आजाद भारत में सबसे लंबे समय तक चले दंगे की कहानी

निराला   बीते 24 अक्तूबर को भागलपुर में अजीब किस्म का माहौल था. शहर की चहल-पहल वैसी ही थी. नयी पीढ़ी उसी तरह भागदौड़ में व्यस्त. भागलपुर से ही सटे नाथनगर और चंपानगर में हैंडलूम और पावरलूम के करघे भी उसी तरह हर रोज की तरह अहलेसुबह से ही खट-खट कर शुरू हो गये थे. मंदिरों की घंटियां भी सुबह से बज रही थी, मस्जिदों में अजान भी हुआ. लेकिन बड़ी आबादी वाले शहर के कुछ कोने ऐसे थे, जहां एक अजीब किस्म की उदासी का माहौल था. कुछ नये…

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हम क्यों श्रीदेवी को इतनी शिद्दत से याद कर रहे हैं

पुष्यमित्र हर रोज सुबह उठने के बाद एक बार मोबाइल का नोटिफिकेशन चेक कर लेना एक आदत सी बन गयी है. कल भी वही किया और इसका खामियाजा उठाना पड़ा. राज झा सर ने श्रीदेवी की सदमा वाली तसवीर पोस्ट की थी और किसी से सवाल किया था कि क्या यह सच है? नीचे कमेंट बॉक्स में कई RIP थे. अभी हफ्ता भी शायद ही गुजरा हो. किसी चैनल पर मिस्टर इंडिया आ रहा था. इस फिल्म को मैं अक्सर देखने बैठ जाता हूं. श्रीदेवी के लिए नहीं, न ही…

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हमारे लाखों बैंककर्मियों की दुनिया का भयावह दस्तावेज़

रवीश कुमार बैंक कर्मचारियों के सैंकड़ों मैसेज पढ़ गया. उनकी व्यथा तो वाक़ई भयानक है. क्या किसी को डर नहीं है कि दस लाख लोगों का यह जत्था उसे कितना राजनीतिक नुकसान पहुंचा सकता है? कई दिनों से हज़ारों मेसेज पढ़ते हुए यही लगा कि बैंक के कर्मचारी और अधिकारी भयंकर मानसिक तनाव से गुज़र रहे हैं. उनके भीतर घुटन सीमा पार कर गई है. आज जब बैंकों को बेचने की बात हो रही है तो याद आया है कि तब क्यों नहीं हो रही थी जब नोटबंदी हो रही…

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!!हमें भी है एक अदद टोकियो हसेगावा की तलाश!!

इन दिनों बिहार के सीएम नीतीश कुमार जापान में हैं और उन्होंने वहां निगाटा प्रांत में मिथिला संग्रहालय की यात्रा भी की है, जहां बिहार की मिथिला पेंटिंग्स के अनमोल खजाने को वहां के संगीतकार टोकियो हसेगावा ने काफी जतन से प्रदर्शित किया है. यह अफसोस की बात है कि मिथिला पेंटिंग की जन्मभूमि बिहार में ऐसा कोई संग्रहालय नहीं है और यह हमसे हजार किमी दूर है, जिसे एक परदेसी ने संभाल कर रखा है. उस परदेसी कला संरक्षक की कहानी बता रहे हैं क्राफ्टवाला इस आलेख में… क्राफ्टवाला…

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चोरों के रहमोकरम पर है खंडहर में बदलती कोसी परियोजना की कर्मशाला

कोसी परियोजना के मुख्यालय होने की वजह से सुपौल जिले के बीरपुर कस्बे आज भी अलग तरह की रौनक दिखती है. यह रौनक उन दिनों अद्भुत हुआ करती थी, जब यहां भीमनगर बराज और कोसी तटबंध का निर्माण हुआ करता था. उस वक्त का जिक्र रेणुजी ने अपने उपन्यास परती परिकथा में किया है. हालांकि बड़ी उम्मीद से बनी बराज, बांध और नहरें हमारे क्षेत्र को कितनी समृद्धि दे पायी यह कहना मुश्किल है, मगर उस सुनहले दौर की यादें आसपास के निवासियों के मन में आज भी है. उन्हीं…

