जल संपन्न उत्तर बिहार का सूखा- देर तो हो ही गयी अब तो दुरुस्त हो जाइये

पुष्यमित्र मीठे जल वाली एशिया की सबसे बड़ी गोखुर झील कांवर इन दिनों पूरी तरह सूख चुकी है. मगर यह राष्ट्रीय क्या, स्थानीय मीडिया के लिए भी कोई खबर नहीं है. खबर तो यह भी नहीं है कि पग-पग पोखर वाले मिथिलांचल के इलाके में वाटर लेवल इतना गिर गया है कि लोग गांव-गांव में 320 फीट की डीप बोरिंग करवाने पर मजबूर हैं. कभी इस इलाके में 30-40 फीट पर ही पानी मिल जाता था. खबर यह भी नहीं है कि लोग ब्रह्ममुहूर्त में ही गैलन लेकर पानी की…

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रामविलास की गोद में भी कुपोषित ही रह गया अकबर मलाही का छड़ी उद्योग

संजीत भारती केन्दीय मंत्री रामविलास पासवान ने जब अपने लोकसभा क्षेत्र हाजीपुर के सराय के अकबर मलाही गांव को गोद लेने की घोषणा की थी, तब इलाके के लोगो में खुशी की लहर दौड़ गयी थी. लोगों को उम्मीद थी कि अपने ठोस विजन से वे गांव में विकास की इबारत लिखेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. पांच साल बीत गए, पर विकास कार्य अब तक ठप पड़े हैं. गोद लेने के बावजूद गांव की दम तोड़ती छड़ी उद्योग, जर्जर सडकें, गंदगी, नहीं बने अस्पताल, शुद्ध पेयजल की समस्या, रोजगार की…

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सड़कों पर सन्नाटा है, उदासीन वोटर बीरबल की खिचड़ी पका रहे हैं

पुष्यमित्र एक मित्र ने फोन करके पूछा, कल पहले चरण का प्रचार खत्म हो जायेगा. अब बताइये क्या माहौल है? जवाब में अनायास मेरे मुंह से निकल गया, प्रचार अभियान शुरू कब हुआ, और माहौल कहीं दिख कहां रहा है? जवाब में उन्होंने सहमति जताई और कहा कि ट्रैजेडी यह है कि कई इलाकों में लोगों को अब तक मालूम नहीं है कि कैंडिडेट कौन है? पिछले एक माह से अधिक वक्त से बिहार के अलग-अलग इलाकों में घूम रहा हूं. लगभग आधा बिहार घूम लिया है. इस दौरान एक…

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रोजगार, सिंचाई और बेहतर इलाज, क्या सचमुच यही बिहार के वोटरों की चुनावी प्राथमिकताएं हैं?

एडीआर का सर्वे चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता पर पैनी नजर रखने वाली संस्था एसोसियेशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म(एडीआर) ने आज एक रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के वोटरों के लिए तीन प्रमुख मुद्दे रोजगार, सिंचाई और बेहतर इलाज हैं. एडीआर की यह रिपोर्ट बिहार के सभी 40 लोकसभा सीटों के 20 हजार वोटरों के बीच कराये गये सर्वेक्षण पर आधारित है. इसके मुताबिक 49.95 फीसदी वोटरों ने रोजगार के बेहतर अवसर को अपनी पहली प्राथमिकता बताया, 41.43 फीसदी मतदाताओं ने खेती के लिए जल की उपलब्धता को…

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वुलर झील में एक छोटा सा स्कूल और कश्मीर के सवालों का ‘नोटबुक’

पु्ष्यमित्र चिनार के पत्ते जब नोटबुक में पड़े मिलते हैं तो मीठी यादें जगाते हैं, अगर उनका सूखा ढेर बिखरा हो तो वे सुलग भी उठते हैं और सबकुछ तबाह कर देते हैं। यही तो कहानी है आज के कश्मीर की। धरती का स्वर्ग माने जाने वाले कश्मीर में इन दिनों शोलों के भड़कने का मौसम है। मगर कल रिलीज हुई फ़िल्म ‘नोटबुक’ शबनम की तरह ठंडे हाथों से जख्मों को सहलाती हुई हमारे मन में मीठा प्रेम जगाती है। गुलज़ार की माचिस से लेकर, फ़िज़ा से होते हुए हैदर…

