नौ साल पहले खुदे थे गड्ढे, आज बन रहे शौचालय, पब्लिक ऐसे ही रोड़ेबाजी नहीं करती

कल बक्सर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफिले पर पत्थरबाजी हो गयी, कई लोग घायल हुए. आनन-फानन में सरकारी अमले ने इसे विरोधियों की साजिश बता दिया और जांच के आदेश जारी कर दिये. मगर क्या सरकार गंभीरता से सोचती है कि क्यों मुख्यमंत्री के काफिले पर ईंट फेंका गया? यह विरोधियों की साजिश कतई नहीं है. सरकारी अधिकारियों की खुराफात का नतीजा है. मुख्यमंत्री अपनी यात्रा के दौरान जिस-जिस गांव में जाने वाले होते हैं, जिले के सभी अधिकारी मिलकर उस गांव को टेंपरेरी स्वर्ग बनाने में जुट जाते हैं. पड़ोस के गांव के लोग यह सब होता देखकर जलते हैं और वही लोग अपना गुस्सा सीएम के काफिले पर निकाल रहे हैं. इस पूरे मसले को समझने के लिए इस रिपोर्ट को पढिये कि कैसे पूर्णिया के बेगमपुर में सरकारी अमला उसे स्वर्ग बनाने के लिए जुटा है और पड़ोस के गांव के लोग तनाव में हैं. साथ ही यह दिलचस्प सूचना भी कि नौ साल पहले जब सीएम इस गांव आये थे तो शौचालय का गड्ढा खोदा गया था, आज जब वे दुबारा आने वाले हैं तो उन गड्ढों पर शौचालय बनाया जा रहा है….

बासुमित्र

बासुमित्र, संवेदनशील औऱ लोकोपयोगी विषयों पर खोजी नजर रखने वाले पत्रकार हैं और फिलहाल दैनिक भास्कर से जुड़े हैं

हांसी बेगमपुर में इन दिनों जश्न जैसा माहौल है. 17 जनवरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नौ साल बाद फिर हांसी बेगमपुर गांव पहुँच रहे हैं. मुख्यमंत्री दो घंटे गांव में रह कर भ्रमण करने के बाद आम सभा को संबोधित करेंगे. पूरा जिला प्रशासन बेगमपुर के बाहरी सड़कों को ब्रिटेन की गलियों के जैसे बनाने में जुटा हुआ है. पंचायत के दो वार्ड 6 और 7 में पूरा विकास सिमट गया है. गांव की सीमा से 500 मीटर दूर हैलीपैड का निर्माण काफी तेज गति से चल रहा है. जिला प्रशासन का पूरा अमला लगातर बेगमपुर में कैंप कर रहा है.

जिलाधीकारी खुद लगातार एक-एक काम पर नजर रखे हुए हैं. एक महीने से लगातार जुट कर जीविका कर्मियों ने इन दो वार्डों के अलावा अन्य दूसरे वार्डों में 300 के आसपास शौचालय का निर्माण करया है. वहीं ग्रामीण विकास विभाग मुख्यमंत्री के सात निश्चय योजना में शामिल हर गली पक्की नाली और सड़क निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं.

जिला प्रशासन अपनी तरफ से कोई कसर नहीं रखना चाह रहा है. जलालगढ़ से बेगमपुर के 5 किलोमीटर के रास्ते में पड़ने वाले सभी आंगनवाड़ी केंद्र जो वर्षों से प्रशासनिक उपेक्षा के शिकार थे, उनको जोर-शोर से तैयार किया जा रहा है.

जहां एक तरफ प्रशासनिक अमला बेगमपुर को ब्रिटेन बनने में जुटा है, वहीं गांव की सोमिया देवी तंज कसने के लहजे में बताती है कि नौ साल पहले की घोषणा अब पूरी ही रही है. नौ साल पहले ऐसा ही माहौल था. देख रहे हैं न बारिश के समय में हमलोग चल नहीं पाते थे. गांव के मुखिया को भी कई बार बोल चुके थे. कोई नहीं सुनता था. पक्की नाली बन गई है. ढकने का कोई व्यवस्था नहीं है, रात के समय में बच्चे-बूढ़े सब गिर सकते हैं. साहब लोगों को बोले हैं कि नाली ढकवा दीजिये.

इन दो शौचालयों को देखिये, पुराना वाला 2009 का शौचालय है, जब नीतीश पहली दफा यहां आये थे, दूसरा इस यात्रा का शौचालय है. ये दोनों बिहार सरकार के विकास के स्मारक हैं.

सोमिया देवी की बात खत्म नहीं होती है कि पास में खड़े पंचू ऋषि शुरू हो जाते हैं. पंचू नौ साल के विकास की कहानी सुनाते हुए कहते हैं, नौ साल पहले जब मुख्यमंत्री आये थे तो यहां शौचालय का गड्ढा खोदा गया था. नौ साल तक गड्ढे यूं ही पड़े रहे. अब फिर नीतीश जी के आने की खबर आय़ी तो शौचालय का निर्माण होने लगा है.

गांव में कुछ दूर आगे वाली गली में आंगनवाड़ी केंद्र को चमकाने का काम चल रहा है. दीवार पर दहेज प्रथा से लेकर स्वच्छता के स्लोगन लिखे जा रहे हैं. गांव के पुराने शौचालय के बगल में नए शौचालय का निर्माण किया गया है. गांव की एक महिला बताती है कि एक महीना पहले इस शौचालय का निर्माण हुआ है. पुराना वाला देख रहे हैं न यह नौ पहले मुख्यमंत्री के आने सर पहले अनान-फानन में बना था. पैन भी नहीं लगा था. तभी इसे कपड़ा से घेर दिया गया था. उस समय कहा गया था कि जल्द ही निर्माण किया जायेगा.

मुख्यमंत्री के जाने के बाद कोई खोज खबर लेने नहीं आया. मकान भी टूट कर गिरने लगा. बगल में ही नया शौचालय बना दिया गया है. गावं में जिधर देखिए उधर आपको हरका शौचालय दिख जायेगा. 14 वार्ड वाले इस पंचायत के दूसरे वार्ड के लोग जल रहे हैं. उन्हें लगता है कि मुख्यमंत्री के कदम पड़ने से इन वार्डों का विकास तो हो गया. एक बार यह तामझाम खत्म ही गया तो, फिर कोई अधिकारी गांव झांकने तक नहीं आएगा. चबूतरा पर बैठे एक बुजुर्ग बताते हैं कि भले दिखावा ही सही कुछ काम तो हो रहा है. आने वाले समय का तो भगवान ही जाने.

जिला के बड़े अधिकारी तो दूर प्रखंड वाले साहब भी गांव झांकने नहीं आएंगे. जो लोग अभी हाथ जोड़ कर शौचालय बनाने के लिए निहोरा कर रहे हैं, उन्हीं के लोग बिना पैसा लिए कोई बात नहीं सुनेंगे.

बेगमपुर में तैयार होती नालियां

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