सांसद निधि से कबीर शोध संस्थान और बहुजन चेतना केंद्र खोल रहे हैं मनोज झा

खबर आयी है कि राज्यसभा सांसद मनोज झा अपनी सांसद निधि से आज मेरे गृह जिला पूर्णिया में कबीर शोध संस्थान और बहुजन चेतना केंद्र खोलने की घोषणा करने वाले हैं. यह केंद्र पूर्णिया के कबीर मठ जीवन ज्योति केंद्र के परिसर में शुरू होगा. उसमें शोध संस्थान के साथ-साथ पुस्तकालय, चर्चा केंद्र, ई-पुस्तकालय और वृद्धाश्रम भी होगा. उनकी योजना इसे मुख्यालय के रूप में विकसित करने की है और बाद में इससे जोड़कर अन्य जिलों में भी ऐसे केंद्र खोलने की उनकी योजना है. मेरे हिसाब से सांसद निधि…

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मेरे लिये किसी के टॉप होने से बड़ी खबर है कोमल का मैट्रिक पास करना

कल बिहार में दसवीं का रिजल्ट आया है. आज मीडिया में हर तरफ उन बच्चों का जिक्र है जो अपने राज्य या अपने जिले के टॉपर हैं. ऐसे में कहलगांव के हमारे पत्रकार मित्र प्रदीप विद्रोही एक अलग ही कहानी लेकर आये हैं. यह कहानी कोमल की है, महादलित जाति की कोमल को वैसे तो सिर्फ 42.4 फीसदी अंक आये हैं. मगर उसकी कहानी इसलिए महत्वपूर्ण है कि 150 साल से बसे भागलपुर के घोघा के मुशहरी टोला की वह पहली मैट्रिक पास है. 50-60 घरों के उस टोले में…

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दिल्ली में हर पेड़ पर्यावरण के हक में डटा सिपाही है, हम अपने ही रक्षकों की अकारण बलि कैसे दे सकते हैं

पेड़ लगाओ-पेड़ लगाओ आओ भैया पेड़ लगाओ सब मिलजुलकर पेड़ लगाओ गड्ढा खोदो पेड़ लगाओ   पेड़ बताओ क्या देता है पंथी को छाया देता है सबको साफ हवा देता है चिड़ियों को वह घर देता है. तकरीबन 29-30 साल पहले की बात है, जब मैंने यह कविता लिखी थी. अपने स्कूल के एक प्ले के लिए, जिसका नाम था पेड़वा कटाइल हो रामा. इस प्ले का प्रदर्शन बाद में रांची के बिरसा स्टेडियम में भी हुआ था, जिसे तीसरा पुरस्कार मिला था. आज याद करता हूं तो लगता है…

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न मेढकों की शादी से बारिश होगी, न विभाग का नाम बदलने से

  इन दिनों जब मध्य प्रदेश में मंत्री महोदय मेढ़कों की शादी करवा रहे हैं, ताकि बारिश जल्द हो, बिहार की राजधानी पटना में पूर्वी राज्यों के प्रतिनिधि ग्लोबल वार्मिंग और मौसम पर पड़ने वाले इसके कुप्रभाव की चर्चा करने और इसका समाधान तलाशने के लिए जुटे हैं. यह सरकारों के एप्रोच का फर्क है. एक सरकार का नुमाइंदा अपने आवाम को पुरातनपंथी सोच की तरफ ले जाने की कोशिश में है, तो दूसरी सरकार का मुख्यमंत्री कह रहा है, बिहार में लगातार बारिश कम हो रही है. हम पर्यावरण…

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एक आरटीआई एक्टिविस्ट की हत्या

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के अरेराज कस्बे में एक आरटीआई एक्टिविस्ट की हत्या हो गयी। इन दिनों आरटीआई एक्टिविस्ट भी लगभग उसी तरह के खतरों की जद में हैं, जिस तरह का खतरा निष्पक्ष और सत्ता विरोधी पत्रकार झेलते हैं। मगर आरटीआई एक्टिविस्ट की हत्या पर उतना शोर नहीं मचता जितना पत्रकारों और लेखकों की हत्या पर मचता है। आरटीआई एक्टिविस्ट राजेन्द्र सिंह उसी अरेराज के रहने वाले हैं, जिस इलाके के जितवारपुर गांव के रवीश कुमार NDTV इंडिया के मशहूर एंकर हैं। वे भी अक्सर सत्ता पक्ष के लोगों…

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