जो आज Shocked हैं, वे येदुरप्पा के टाइम में किसका कांख सूंघने में बिजी थे? #2Gverdict

फैशन ब्लागर धैर्यकांत की यह तीखी टिप्पणी आप अपने रिस्क पर पढ़ें…

धैर्यकांत

येदुरप्पा को भी पिछले साल सीबीआई की अदालत ने आरोपों से बरी कर दिया था, तब अभी के विश्लेषक जो कोर्ट के निर्णय का आउट ऑफ़ द बॉक्स जाके भी विश्लेषण कर रहे है, वो उस वक़्त अपने कांख का बाल सूंघने में लगे हुए थे, तब न तो कोई शॉक हुआ और न किसी मीडिया चैनल ने #ShockedVerdict चलाया.

विश्लेषक कह रहे है कि अब ED इस निर्णय के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करेगी लेकिन इनकी घृणात्मक विश्लेषण क्षमता कभी ये साहस नहीं दिखाती ताकि ये पूछ सके कि येदुरप्पा के मामले में CBI ने आगे अपील क्यों नहीं की गयी? ये पत्रकार जो अभी से डिरियाना शुरू कर चुके है वो ये सवाल पूछेंगे भाजपा के प्रवक्ताओं से?

अगर इस मामले में अपील हो रही है तो येदुरप्पा के मामले में क्यों नहीं हुई? क्या ये बात सही नहीं है कि डाइरेक्टोरेट ऑफ़ प्रॉसिक्यूशन, जो कि लॉ मिनिस्ट्री के अधीन आती है उसने सीबीआई को आगे अपील करने से मना कर दिया था? ये क्या बकचोदी हुई? येदुरप्पा के भ्रष्टाचार में कौन से फ्लेवर का कंडोम लगा हुआ जिसको चूसने से सरकार का स्वाद ख़राब हो रहा है?

सत्य और भ्रष्टाचार सिर्फ डिरियाने से कुछ नहीं हो जाता, सिर्फ विरोधियों के खिलाफ ही कार्रवाई करनी है तो कांग्रेस भी एक बेहतर विकल्प है इस मामले में. कल को राजा और कनिमोझी आ जाये भाजपा में तो ये अपील का नाटक भी ध्वस्त हो जायेगा और कपिल सिब्बल के जीरो लॉस वाली थ्योरी भी एक्सेप्ट कर ली जाएगी. जॉन साहब का एक शेर नज़र करूँगा ऐसे पार्टी और उसमे गए दलबदलू के लिए

“कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे
जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे “

हैव अ गुड डे ब्रो

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