दिल्ली में हर पेड़ पर्यावरण के हक में डटा सिपाही है, हम अपने ही रक्षकों की अकारण बलि कैसे दे सकते हैं

पेड़ लगाओ-पेड़ लगाओ आओ भैया पेड़ लगाओ सब मिलजुलकर पेड़ लगाओ गड्ढा खोदो पेड़ लगाओ   पेड़ बताओ क्या देता है पंथी को छाया देता है सबको साफ हवा देता है चिड़ियों को वह घर देता है. तकरीबन 29-30 साल पहले की बात है, जब मैंने यह कविता लिखी थी. अपने स्कूल के एक प्ले के लिए, जिसका नाम था पेड़वा कटाइल हो रामा. इस प्ले का प्रदर्शन बाद में रांची के बिरसा स्टेडियम में भी हुआ था, जिसे तीसरा पुरस्कार मिला था. आज याद करता हूं तो लगता है…

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न मेढकों की शादी से बारिश होगी, न विभाग का नाम बदलने से

  इन दिनों जब मध्य प्रदेश में मंत्री महोदय मेढ़कों की शादी करवा रहे हैं, ताकि बारिश जल्द हो, बिहार की राजधानी पटना में पूर्वी राज्यों के प्रतिनिधि ग्लोबल वार्मिंग और मौसम पर पड़ने वाले इसके कुप्रभाव की चर्चा करने और इसका समाधान तलाशने के लिए जुटे हैं. यह सरकारों के एप्रोच का फर्क है. एक सरकार का नुमाइंदा अपने आवाम को पुरातनपंथी सोच की तरफ ले जाने की कोशिश में है, तो दूसरी सरकार का मुख्यमंत्री कह रहा है, बिहार में लगातार बारिश कम हो रही है. हम पर्यावरण…

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ताऊ देवीलाल: भारतीय सियासत का अद्भुत चेहरा

जयन्त जिज्ञासु दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री (77-79 & 87-89) और दो बार भारत के उपप्रधानमंत्री (वीपी सिंह और चंद्रशेखर के कार्यकाल में, 89-91) रहे देश के बड़े किसान नेता ताऊ देवीलाल जी (25 सितंबर 1915 – 6 अप्रैल 2001) की आज 17वीं पुण्यतिथि है। आपकी तुनकमिजाजी के बावजूद बिहार आपका सदा ऋणी रहेगा कि आपने 90 के दशक में बिहार को एक ऐसा मुख्यमंत्री दिया जिन्होंने वंचितों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए पांच विश्वविद्यालय खोला। आप शरद जी को बहुत मानते थे और पहली बार केंद्र में…

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आंबेडकर की काट भर नहीं थे जगजीवन राम

पुष्यमित्र इमरजेंसी का आखिरी दौर था. चुनाव की घोषणा हो चुकी थी. दिल्ली के मशहूर रामलीला मैदान में बाबू जगजीवन राम की सभा होने वाली थी. जबरदस्त भीड़ होने की उम्मीद थी. इस सभा को असफल करने के लिए इंदिरा सरकार ने दूरदर्शन पर राजकपूर की मशहूर फिल्म बॉबी दिखाये जाने की घोषणा कर दी, उसी वक्त यह फिल्म दिखायी जानी थी, जब जगजीवन राम की सभा थी. उनदिनों दिल्ली में टीवी का नया-नया क्रेज था और टीवी पर ऐसी फिल्म को कोई मिस नहीं करना चाहता था. यह सरकार…

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प्रेम को मजबूती और मुक्ति का मार्ग बनाते हुए पीढ़ियों से स्त्री के मन में दबी इच्छा—आकांक्षा को स्वर देनेवाला पुरबियाउस्ताद

16 मार्च को महेंदर मिसिर की जयंती पर विशेष चंदन तिवारी आज महेंदर मिसिर की जयंती है. पुरबी इलाके के अदभुत और अपने तरीके के अनोखे रचनाकार थे वे. महेंदर मिसिर के एकाध गीतों को करीब दस—बारह सालों से छिटपुट गाती रही थी, बाद में जब पुरबियातान सीरिज की शुरुआत की तो उनके ही गीतों से की. अब तक करीब 16 अलग—अलग गीत गायी. जैसे—जैसे एक—एक कर उनके गीत गाती रही, उनके गीतों की दुनिया से गुजरती रही, उनके गीतों में और उनके व्यक्तित्व में और रुचि बढ़ती गयी. रामनाथ…

