सड़क पर तड़पता रहा जख्मी, कैमरे में उतरती रही पीड़ा

कुमार आशीष सहरसा के जाने-माने पत्रकार हैं, प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं

कुमार आशीष

विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका के बाद गाहे-बगाहे चौथे स्तंभ मीडिया को लेकर उठने वाली आवाज अब मुखर होने लगी है. शनिवार की शाम शहर के कचहरी ढ़ाला पर बाइक से गिर गये सेवानिवृत इंजीनियर नरेश प्रसाद सिंह की दर्दनाक मौत के किस्से सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे है. जिसमें बताया गया है कि एक दैनिक अखबार के अप्रशिक्षित छायाकार व पत्रकार ने खबर बनाने की होड़ में जख्मी को अस्पताल पहुंचाने की वजाय सड़क पर उसकी तस्वीर उतारते रहे. जबकि स्थानीय राहगीर जख्मी को अस्पताल पहुंचाने की मशक्कत में लगे हुए थे. लेकिन जख्मी इंजीनियर के एक से बढ़कर एक पीड़ादायक तस्वीर व जानकारी लेने की उत्सुकता में उक्त कथित मीडियाकर्मियों ने घंटों जख्मी को सड़क किनारे से उठने नहीं दिया. जिसके बाद स्थानीय लोगों ने जबरन जख्मी को सदर अस्पताल पहुंचाया जहां उसकी मौत हो गयी. डॉक्टरों ने बताया कि सड़क किनारे ज्यादा देर तक गिरे होने की वजह से ठंड लग गयी. जो उनके मौत की वजह बन गयी. जबकि परिजन स्व सिंह के बाजार से वापस लौटने का इंतजार कर रहे थे.

लोगों में फैला है आक्रोश

सोशल मीडिया पर घटना के बाबत लोग तरह-तरह की प्रतिक्रिया दे रहे है. लोगों का कहना है कि जख्मी को अस्पताल पहुंचाने के बाद भी खबर बनायी जा सकती थी. लेकिन खबर को सनसनी बनाने के चक्कर में वृद्ध की जान ले ली गयी. सोशल मीडिया के चर्चित प्लेटफार्म व्हाट्सएप के जरिये यह मैसेज लाखों लोगों के मोबाइल तक पहुंच गयी है. स्थानीय लोग संबंधित मीडिया हाउस पर कार्रवाई करने की मांग कर रहे है.

निभाना चाहिए इंसानियत का फर्ज

शनिवार की शाम सड़क हादसें के बाद सड़क पर ही जख्मी इंजीनियर के साथ हुए मीडिया ट्रिटमेंट की सभी लोग निंदा कर रहे है. अधिवक्ता अनिल कुमार कहते है कि पत्रकार को पहले इंसानियत का फर्ज निभाते जख्मी को अस्पताल पहुंचाना चाहिए. ससमय अस्पताल पहुंचाने पर जख्मी की जान भी बच सकती थी. शिक्षक भरत कुमार कहते है कि इस प्रकार के कृत्य करने वाले लोगों पर परिजन को प्राथमिकी दर्ज करानी चाहिए.

कई बार मिसाल कायम कर चुके है पत्रकार

स्थानीय स्तर पर पत्रकारों के द्वारा पूर्व में कई बार मानवता के लिए कार्य किये गये है. ज्ञात हो कि कुसहा त्रासदी के दौरान बाढ़ पीड़ितों को बचाने व राहत मुहैया कराने में स्थानीय मीडिया कर्मी की प्रशंसा देश भर से पहुंचे स्वयंसेवी संगठनों ने भी की थी. इसके अलावा महपुरा से लौट रहे दर्जनों श्रद्धालु के सड़क हादसे में मीडियाकर्मियों ने खबर की फिक्र छोड़ अस्पताल में उनके परिजनों की अनुपस्थिति में बेहतर भूमिका निभायी थी. इसके अलावा कई ऐसे मौके आये जब चौथे स्तंभ ने सामाजिक जिम्मेदारी को निभाते मिसाल कायम की है. इधर एक्सक्लुसिव खबरों के प्रचलन में घटी घटना पर पत्रकारों ने भी गहरी आपत्ति जतायी है.

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