अफसोस बिरला हाउस में उस रोज कोई बत्तख मियां नहीं था

पुष्यमित्र आज बत्तख मियां याद आते हैं. वैसे तो आज गांधी को याद करने का दिन है. आज ही दिल्ली के बिरला हाउस में गांधी की गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी. उस रोज बिरला हाउस में बत्तख मियां नहीं थे. होते भी तो गांधी को बचा पाते या नहीं, कहना मुश्किल है. बत्तख मियां उस रोज चंपारण के अपने गांव अकवा परसौनी में थे. उस रोज बिरला हाउस में नाथूराम गोडसे थे और उनके साथी थे. जिन्होंने गांधी पर गोली चलाई और गांधी की मौत हो गयी.…

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जानिये उन 36 बिहारियों को जिनके विचार गूंजते हैं हमारे संविधान में

आज गणतंत्र दिवस है. आज के ही दिन हमें हमारा संविधान मिला है. वह संविधान जो पिछले 68 सालों से हमारे देश में समानता और न्याय की भावनाओं को जिंदा रखे हुए है. जो हमारे देश में अब तक हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करता रहा है. हम जब इस संविधान के निर्माण की बात करते हैं तो डॉ. आंबेडकर और डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे गिने-चुने नाम ही जुबां पर आते हैं. मगर इस संविधान को तैयार करने में 299 लोगों की एक बड़ी टीम थी, जिसे अलग-अलग राज्यों से…

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कहानी दीपेश चांडक की, जिसने लालू को 55-60 करोड़, मिश्रा को 50 लाख दिये!

कल लालू के खिलाफ आये फैसले में सरकारी गवाह बने सप्लायर दीपेश चांडक की गवाही की महत्वपूर्ण भूमिका है. उसने ही अदालत को यह बताया था कि उसने श्याम बिहारी सिंहा के जरिये लालू को 55-60 करोड़ औऱ जगन्नाथ मिश्रा को 50 लाख दिये हैं. आज के प्रभात खबर में चांडक का पूरा बयान छपा है. घोटालों को प्रक्रिया को समझने के लिहाज से यह पूरा बयान काफी दिलचस्प है. आप भी पढ़ें. बिहार कवरेज सरकारी गवाह (एप्रूवर) बने दीपेश चांडक ने कोर्ट में दिये गये अपने बयान में लालू…

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कर्पूरी ठाकुर, जगन्नाथ मिश्रा और लालू यादव

आदित्य मोहन झा कर्पूरी ठाकुर, जगन्नाथ मिश्रा और लालू यादव। मौजूदा बिहार की जातिगत-राजनीति के वो बीज जिन्हें या तो कोई अच्छा कह सकता है या बुरा, इग्नोर नहीं कर सकता। आज का दिन तीनों पूर्व मुख्यमन्त्रियों के लिए महत्वपूर्ण है। कर्पूरी ठाकुर जी का जन्मदिन है और लालू जी सँग जगन्नाथ जी को भी जेल हो गयी है। कर्पूरी और लालू दोनों उसी ब्राह्मण व्यवस्था के खिलाफ खुद को कहते थे जिसका प्रतिनिधी शायद वो जगन्नाथ मिश्रा को बताते थे। ये सच जरूर है की बिहार के जातिगत बेड़ियों…

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अपमान का घूंट पीकर बदलाव की इबारत लिखने वाला योद्धा #कर्पूरीजयंतीविशेष

जयन्त जिज्ञासु (लेखक ) पिछड़ों-दबे-कुचलों के उन्नायक, बिहार के शिक्षा मंत्री, एक बार उपमुख्यमंत्री(5.3.67 से 31.1.68) और दो बार मुख्यमंत्री (दिसंबर, 70– जून, 71 एवं जून, 77-अप्रैल, 79) रहे जननायक कर्पूरी ठाकुर (24.1.1924 – 17.2.88) के जन्मदिन की आज 94वीं वर्षगांठ है. आज़ादी की लड़ाई में वे 26 महीने जेल में रहे, फिर आपातकाल के दौरान रामविलास पासवान और रामजीवन सिंह के साथ नेपाल में रहे. 1952 में बिहार विधानसभा के सदस्य बने. शोषितों को चेतनाशील बनाने के लिए वो अक़्सर अपने भाषण में कहते थे- उठ जाग मुसाफिर भोर…

