छात्र-राजनीति की उपज नीतीश कुमार छात्रों के जगने से इतना डरते क्यों हैं?

आदित्य मोहन झा (लेखक मिथिला स्टूडेंट यूनियन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी हैं.) बिहार के मौजूदा सरकार और विपक्ष में भी आज जो भी राजनेता हैं कभी वो छात्र राजनीति के उपज रहे हैं पर कालांतर में छात्रसंघ चुनावों को बंद कर दिया गया ताकि इनका कम्पीटिशन और सवाल करने वाली नेताओं की नई पौध विकशित ही न हो. 15 नवंबर को #LNMU में मिथिला स्टूडेंट यूनियन का जो छात्र आंदोलन हुआ था वो विश्वविद्यालय के कुव्यवस्थाओं के खिलाफ हुआ था पर इसे अपार जनसमर्थन-मीडिया कवरेज मिला. नियमित क्लास-नियमित सत्र-लायब्रेरी-लेबोरेट्री-स्पोर्ट्स-कल्चरल इवेंट्स-रिक्त…

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अपमान का घूंट पीकर बदलाव की इबारत लिखने वाला योद्धा #कर्पूरीजयंतीविशेष

जयन्त जिज्ञासु (लेखक ) पिछड़ों-दबे-कुचलों के उन्नायक, बिहार के शिक्षा मंत्री, एक बार उपमुख्यमंत्री(5.3.67 से 31.1.68) और दो बार मुख्यमंत्री (दिसंबर, 70– जून, 71 एवं जून, 77-अप्रैल, 79) रहे जननायक कर्पूरी ठाकुर (24.1.1924 – 17.2.88) के जन्मदिन की आज 94वीं वर्षगांठ है. आज़ादी की लड़ाई में वे 26 महीने जेल में रहे, फिर आपातकाल के दौरान रामविलास पासवान और रामजीवन सिंह के साथ नेपाल में रहे. 1952 में बिहार विधानसभा के सदस्य बने. शोषितों को चेतनाशील बनाने के लिए वो अक़्सर अपने भाषण में कहते थे- उठ जाग मुसाफिर भोर…

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