मैं भागलपुर बोल रहा हूं

यह आलेख आज से सात साल पहले भागलपुर से प्रभात खबर के प्रकाशन की शुरुआत के मौके पर छपा था. पुष्यमित्र मैं भागलपुर बोल रहा हूं. आपका अपना शहर भागलपुर. गंगा मैया के दक्षिणी किनारे पर तकरीबन पिछले तीन हजार साल से मेरा अस्तित्व कायम है. लिहाजा आप यह कह सकते हैं कि आपका शहर दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है. एक ऐसा शहर जिसके जलवे समय-सागर के थपेड़ों से वक्त बेवक्त बेरौनक जरूर हुए पर मिटे नहीं. महलों की रंगीनियां, शासकों की शौर्यगाथाएं और विद्वानों का…

Read More

सलाम कीजिये इन बच्चियों को, इन्होंने अपनी सहेली को बाल विवाह का शिकार होने से बचाया

बिहार कवरेज बाल विवाह को लेकर राज्य सरकार मानव श्रृंखला जैसे तामझाम तो खूब करती है, मगर जमीन पर कोई बच्ची बाल विवाह का शिकार हो रही हो तो उसे बचाने की कोई सटीक व्यवस्था नहीं है. यह बात तब जाहिर हुई जब गया में बाल विवाह का शिकार हो रही एक बच्ची को बचाने के लिए उसकी सहेलियों ने हेल्पलाइन पर फोन किया मगर किसी ने फोन नहीं उठाया. बाद में इन लड़कियों ने खुद थाने जाकर शिकायत की और अपनी सहेली को बाल विवाह का शिकार होने से…

Read More

कहानी राजा, महाराजा, महाराजाधिराज के उपाधियों की, भाया राज दरभंगा

सुशांत भास्कर कहा जाता है कि मुगलों के शासनकाल में  तिरहुत का राज्य संस्थापक महेश ठाकुर को मिला जिन्होंने मुगल बादशाह को समय समय पर नजराना देना शुरू किया … कालान्तर में नरपति ठाकुर के पुत्र विष्णु ठाकुर को मुगल शासक ने लगातार लड़ाई करने के कारण सिंह की उपाधि दी थी. 1860 में महाराजा महेश्वर सिंह के मरने के बाद लक्ष्मीश्वर सिंह के नाबालिग होने के कारण दरभंगा कोर्ट ऑफ वार्ड्स के अधीन चला गया था और यहाँ ब्रिटिश शासन की ओर से मुजफ्फरपुर के डिप्टी कलक्टर मिस्टर सीपी…

Read More

बेमौसम बरसात नहीं है राजद की पोलिटिकल घेराबंदी

p.m. बिहार में इन दिनों अचानक राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गयी हैं. कुशवाहा शिक्षा के लिए मानव श्रृंखला बनाते हैं और उसमें राजद शामिल होता है. राजद के थिंक टैंक शिवानंद तिवारी आनंद मोहन से मिलने जेल में चले जाते हैं. राजद की तरफ से कहा जाता है कि पप्पू यादव तो अपना आदमी है. जीतनराम मांझी अफसोस जताते हैं कि विधानसभा भंग नहीं करना उनकी सबसे बड़ी भूल थी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कभी प्रेस को बताते हैं कि कोई भ्रम में न रहे एनडीए ही जीतेगा. और कभी अपने…

Read More

जगदेव बाबू-जिन्होंने बचपन में ही अपने गांव को दिलाई थी पंचकठिया से मुक्ति

अनूप पटेल यह हम सब जानते हैं कि गांधी ने चंपारण में जाकर किसानों को तिनकठिया प्रथा से मुक्ति दिलायी थी. मगर ऐसी तिनकठिया और पंचकठिया बिहार के कई इलाके में थी. ऐसी ही एक प्रथा अरवल जिले के कुर्था प्रखंड के कुरहारी ग्राम में थी. वह जगदेव प्रसाद का गांव था. उस इलाके में किसानों की जमीन की फसल का पांच कट्ठा जमींदारों के हाथियों को चारा देने की एक प्रथा सी बन गयी थी. गरीब तथा शोषित वर्ग का किसान जमीदार की इस जबरदस्ती का विरोध नहीं कर…

