सीआरपीएफ जवान जो संसद से बस्तर तक हर जगह लड़ता-मरता है, मगर न तो फौजी है, न शहीद

आपको यह जानकर हैरत होगी कि पुलवामा में मारे गए 42 सीआरपीएफ जवान सरकारी नियम के मुताबिक शहीद नहीं हैं। वे सेना के अंग भी नहीं हैं। वे बस खास किस्म के पुलिस बल हैं और उनका नियंत्रण रक्षा मंत्रालय नहीं, गृह मंत्रालय के अधीन है। इसके बावजूद आपके बस्तर में माओवादी हमले में और कश्मीर के आतंकी हमले में सबसे ज्यादा यही लोग मरते नजर आयेंगे। कल 42 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए, इससे पहले इससे भी बड़ा हमला 2010 में दंतेवाड़ा में हुआ था वहां भी सीआरपीएफ के 76 जवान…

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