जानिये, एक बूढ़े पेड़ के लिए क्यों उमड़ पड़ा पूरा रायपुर शहर

रूपेश गुप्ता रायपुर के सिटी कोतवाली के सामने पीपल के चार सौ साल पुराने वृक्ष को काटने के खिलाफ जब शाम 7 बजे लोग सड़कों पर उतरे तो सबके हाथ में एक मोमबत्ती और आंखों में पीड़ा और आक्रोश के मिश्रित भाव थे. सबने नारेबाज़ी करते हुए पीपल पर मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि दी. इसके बाद उसकी जड़ के चारों तरफ खुदी मिट्टी को पाटकर वहां पानी डाला. ताकि उसी पेड़ से नई कोंपलें फूट सके. इस अनोखे प्रदर्शन में समाज के हर तबके के लोग थे. क्या राजनेता, क्या सामाजिक…

Read More

चौबीस साल साल से बिहार की नदियों पर कोई अध्ययन नहीं हुआ है नीतीश जी

नीतीश कुमार जी की मासूमियत का कोई जवाब नहीं. कल वे एनआईटी में छात्रों से बोल आये कि आपको बिहार की नदियों पर अध्ययन करना चाहिए. मगर उनकी सरकार का जल संसाधन विभाग नदियों पर क्यों अध्ययन नहीं करता, इस बारे में वे कुछ नहीं बोले. हकीकत यह है कि 1994 के बाद बिहार की नदियों पर कोई अध्ययन नहीं हुआ है. जबकि कायदे से हर दस साल में जलसंसाधन विभाग को इरिगेशन कमीशन का गठन कर इन नदियों का अध्ययन कराना चाहिए था. नीतीश कुमार ने कल ठीक कहा…

Read More

पीरियड एक फ़िल्म भर का मुद्दा नहीं है

अपनी बात- अरुणाचलम मुरुगनाथम जिसके जीवन पर यह फिल्म पैडमैन बन रही है ने लो-कॉस्ट सेनेटरी नैपकीन इसलिए तैयार किया था कि देश की गरीब महिलाओं को भी सस्ता नैपकीन मिल सके. वे इसे बड़ी नैपकीन कंपनियों के लाभ का धंधा बने नहीं रहने देना चाहते थे. इसलिए उन्होने कम कीमत में छोटी-छोटी मशीनें बनायी, बाद में उन्हें देश भर की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को उपलब्ध कराया. उनकी मुहिम ब्रांडेड सेनेटरी नैपकीन कंपनियों के खिलाफ थी. मगर अक्षय कुमार की फिल्म पैडमैन मुरुगनाथम की संवेदनशील कहानी को भुनाने…

Read More