Read More

हॉकरों को हक मिला और पटना में बढ़ गये अखबारों के दाम

बिहार कवरेज आज तीन दिन बाद अखबार हमारे घरों में गिरा. तीन दिन से अखबार से वंचित रह गये पटना वासियों को सुकून मिला. बजट के अगले दिन भी अगर अखबार नहीं मिलता तो लोगों के लिए बजट समझना मुश्किल हो जाता. क्योंकि बजट ऐसी चीज है कि जिसे आप टीवी देखकर समझ नहीं सकते. मगर क्या आपको खबर है कि इस बीच अखबारों के दाम बढ़ गये हैं. अपने अखबारों के पहले पन्ने पर देखिये. ज्यादातर अखबारों ने सूचना दी है कि उन्होंने अपनी कीमतें बढ़ा दी हैं. हिंदुस्तान…

Read More

बजट 2018- कर्ज मिलेगा, दाम मिलेगा और मंडियों का विकास होगा

बिहार कवरेज पहली नजर में ऐसा लग रहा है कि खेती के लिए यह बजट काफी अच्छा है. यह जरूरी भी था, क्योंकि पिछले दिनों एक एक्सपर्ट कमिटी ने सरकार को चेताया था कि 2014 के बाद से देश की कृषि व्यवस्था में लगातार गिरावट आ रही है और किसानों की आय भी घट रही है. यह एक्सपर्ट कमिटी किसानों की आय दोगुनी करने के लिए गठित कमिटी थी. उस कमिटी के सुझावों को मानते हुए इस बजट में कई ऐसे प्रावधान किये गये हैं, जो अगर ठीक से लागू…

Read More

कोई खोया-खोया महसूस कर रहा है, कोई कह रहा है, अच्छा हुआ आदत छूटी

पुष्यमित्र सुबह सवेरे चाय के साथ अखबार पढ़ना कई लोगों की आदत है. चौबीस घंटे वाले न्यूज चैनल और सोशल मीडिया के इस घनघोर दौर में भी यह आदत छूटती नहीं है. इसके बावजूद कि अखबार इन दिनों सरकार चालीसा में बदल चुके हैं. फिर भी राजधानी से लेकर राज्य के कोने-कोने से खबरों के अपडेट एक साथ यहीं मिलते हैं. भले ही अखबार के 24 पन्ने दो मिनट में पलटे जा सकते हैं, फिर भी अखबार एक आदत की तरह बची हुई है. यह बात तब और गंभीरता से…

Read More

अफसोस बिरला हाउस में उस रोज कोई बत्तख मियां नहीं था

पुष्यमित्र आज बत्तख मियां याद आते हैं. वैसे तो आज गांधी को याद करने का दिन है. आज ही दिल्ली के बिरला हाउस में गांधी की गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी. उस रोज बिरला हाउस में बत्तख मियां नहीं थे. होते भी तो गांधी को बचा पाते या नहीं, कहना मुश्किल है. बत्तख मियां उस रोज चंपारण के अपने गांव अकवा परसौनी में थे. उस रोज बिरला हाउस में नाथूराम गोडसे थे और उनके साथी थे. जिन्होंने गांधी पर गोली चलाई और गांधी की मौत हो गयी.…

Read More

जानिये उन 36 बिहारियों को जिनके विचार गूंजते हैं हमारे संविधान में

आज गणतंत्र दिवस है. आज के ही दिन हमें हमारा संविधान मिला है. वह संविधान जो पिछले 68 सालों से हमारे देश में समानता और न्याय की भावनाओं को जिंदा रखे हुए है. जो हमारे देश में अब तक हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करता रहा है. हम जब इस संविधान के निर्माण की बात करते हैं तो डॉ. आंबेडकर और डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे गिने-चुने नाम ही जुबां पर आते हैं. मगर इस संविधान को तैयार करने में 299 लोगों की एक बड़ी टीम थी, जिसे अलग-अलग राज्यों से…

Read More