कनाडा सरकार का एडवाइजर बन गया है चारा घोटाला की खबर दुनिया को बताने वाला पत्रकार

बिहार कवरेज

आज चारा घोटाले के एक और मामले में अदालत का फैसला आने वाला है, इस फैसले में बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव और जगन्नाथ मिश्र को सजा सुनायी जा सकती है. इससे पहले भी एक मामले में (चाइबासा ट्रेजरी) लालू और जगन्नाथ को सजा सुनायी जा चुकी है, दोनों जमानत पर रिहा हैं. आज भी देवघर ट्रेजरी का मामला लगभग वैसा ही है, भले ही इसमें घोटाले की राशि कम है. इसलिए सजा भी उसी पैटर्न पर सुनायी जा सकती है. वैसे उसी पैटर्न पर इन दोनों के वकीलों ने एंटीसिपेटरी बेल के लिए भी आवेदन कर रखा है, मतलब यह कि अगर चाईबासा मामले में दोनों को जमानत मिल सकती है, तो इस मामले में भी क्यों नहीं. अब क्या होगा, यह भविष्य के गर्भ में है. मगर क्या आप जानते हैं कि इस खबर को दुनिया के सामने लाने वाला पत्रकार इन दिनों क्या कर रहा है.

वैसे तो इस बात को लेकर काफी विवाद है कि चारा घोटाले की खबर किसने ब्रेक की. यह सच है कि प्रभात खबर अखबार में काफी पहले से 1996 से भी पहले से चारा घोटाले की खबर छपती रही है और रांची के तत्कालीन संवाददाता मधुकर इस बारे में लिखते रहे हैं. बाद में एक अन्य संवाददाता किसलय ने लगातार एक महीने तक इस मसले को लेकर खबरें लिखीं, जिसे झारखंड के मौजूद मंत्री सरयू राय ने उन्हें ब्रीफ किया था. चाईबासा के तत्कालीन कलेक्टर अमित खरे ने भी खुद आगे बढ़कर इस मामले को उजागर किया था. खुद लालूजी ने शुरुआत में जांच के आदेश भी जारी किये थे.

मगर यह घोटाला कितना बड़ा है और इस घोटाले में कैसे वर्तमान मुख्यमंत्री लालू यादव और पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र भी शामिल हैं, यह सबसे पहले उस वक्त एशियन एज कोलकाता के संवाददाता रवि एस झा ने ब्रेक किया था. इसलिए हर जगह चारा घोटाला की खबर को दुनिया के सामने लाने वाले पत्रकार के रूप में उनका ही नाम लिया जाता है. रवि झा को इसके पुरुलिया आर्म्स ड्रापिंग केस की खबर ब्रेक करने का भी श्रेय दिया जाता है. मगर आज जब उनके द्वारा ब्रेक किये गये चारा घोटाले को लेकर महत्वपूर्ण फैसला आने वाला है, वे इन खबर से दूर कनाडा सरकार की एडमिनिस्ट्रेटिव और पब्लिक पॉलिसी को लेकर व्यस्त हैं. उनके सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर न ट्विटर हैंडल में और न ही लिंक्डइन में इन खबरों का कोई जिक्र है.

रवि झा जैसा नाम से ही जाहिर है बिहार के रहने वाले हैं. मगर बिहार में उनका घर कहां है, यह हमें नहीं मालूम. उनका लिंक्डइन प्रोफाइल बताता है कि उन्होंने पहले बीआर अंबेडकर विवि से पढ़ाई की, फिर एक्सएलआरआई जमशेदपुर से स्ट्रेटेजिक कम्युनिकेशन में डिग्री ली. पत्रकारिता की शुरुआत 1991 टाइम्स ऑफ इंडिया, पटना में ट्रेनी के रूप में की. वहां 1994 तक रहे फिर स्पेशल कॉरस्पोंडेंट के रूप में एशियन एज कोलकाता से जुड़ गये. जहां उन्होंने अपने कैरियर की दो प्रमुख खबरें चारा घोटाला और पुरुलिया आर्म्स ड्राप केस की खबरें ब्रेक की. फिर टीओआई के लिए गुजरात चले गये. फिर दो साल इंडिया टुडे मैगजीन में असिस्टेंट एडिटर के रूप में काम किया. इसके बाद एक लंबी पारी यूएई के खलीज टाइम्स के चीफ कोरस्पोंडेंट के रूप में किया और

2013 में सांसद राजीव चंद्रशेखर के साथ जुड़ गये और पब्लिक पॉलिसी, गवर्नेंस और पोलिटिकल अफेयर के मामले में अपनी सेवाएं देने लगे.
फिलहाल उन्होंने इसी काम को अपना कैरियर बना लिया है. और कनाडा सरकार के साथ जुड़कर सरकार और उनकी पार्टी को अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कनाडा के ओंटेरियो राज्य में वे पॉलिसी मेकर के रूप में सरकार के साथ काम कर रहे हैं तो सत्ताधारी दल लिबरल पार्टी के साथ पोलिटिकल स्ट्रेटेजिस्ट के रूप में जुड़े हैं. इसके अलावा ने कनाडिया जर्नलिस्ट फॉर फ्री एक्प्रेशन मॉनिटर और रिपोर्टर सेन फ्रंटियर्स जैसी संस्थाओं के साथ भी जुड़े हुए हैं. दिलचस्प है कि रवि को बराक ओबामा जैसी शख्सियत भी ट्विटर पर फोलो करती है.

रवि अब न सिर्फ बिहार बल्कि देसी मीडिया के ताने-बाने से भी बाहर निकल गये हैं. मगर आज भी उऩकी पहचान चारा घोटाला और पुरुलिया कांड की खबरों से ही हैं. लिंक्डइन में उन्हें इंडोर्स करने वाले खास तौर पर इस बात का जिक्र करते हैं.

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