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इस डबल इंजन सरकार का क्या फायदा? केंद्र ने कई योजनाओं का आधा से अधिक आवंटन रोक लिया

2016 में राजद से अलग होकर जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में भाजपा के साथ सरकार बनायी थी तो उस वक़्त यह कहा गया था कि अब यहां भी डबल इंजन सरकार होगी। मतलब राज्य और केंद्र में एक ही गठबंधन की सरकार इससे विकास की गति तेज हो जायेगी। मगर नतीजे बताते हैं कि इस डबल इंजन सरकार से बिहार को कोई खास फायदा नहीं हुआ। इस बात को आज प्रभात खबर में छ्पी इस खबर से समझा जा सकता है। खबर के मुताबिक केंद्र द्वारा…

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क्या राजनीति की तसवीर बदलेंगी बिहार की ये महिलाएं?

पुष्यमित्र पिछले दिनों चुनावी यात्रा के दौरान जब मैं पूर्णिया जिले के धमदाहा अनुमंडल मुख्यालय में किरण देवी से मिल रहा था, तब तृणमूल कांग्रेस द्वारा लोकसभा चुनाव में 40 फीसदी महिलाओं को टिकट देने और कांग्रेस द्वारा जीत के बाद महिला आरक्षण को पारित कराने की खबर आयी थी. आज जब यह खबर लिख रहा हूं तो बिहार में दोनों गठबंधनों ने मिलकर 80 में से सिर्फ नौ महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा है. उनमें भी ज्यादातर सजायाफ्ता मुजरिमों की पत्नियां हैं. कहीं रेप के सजायाफ्ता राजवल्लभ की पत्नी…

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जानिये कौन जाति राजनीतिक रूप से मजबूत है बिहार में?

अब जबकि बिहार में दोनों प्रमुख गठबंधनों के उम्मीदवारों की सूची जारी हो गयी है, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार की कौन सी जाति राजनीतिक रूप से मजबूत है. हालांकि लोकतंत्र का सिद्धांत इस बात की खिलाफत करता है कि मतदाताओं को जात और धर्म से परे हटकर मतदान करना चाहिए. मगर जमीनी हकीकत यह है कि आज देश में ज्यादातर मतदान इसी आधार पर हो रहे हैं. इस लोकसभा चुनाव में तो बिहार में जाति ही सबसे बड़ा मुद्दा है. राजनीतिक दल न सिर्फ टिकट का…

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ट्रेन जैसी बोगियों में रहते बच्चे और असुरक्षित नौकरी के बीच पिसते शिक्षक, यही है बिहार के ‘नेतरहाट’ की कहानी

पुष्यमित्र जमुई गया तो सिमुलतला आवासीय विद्यालय को देखने के मोह से खुद को बचा नहीं सका. इन दिनों जब बिहार में मैट्रिक और इंटरमीडियेटड के रिजल्ट आते हैं तो टॉप टेन में ज्यादातर यहीं के बच्चे होते हैं. मैं देखना चाहता था कि आखिर वह कैसा विद्यालय है, जहां एक साथ इतने मेधावी बच्चे पढ़ते हैं. जमुई स्टेशन पर साढ़े तीन घंटे के इंतजार और ईएमयू ट्रेन पर सवार होकर करीब डेढ़ घंटे की यात्रा के बाद जब उस स्कूल तक पहुंचा तो पहली बात यही मन में आयी…

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क्या रंजीत रंजन की वजह से फंस गया है महागठबन्धन?

पुष्यमित्र चुनाव सर पर है। दूसरे चरण का भी नोमिनेशन चल रहा है। मगर महागठबंधन है कि फाइनल हो ही नहीं रहा है। आज सुबह से ऐसी चर्चा तेज है कि यह गठबन्धन टूट भी सकता है। आखिर इस टूट की वजह क्या? खबर मिली है कि यह सारा मामला सुपौल की निवर्तमान सांसद रंजीत रंजन की वजह से फंसा है। पप्पू यादव से बुरी तरह चिढ़ने वाले तेजस्वी चाहते हैं कि कांग्रेस वहां उम्मीदवार बदल ले। जबकि दरभंगा के मसले पर पहले ही समझौते के लिये तैयार कांग्रेस अब…

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