73% किशोर मोबाइल यूज करते हैं, मगर 58% अपने राज्य का नक्शा भी नहीं पहचानते

P.M.

सूचना क्रांति का स्मार्ट युग माने जाने वाले इस जमाने की यह विडंबना है. लोग स्मार्ट फोन के जरिये सूचनाओं से एक क्लिक की दूरी पर तो हैं मगर यह नजदीकी भी उन्हें जागरुक और सूचना संपन्न नहीं बना रही है. बाजार उन्हें दूसरी गैर-जरूरी चीजों में इतना उलझा देता है कि उसे वही सूचना मिलती है, जो राजनीतिक दल, कंपनियां या दूसरे कारोबारी उपलब्ध कराना चाहते हैं. लोग उन सूचनाओं से वंचित ही रहते हैं, जो उनके दैनिक जीवन के लिए आवश्यक हैं.

यह विडंबना असर के ताजा रिपोर्ट में उभर कर सामने आयी है. यह रिपोर्ट बताती है कि आज भले ही देश के 73 फीसदी किशोरों के हाथ में मोबाइल पहुंच गया है, मगर वे अपने देश की राजधानी का नाम नहीं जानते, राज्य का नक्शा नहीं पहचानते, राज्य का नाम नहीं जानते.

असर की यह रिपोर्ट कल आयी है. इस रिपोर्ट की खासियत यह है कि पहली बार इसमें फोकस किशोरों पर है. 14-18 साल की उम्र के बच्चों पर. ये वो बच्चे हैं, जिन्हें आठवीं से बारहवीं कक्षा के बीच पढ़ना चाहिए था. इस रिपोर्ट ने हमेशा की तरह देश की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में कमी को उजागर किया है. हमारी सरकारें तरह-तरह की योजनाओं के जरिये बच्चों को स्कूल में तो इनरॉल करवा दे रही है. मगर स्कूलों में क्या पढ़ाया जाता है, इस पर कोई गंभीरता से नहीं सोचता.

इस रिपोर्ट के मुताबिक 14-18 आयु वर्ग के
1. 25 फीसदी किशोर अपनी भाषा में एक सरल पाठ को धाराप्रवाह नहीं पढ़ पाते.
2. आधे से अधिक किशोर भाग का सवाल हल नहीं कर पाते.
3. 40 फीसदी किशोर अंगरेजी नहीं पढ़ पाते.
4. 24 फीसदी किशोर नोट गिनने में गलती करते हैं.
5. 40 फीसदी किशोर घड़ी देखकर सही समय नहीं बता पाते.
6. 14 फीसदी किशोर देश का नक्शा नहीं पहचानते.
7. 36 फीसदी देश की राजधानी का नाम नहीं जानते.
8. 21 फीसदी अपने राज्य का नाम नहीं जानते.
9. 58 फीसदी अपने राज्य का नक्शा नहीं पहचानते.

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