गांव के स्कूलों-अस्पतालों और दफ्तरों में क्यों न लगे सीसीटीवी और बायोमैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम?

P.M. आज अखबार में एक खबर दिखी. मोतिहारी के तुरकौलिया में एक प्रभारी प्रधानाध्यापक ने अपने पैसे से अपने स्कूल में सीसीटीवी कैमरा और बायोमैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लगवा लिया है. उनका मकसद है कि स्कूल में शिक्षक और छात्र समय से पहुंचें और पूरे समय रहें, गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई हो. इसका नतीजा भी सामने आने लगा है. शिक्षकों की लेटलतीफी में कमी आयी है. छात्र-छात्राओं की उपस्थिति में भी बढ़ोतरी हुई है. बिहार में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति बड़ा मसला है. इनरॉलमेंट की तुलना में आधे छात्र ही स्कूल में उपस्थित होते…

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तो क्या मोदी अविजेय हैं?

व्यालोक पाठक एक शब्द में इसका एक जवाब हो सकता है – नहीं. आखिर, हमारे पास दिल्ली और बिहार के नतीजे हैं दिखाने को. बिहार में तो चलिए डेढ़ साल बाद ही सही, पर अपने पुराने साथी नीतीश कुमार के साथ मिलकर भाजपा ने सरकार में साझीदारी तो कर ली है. दिल्ली का नासूर तो रह-रहकर प्रधानमंत्री के कलेजे में भी टीस देता ही होगा. यह बात भी दीगर है कि मई 2014 से अब तक जितने भी विधानसभा चुनाव हुए हैं, उनको टीवी चैनलों और आरामकुर्सी पर पसरे विशेषज्ञों…

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गुजरात के फैसले से पहले पढ़िये कथा ‘चिमन-चोर’ सिंड्रोम की

P.M. आज गुजरात का फैसला आने वाला है. फैसला कुछ भी हो सकता है. मोदी की लाज भी बचा सकता है, राहुल का पहला ब्रेक भी दिला सकता है. मगर इससे हम बिहारियों का क्या लेना-देना. हमें गुजरात क्या देश के किसी कोने में होने वाले चुनाव से कोई फर्क नहीं पड़ता. और तो और अपने बिहार में होने वाले नतीजे को भी हम पलट डालते हैं. हारने वालों को राज-पाट दिला देते हैं. खैर, जीत-हार राजनीति के किस्से हैं. इन्हीं किस्सों में एक बड़ा दिलचस्प किस्सा है, मुख्यमंत्री चिमन…

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