रामविलास की गोद में भी कुपोषित ही रह गया अकबर मलाही का छड़ी उद्योग

संजीत भारती

केन्दीय मंत्री रामविलास पासवान ने जब अपने लोकसभा क्षेत्र हाजीपुर के सराय के अकबर मलाही गांव को गोद लेने की घोषणा की थी, तब इलाके के लोगो में खुशी की लहर दौड़ गयी थी. लोगों को उम्मीद थी कि अपने ठोस विजन से वे गांव में विकास की इबारत लिखेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. पांच साल बीत गए, पर विकास कार्य अब तक ठप पड़े हैं. गोद लेने के बावजूद गांव की दम तोड़ती छड़ी उद्योग, जर्जर सडकें, गंदगी, नहीं बने अस्पताल, शुद्ध पेयजल की समस्या, रोजगार की समस्या यही आर्दश ग्राम अकबर मलाही की पहचान है.

कहते हैं, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान को 2014 के लोकसभा चुनाव में सर्वाधिक वोट इसी इलाके से मिले थे और अकबर मलाही गांव में उनकी पासवान जाति की आबादी सर्वाधिक हैं, यही कारण है कि उन्होंने इस गाव को गोद लिया था. मगर जिन-जिन योजनाओं को धरातल पर लाने के वादे उन्होंने किये थे, उनमें से सिर्फ चंद छोटी योजनाएं ही पूरी हुई, बड़ी योजनाएं अभी साकार नहीं हो पायी हैं.

अकबर मलाही गांव संभवत: बिहार का इकलौता गांव हैं, जहां ग्रामीण उद्योग के तौर पर लोग छड़ी बनाते हैं. यहां की बनी हुई छड़ी देश के कई इलाको में जाती है, मगर संसाधन के अभाव में यह उद्योग दम तोड़ रहा है. लोग काम को आगे नही बढ़ा पा रहे हैं. छड़ी उद्योग चलाने वाले अजय शर्मा का कहना हैं कि गांव के लगभग 20 घ

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