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इस बिहारी राजनेता ने दी थी नेताजी के साइबेरिया में कैद होने की कांस्पिरेसी को हवा

नोट- इस आलेख का मकसद कहीं से इस बहस में नहीं पड़ना है कि 1945 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु हुई थी या नहीं. क्योंकि उनकी जांच के लिए गठित तीन आयोगों में से दो मान चुकी है कि नेताजी की मौत विमान हादसे में हुई थी और सरकार भी इस बात को स्वीकार कर चुकी है. हम उस राजनेता की भूली-बिसरी कहानी सामने लाना चाहते हैं, जिसने नेताजी के जिंदा होने के दावे के पक्ष में सबसे सनसनीखेज तथ्य पेश किये थे. पुष्यमित्र यह कहानी दरभंगा के…

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बसंत सबका है, खुसरो ने औलिया को पीले फूल देकर ही शोक से उबारा था

उपासना झा प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु। [ हे परम चेतना, सरस्वती के रूप में आप हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं. हममें जो आचार और मेधा है उसका आधार आप ही हैं. आपकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है.] ऋग्वेद में देवी की स्तुति इस प्रकार की गई है. माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को विद्या की अधिष्ठात्री देवी की पूजा की जाती है. तिथि के अनुसार आज ही हिंदी के सबसे बड़े कवि महाप्राण का जन्मदिन भी है. ‘मैं ही बसंत का अग्रदूत’…

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रघुनाथ झा तरह-तरह के लोगों को फोन किया करते थे, हम उनके हाव-भाव पढ़ा करते थे

एक जमाने में बिहार की राजनीति की धुरी रहे रघुनाथ झा का आज निधन हो गया है. कभी उनके करीबी रहे पत्रकार हरेश कुमार टुकड़ों में उनके बारे में कई दिलचस्प जानकारियां दे रहे हैं. आप भी पढ़ें. हरेश कुमार शिवहर विधानसभा क्षेत्र से लगातार 27 साल विधायक. गोपालगंज और बेतिया से 10 साल सांसद रहे रघुनाथ झा का दिल्ली के राममनोहर मनोहर लोहिया अस्पताल में निधन. अंबा ओझा टोला के रहने वाले रघुनाथ झा ने मुखिया (ग्राम प्रधान)से राजनीतिक यात्रा शुरू की थी. ……………………………………………………………………………………………… रघुनाथ झा की शुरुआत ग्राम…

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‘तेजस मैन’ जैसे सौ-पचास लोग होते तो प्रैक्टिकल परीक्षाओं में ऐसी जगहसाई नहीं होती

P.M. आइएससी के बच्चे माइक्रोस्कोप नहीं पहचान पा रहे, बीकर और फ्लास्क में फर्क नहीं कर पा रहे. यह किसी एक बच्चे या किसी एक स्कूल की कहानी नहीं है. यह वह सच्चाई है जो इन दिनों प्रायोगिक परीक्षाओं के दौरान उजागर हो रही है. ऐसा लग रहा है कि बिहार में पहली दफा प्रैक्टिकल की परीक्षाएं हो रही हैं. जगह-जगह बच्चे लैब के उपकरणों से जूझ रहे हैं. लाचार होकर शिक्षकों को खाना-पूर्ति भी करनी पड़ रही है. सबसे प्रैक्टिकल करवाना भी आसान नहीं है. क्योंकि छोटे से लैब…

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आज के दिन क्यों तिल, गुड़ और खिचड़ी खाते हैं पूरे देश के लोग #makarsankranti

मकर संक्रांति, लोहड़ी और पोंगल की बात तो सबको मालूम है, आज के ही दिन नेपाल में माघे संक्रांति और बांग्लादेश में सकरेन मनाये जाने का भी जिक्र हो रहा है. मगर क्या आप जानते हैं कि एमपी, छत्तीसगढ़ और गुजरात के आदिवासी भी इस दिन को अलग तरह से मनाते हैं और पूरे दक्षिणी एशिया में सूर्य के मकर राशि से वापसी के पर्व को एक चीज जोड़ती है वह है इस दिन का खास खान-पान. गुड़, तिल और खिचड़ी का भोजन. आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान पर शोध करने…

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