विशेष दर्जा तो बिहार को चाहिए

इन दिनों विशेष राज्य के मुद्दे पर आंध्र प्रदेश की सरकार केंद्र से नाराज है, वहां के सांसद एकजुट होकर लोक सभा में आंदोलन कर रहे हैं, मगर बिहार की सरकार ने भाजपा से समर्थन लेने के बाद विशेष राज्य की दावेदारी छोड़ दी है और बिहार के सांसद भी इस मसले पर कोई सवाल नहीं कर रहे. इन्हीं मसलों पर प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मोहन गुरुस्वामी ने अपने फेसबुक वाल पर यह पोस्ट डाली है और आंकड़ों और ऐतिहासिक परिस्थितियों के जरिये बिहार के विशेष दर्जे की वकालत की है. यह…

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धरती के संरक्षण को प्रेरित करती है ‘धरती कहे पुकार के’

शनिवार 24 मार्च को अर्थ आवर और चैत्र नवरात्र के अवसर पर अनंता एचडी एंटरटेनमेंट और माँ वैष्णवी रानी फिल्म्स के बैनर तले निर्मित फिल्म ‘धरती कहे पुकार के’ को रिलीज कर दिया गया. इस फिल्म का निर्देशन पूजा कुमारी ने किया है. चैत्र नवरात्र के अवसर पर रिलीज इस पूरी फिल्म में महिलाओं की ही सशक्त भूमिका रही है. साथ ही अर्थ आवर के अवसर पर इस फिल्म के रिलीज द्वारा लोगों को अपनी सभ्यता और संस्कृति को सहेजने और धरती के संरक्षण के लिए प्रेरित करने का सन्देश…

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उस फकीर उस्ताद की याद में

निराला बिदेसिया सवाल-‘‘कुछ गाते हो?’’ जवाब- नहीं उस्ताद. सवाल- कोई साज बजाने का सउर है? जवाब- ना उस्ताद. पहले थोड़ा मुंह बिचकाये. मेरे चेहरे पर निराशा के भाव छा गये. अगले ही पल वे बच्चों जैसा खिलखिलाते हुए मेरे पीठ पर हाथ फेरते हुए कहने लगे- एका मतलब ई हुआ कि एकदम बेसुरे हो तुम. तब फिर का बात करोगे संगीत पर मुझसे! फिर अगला सवाल—अच्छा ई बताओ कि गीत—संगीत पर कुछ जानते भी हो? मेरा जवाब होता है— रुचि है कला में, गीत—संगीत में, अनुरागी हूं कला का. ठहाका…

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गांधी कहते थे, बिहारियों से बढ़कर बिहारी हैं कृपलानी

आज आचार्य कृपलानी की पुण्यतिथि है. चंपारण सत्याग्रह की कहानियों से गुजरते वक्त मुझे इनके बारे में जानने का मौका मिला था. गांधी जब पहली बार मुजफ्फरपुर जा रहे थे तो कैसे कृपलानी उनके स्वागत के लिए नारियल के पेड़ पर चढ़ गये थे? क्यों महज एक रात कॉलेज के स्टाफ क्वार्टर में गांधी को ठहराने की वजह से उनकी नौकरी चली गयी थी?  क्यों गांधी उन्हें बिहारियों से बढ़कर बिहारी कहते थे? और वह मार्मिक पत्र भी जो गांधी ने उनकी नौकरी जाने के बाद उन्हें लिखा था… पुष्यमित्र…

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तीन-तीन नाकाम मुहब्बतों की तड़प ने बना दिया महेंदर मिसिर को बटोही

नदियों के प्रेम में देश भर में भटकने वाले निलय उपाध्याय अब भोजपुरी गीतों के उस्ताद महेंदर मिसिर की कहानी लिखने की तैयारी कर रहे हैं. इससे पहले वे दशरथ मांझी के जीवन पर पहाड़ उपन्यास लिख चुके हैं. कल उन्होंने महेंदर मिसिर की जयंती पर यह लंबा पोस्ट लिखा था, जिसमें उनके जीवन की नाकाम मुहब्बतों की कहानी थी. उनकी इजाजत से यह पोस्ट जो उनके अगले उपन्यास बटोहिया की आधारभूमि होगी, यहां पेश है…. निलय उपाध्याय भोजपुरी के इस महान नायक महेन्दर मिसिर को अपने गीतों के कारण…

