किसानों के धान बिक गए, सरकार अभी खरीदने की योजना ही बना रही है

यह हर साल की कहानी है, हर साल बिहार सरकार कसम खाकर कहती है कि वह बिहार के किसानों का एक-एक दाना धान न्यूनतम समर्थन मूल्य देकर खरीद लेगी. मगर हर साल वह खरीदने में इतना वक्त लगा देती है कि किसान मजबूर होकर औने-पौने दाम में अपनी उपज स्थानीय व्यापारियों को बेच दे. फिर शुरू होता है कमीशन का खेल. व्यापारी कमीशन देकर किसान बन जाते हैं और पैक्स वाले उनका धान समर्थन मूल्य पर खरीद लेते हैं. इस बार भी यही कहानी है औऱ इस कहानी को विद्रोही…

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पढ़िये, सच्चिदानंद सिंह की कहानी ‘पकड़वा’

इस पुस्तक मेले में साहित्यिक रचनाओं से जुड़ी कई किताबें आयीं, इनमें से ब्रह्मभोज सबसे अलग इसलिए है, क्योंकि इसकी कहानियों में पुराना क्लासिकल अंदाज तो है ही, नये जमाने की नयी सोच भी शामिल है. भूले-बिसरे दिनों की छौंक के बीच से कुछ ऐसे किस्सों को निकाल कर लेखक सच्चिदानंद सिंह लाते हैं, जो आज भी आपको उतना ही आकर्षित करती है. आज छुट्टी के दिन आप आराम से पढ़िये उनकी इस संग्रह की एक कथा पकड़वा… सच्चिदानंद सिंह भागलपुर विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के रहने के लिए छात्रावास तो…

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आज के दिन क्यों तिल, गुड़ और खिचड़ी खाते हैं पूरे देश के लोग #makarsankranti

मकर संक्रांति, लोहड़ी और पोंगल की बात तो सबको मालूम है, आज के ही दिन नेपाल में माघे संक्रांति और बांग्लादेश में सकरेन मनाये जाने का भी जिक्र हो रहा है. मगर क्या आप जानते हैं कि एमपी, छत्तीसगढ़ और गुजरात के आदिवासी भी इस दिन को अलग तरह से मनाते हैं और पूरे दक्षिणी एशिया में सूर्य के मकर राशि से वापसी के पर्व को एक चीज जोड़ती है वह है इस दिन का खास खान-पान. गुड़, तिल और खिचड़ी का भोजन. आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान पर शोध करने…

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