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मुंबई में भी एक बिहारी किसान जिंदा था नरेंद्र झा के भीतर

आज सवेरे नरेंद्र झा के नहीं रहने की खबर आयी. फिर तफ्तीश शुरू हुई तो पता चला कि शानदार व्यक्तित्व वाला यह फिल्म अभिनेता 55 साल का था और दो बार पहले भी दिल के दौरे झेल चुका था. तीसरा दौरा झेल नहीं पाया. कल ही नरेंद्र झा ने एक रिवरवॉक की तसवीर पोस्ट की थी. मुंबई में वार्सोवा में उनका एक फार्म हाउस भी है, संभवतः कल वहीं थे, वहीं उनकी मौत हुई. पिछले दिनों वे जब पटना आये थे तो प्रभात खबर के दफ्तर भी आये थे, वहीं…

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इस कोकिला की कूक अब भी बिहार के लोकमानस में गहराई से रची-बसी है

पांच मार्च को पद्मश्री विंध्यवासिनी देवी की जयंती पर पढिये यह विशेष आलेख निराला बिदेसिया सप्ताह दिन पहले हार्डडिस्क गुम हो गया है. इस तनाव से दो दिनों तक गुजरने के बाद अब सामान्य होने में लगा हुआ था कि आज सुबह से ही एकदम से मन उसमें अटक-सा गया है. उस हार्डडिस्क में विंध्यवासिनी देवी से 12 साल पहले 18 फरवरी 2006 को हुई दो घंटे की बातचीत का आडियो था. मन उस दिन की ही मुलाकात में अटका हुआ है. वहीं फंसा हुआ है. उस दोपहरी अपने भाई…

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क्या मानव तस्करी से निबटने में सक्षम होगा यह नया बिल

बिहार कवरेज होली से ठीक पहले भारत सरकार की कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण बिल को संसद में पेश करने के लिये स्वीकृति दी है. यह बिल मानव तस्करी से संबंधित है. Trafficking of person (prevention, protection and rehabilitation) bill, 2018 नामक यह बिल इसलिये महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके जरिये पहली दफा मानव तस्करी के सभी पहलुओं को समेटते हुए इसके समयबद्ध जांच, सुनवाई और पुनर्वास की बात की गई है. बिहार में बाल अधिकारों के लिये कार्य करने वाले सुरेश प्रधान ने इस बिल को लेकर खुशी जाहिर की है.…

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आजाद भारत में सबसे लंबे समय तक चले दंगे की कहानी

निराला   बीते 24 अक्तूबर को भागलपुर में अजीब किस्म का माहौल था. शहर की चहल-पहल वैसी ही थी. नयी पीढ़ी उसी तरह भागदौड़ में व्यस्त. भागलपुर से ही सटे नाथनगर और चंपानगर में हैंडलूम और पावरलूम के करघे भी उसी तरह हर रोज की तरह अहलेसुबह से ही खट-खट कर शुरू हो गये थे. मंदिरों की घंटियां भी सुबह से बज रही थी, मस्जिदों में अजान भी हुआ. लेकिन बड़ी आबादी वाले शहर के कुछ कोने ऐसे थे, जहां एक अजीब किस्म की उदासी का माहौल था. कुछ नये…

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!!हमें भी है एक अदद टोकियो हसेगावा की तलाश!!

इन दिनों बिहार के सीएम नीतीश कुमार जापान में हैं और उन्होंने वहां निगाटा प्रांत में मिथिला संग्रहालय की यात्रा भी की है, जहां बिहार की मिथिला पेंटिंग्स के अनमोल खजाने को वहां के संगीतकार टोकियो हसेगावा ने काफी जतन से प्रदर्शित किया है. यह अफसोस की बात है कि मिथिला पेंटिंग की जन्मभूमि बिहार में ऐसा कोई संग्रहालय नहीं है और यह हमसे हजार किमी दूर है, जिसे एक परदेसी ने संभाल कर रखा है. उस परदेसी कला संरक्षक की कहानी बता रहे हैं क्राफ्टवाला इस आलेख में… क्राफ्टवाला…

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