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नहीं टूटा मिथक. झारखंड के इस राजकीय महोत्सव का नाम आते ही मुख्यमंत्रियों के छूटते हैं पसीने

-डॉ आरके नीरद झारखंड के इस राजकीय महोत्सव का नाम आते ही मुख्यमंत्रियों के पसीने छूट जाते हैं. रघुवर दास ने भी खुद को इसका अपवाद साबित करने का मौका चौथी बार भी गंवा दिया. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो साहस नोएडा जाकर दिखाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिसके लिए उनकी जम कर प्रशंसा की, झारखंड के मुख्यमंत्री वह साहस नहीं कर सके. 16 फरवरी से झारखंड की उपराजधानी दुमका में राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव शुरू हुआ है. यह मेला 1890 में शुरू हुआ था…

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सात साल तक बिना पेशी के जेल में पड़े रहे, दो दिन पहले पेश हुए तो अदालत ने कहा इनके खिलाफ कोई मुकदमा नहीं है

बिहार कवरेज यह पिछले सात साल से जेल में बंद कथित नक्सली नेता विजय आर्य की कहानी है. पुलिस और सरकार कहती है कि वे नक्सली हैं, जबकि उनके परिवार वाले कहते हैं कि वे एक राजनैतिक-सामाजिक कार्यकर्ता हैं. सामंतों के कुकर्मों के खिलाफ गरीबों के हक की लड़ाई लड़ते रहे हैं. वर्षों से बंद पड़े गुरारू चीनी मिल के मजदूरों के हक की लंबी लड़ाई उन्होंने लड़ी है. इसी संघर्ष की ताकत से घबराकर तत्कालीन बिहार सरकार ने उन्हें नक्सली घोषित कर दिया है. बहरहाल सवाल यह नहीं है…

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आज के ही दिन तारापुर में अंगरेजों की गोलियों का शिकार हो गये थे 34 लोग

बिहार कवरेज देश ही नहीं बिहार के भी बहुत कम लोगों को यह जानकारी होगी कि मुंगेर के तारापुर में आज के दिन 34 निहत्थे लोग अंगरेजों की गोली का शिकार होकर अकालकलवित हो गये थे. यह आजादी के इतिहास का एक ऐसा पहलू है जो आज तक अनछुआ और गुमनाम है. इतिहास के पन्नों में यह किस्सा किसी फुटनोट्स की तरह दर्ज है. भले ही इस कहानी में देश के लोगों की सहज दिलचस्पी न हो, मगर कम से कम बिहार के लोगों को तो उन 34 लोगों की…

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नथुने में गोबर की गंध जाते ही याद आता है, अरे आज तो कोई त्योहार है

मिथिलेश कुमार राय गोबर का जिस अर्थ में प्रयोग गुड़ के साथ होता है या गणेश के साथ, गांव में यह वैसा ही नहीं रह जाता है. गुड़ अपनी जगह ठीक है और गनेश तो हैं ही. लेकिन यहां गोबर भी इससे कम महत्व का नहीं होता. विश्वास न होता हो तो त्योहार के दिनों में बगल के किसी गांव में घूम आइए. गोबर के वैसे तो बहुत से काम होते हैं. जैसे इसका उपले थोप लीजिये. इसे सड़ा कर खाद बना लीजिए. गोब गैस की परिकल्पना तो है ही.…

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मेधा पाटेकर ने नीतीश को चिट्ठी लिखकर की है एसएसपी गरिमा मलिक के तबादले की मांग

प्रति, माo श्री नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार 13.02.2018 आशा है आप स्वस्थ होंगे. यह पत्र दो विशेष घटनाओं संबंधी गया में आपके प्रशासन के बर्ताव व गैरक़ानूनी कारवाई संबंधी लिख रही हूँ ताकि आप जल्द हस्तक्षेप करें. (विदित हो कि मैं जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय के बोधगया में आयोजित राज्य सम्मेलन में भाग लेने आयी थी; गया की इस चर्चित दोनों मामले के प्रभावित लोगों के परिजनों से समन्वय के कुछ साथिओं के साथ 11 फरवरी की शाम मिलकर बात–चीत की थी) 1. पहली घटना 7 फरवरी 2018 को…

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