चारा घोटाला की एक दूसरे मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को सजा का ऐलान होना है, मगर क्या आप जानते हैं कि लालू को पहली सजा हींग की वजह से मिली थी. वही हींग जो दाल और आलू-गोभी जैसी सब्जियों में खास तौर पर इस्तेमाल होता है. उसी हींग की वजह से किशोर लालू को उनके अपने गांव फुलवरिया से बेदखल करने का फैसला सुना दिया गया था. और यह फैसला कोई और नहीं उनकी मां मरछिया देवी ने सुनाया था. यह 1950 के दशक…

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जिसने देश को मनमोहन, मिथिला को रेल, रेलवे को मिथिला पेंटिंग और कोसी को तटबंध दिया

आज ‘कोसी बाबू’ ललित नारायण मिश्र की पुण्यतिथि है. अपने जाने के 43 साल बाद भी वे मिथिलांचल के सबसे पापुलर नेता माने जाते हैं. इंदिरा गांधी के दौर में देश की मेनस्ट्रीम राजनीति में उनका बड़ा दखल था. कई लोग उन्हें राजनीति का चाणक्य और संजय गांधी का राजनीतिक गुरु तक बताते रहे हैं. अब यह सब लोग जानते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की प्रतिभा को पहचानने और आगे बढ़ाने वाले वही व्यक्ति थे. बहरहाल मिथिलांचल का समाज आज भी उन्हें विकास पुरुष के तौर पर देखता…

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मुंगेर में चरण सिंह ने कहा था ‘भैंस बेचकर नोमिनेशन किया है, रामदेव को जिता देना’

जयन्त जिज्ञासु आज किसानों के हमदर्द चौधरी चरण सिंह (23.12.1902 – 29.05.87) का 115वां जन्मदिन है. वे भारत के 5वें प्रधानमंत्री (28.07.79 – 14.01.80) थे. इसके पहले वे थोड़े-थोड़े वक़्त के लिए दो बार उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री (3.4.67 – 25.2.68,  & 18.2.70 – 1.10.70) और मोरारजी के मंत्रिमंडल में हिन्दुस्तान के गृहमंत्री, वित्तमंत्री और उपप्रधानमंत्री रहे. चौधरी साहब और दो बार भारत के उपप्रधानमंत्री रहे ताऊ देवीलाल, दो ऐसे किसान नेता हुए जिनकी जनता के बीच ज़बरदस्त पैठ थी. यह किसानों की ही ताक़त थी कि चौधरी साहब और ताऊ…

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आज क्यों नहीं मनाते गुरु गोबिंद सिंह की जयंती? #शुकरानासमारोह

पुष्यमित्र वैसे तो गुरु गोबिन्द सिंह का 351वां जन्मदिन आज ही है, रोमन कैलंडर के मुताबिक उनका जन्म 22 दिसंबर 1666 को पटना साहिब में हुआ था. आप विकिपीडिया की शरण में जायेंगे तो वह भी यही बतायेगा. मगर 351 साल पहले अपने देश में रोमन कैलंडर को मानता ही कौन था. सो गुरु गोविन्द सिंह का जन्म पहले हिन्दू तिथि के मुताबिक पौष सप्तमी शुक्ल पक्ष को मनाया जाता रहा है, जो इस साल के 25 दिसंबर को पड़ता है. हालांकि नानकशाही कैलंडर के मुताबिक सिखों ने गुरु गोबिंद…

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अंगरेज कमिश्नर को अपना कुत्ता नहीं दिया, मगर गांधी ने कहा तो सिगार पीना छोड़ दिया

पुष्यमित्र अगर आप बिहार के रहने वाले हैं तो आपने पटना के सदाकत आश्रम का नाम जरूर सुना होगा. 1921 में इस आश्रम की स्थापना महात्मा गांधी के हाथों से हुई थी, फिर यह आजादी के दीवानों की गतिविधियों का केंद्र रहा. राजेंद्र बाबू जब राष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्त हुए तो उन्होंने इसी सदाकत आश्रम को अपना ठिकाना बनाया और आखिर वक्त यहीं गुजारा. आजादी के बाद से यह आश्रम कांग्रेस पार्टी का मुख्यालय रहा है. मगर क्या आपने कभी सोचा कि इसका नाम सदाकत क्यों पड़ा और सदाकत का…

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जानिये उस आचार्य को जिसने नचनिया-बजनिया ‘भिखारी’ को सबसे पहले लोकनायक कहा

आज भिखारी ठाकुर की जयंती है. इस बार की जयंती खास वर्ष में है. भिखारी ठाकुर के नाच के सौ साल पूरे हुए हैं. उनकी रंगयात्रा का शताब्दी वर्ष है. अब भिखारी को रंगकर्म, गीतकारी, महान रचनाकार, समाजसुधारक, अपने समय के सवालों से मुठभेड़ करनेवाले नायक के रूप में रखकर आकलन किया जा रहा है. लेकिन जब वे थे, तब ऐसी स्थिति नहीं थी. तब ऐसे कर्म करनेवाले को महज नचनिया-बजनिया-लौंडा ही कहा जाता था. उस समय सबसे पहले एक व्यक्ति खड़ा हुआ था जो हिंदी साहित्य की दुनिया में…

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