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प्रेम को मजबूती और मुक्ति का मार्ग बनाते हुए पीढ़ियों से स्त्री के मन में दबी इच्छा—आकांक्षा को स्वर देनेवाला पुरबियाउस्ताद

16 मार्च को महेंदर मिसिर की जयंती पर विशेष चंदन तिवारी आज महेंदर मिसिर की जयंती है. पुरबी इलाके के अदभुत और अपने तरीके के अनोखे रचनाकार थे वे. महेंदर मिसिर के एकाध गीतों को करीब दस—बारह सालों से छिटपुट गाती रही थी, बाद में जब पुरबियातान सीरिज की शुरुआत की तो उनके ही गीतों से की. अब तक करीब 16 अलग—अलग गीत गायी. जैसे—जैसे एक—एक कर उनके गीत गाती रही, उनके गीतों की दुनिया से गुजरती रही, उनके गीतों में और उनके व्यक्तित्व में और रुचि बढ़ती गयी. रामनाथ…

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मुंबई में भी एक बिहारी किसान जिंदा था नरेंद्र झा के भीतर

आज सवेरे नरेंद्र झा के नहीं रहने की खबर आयी. फिर तफ्तीश शुरू हुई तो पता चला कि शानदार व्यक्तित्व वाला यह फिल्म अभिनेता 55 साल का था और दो बार पहले भी दिल के दौरे झेल चुका था. तीसरा दौरा झेल नहीं पाया. कल ही नरेंद्र झा ने एक रिवरवॉक की तसवीर पोस्ट की थी. मुंबई में वार्सोवा में उनका एक फार्म हाउस भी है, संभवतः कल वहीं थे, वहीं उनकी मौत हुई. पिछले दिनों वे जब पटना आये थे तो प्रभात खबर के दफ्तर भी आये थे, वहीं…

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इसे पढ़कर कहीं आप प्यार न करने लगें ओल्डएज होम से

पिछले दिनों टीएन शेषण के ओल्डएज होम में पाये जाने पर एक बहस शुरू हुई थी. ज्यादातर लोगों ने इस खबर पर शेषण के लिए अफसोस जताया था. मगर कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने दमदार तरीके से अपनी बात रखी थी कि आज के जमाने में ओल्डएज होम बुजुर्गों के लिए जरूरत बन गयी है और कई दफा वे घरों से बेहतर आनंद ओल्डएज होम में पाते हैं. इसी मसले पर अमेरिका के कैलिफोर्निया शहर में रहने वाली चिकित्सक डॉ. अर्चना पांडे ने बिहार कवरेज के लिए यह आलेख…

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अजब हैं बिहार के किसान, न आंदोलन करते हैं, न आत्महत्या, बस ट्रेन पकड़ के पंजाब निकल लेते हैं

पुष्यमित्र मुम्बई के किसान आंदोलन से याद आ गया, हमारे बिहार में भी किसान हैं. और हमारे वाले जो किसान हैं, वे अद्भुत हैं. वे कमाने के लिए भले ही पंजाब, दिल्ली, बंबई, मद्रास या श्रीनगर चले जायें, मौका मिले तो मिडिल ईस्ट भी घुस जायें, लेकिन आंदोलन के लिए पटना भी नहीं पहुंचते. पटना तभी आते हैं, जब लालू जी फिरी में रैली के लिए बुलाते हैं. अपने मसलों के लिए नहीं. अभी घर गया था तो पता चला कि पूरे इलाके में जहां-तहां मकई के भुट्टे से दाना…

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24 संग्रहालय, सात क्यूरेटर, बंद रहते हैं बिना स्टाफ वाले छह म्यूजियम, सुरक्षा भगवान भरोसे

एक तरफ जगमग करता नया नवेला, नीतीश जी का दुलारा बिहार म्यूजियम तो दूसरी तरफ बिना कर्मचारियों के धूल-धक्कड़ खाते और विरासत की आभा लुटाते राज्य के दूसरे 25 म्यूजियम. यह कहानी उस राजा के राज्य की है, जो खुद को समावेशी विकास का पैरोकार बताता है. मगर हकीकत यह है कि राज्य के दूसरे म्यूजियम स्टाफ की भारी कमी झेल रहे हैं. छह म्यूजियम तो खुलते भी नहीं हैं, क्योंकि वहां कोई स्टाफ नहीं. सात क्यूरेटरों के जिम्मे है 24 म्यूजियम का प्रभार और इनकी देखरेख के लिए कुल…

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