Good News-नये साल पर फेसबुक ने मिलाया दस साल पहले बिछड़े मां-बेटे को

आपने फेसबुक-वाट्सएप पर किसी गुमशुदा की शेयर होती तस्वीरें खूब देखी होंगी, मगर इन शेयर होती तस्वीरों के जरिये एक मां और बेटे के मिलन का किस्सा अपने पड़ोस में घटित होता मैं पहली बार देख रहा हूँ. यह किस्सा भागलपुर का है, जहां नये साल के पहले दिन तेलंगाना की एक वृद्ध महिला का मिलन उसके बेटे से हुआ. इस मिलन का दिलचस्प बयान एक सज्जन ने फेसबुक पर किया है, जो इस प्रसंग का गवाह था. साकेत विनायक नववर्ष पर 10 सालों से बिछड़े एक परिवार का मिलन!…

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रात में पार्टी, दिन में हनुमान जी, हम तो ऐसे मनाते हैं हैप्पी न्यू इय़र

नवहिंदुवादियों का एक धड़ा पिछले कुछ सालों से चैत्र प्रतिपदा को नव वर्ष के रूप में स्थापित कराने में जुटा है, मगर जो ठेठ हिंदू समाज है वह न जाने क्यों अंगरेजों के नव वर्ष पर मंदिरों में उमड़ने लगता है. आज मंदिरों में जैसी भीड़ है वैसी किसी पर्व त्योहार पर ही दिखती है. यह इस बात की निशानी है कि भले यह अंगरेजों का नया साल हो, यह हमारे खून में पूरी तरह से घुल गया है. पढ़ें इस मसले पर आशुतोष पांडेय जी आरा वाले का आलेख…

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आजाद भारत के पहले नव वर्ष में क्यों गिरा दी गयी थीं दो हजार आदिवासियों की लाशें?

आज हैप्पी न्यू इयर के मौके पर क्या आप आजाद भारत के पहले नव वर्ष की कहानी सुनना चाहेंगे? अगर हां तो आपको झारखंड के खरसावां चलना पड़ेगा… जहां आज ही के दिन ऐसा कांड हुआ था जो जलियावाला बाग कांड से भी अधिक नृशंस था. और हैरत की बात है कि यह कांड किसी विदेशी शासक ने नहीं बल्कि आजाद भारत की सरकार ने किया था. हाट में पहुंचे दसियों हजार निहत्थे आदिवासियों पर गोली चलायी गयी थी और गैर सरकारी आंकड़ों के हिसाब से दो हजार आदिवासियों को…

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‘वह फिल्म जिसने तमिल राजनीति को फिल्मी बना दिया’

तमिल फिल्म के इस वक्त के मेगा सुपर स्टार रजनीकांत ने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की है. और इस बात में किसी को भी आश्चर्य नहीं होगा अगर उनकी पार्टी वहां की राजनीति में जड़ जमा ले या पहले ही दांव में सत्ता पर काबिज हो जाये. क्योंकि तमिलनाडु राज्य में आज उनकी हैसियत किसी ईश्वर से कम नहीं. लोग उनके नाम पर जान देने के लिए तैयार रहते हैं. रजनीकांत ऐसे पहले सिने सितारे नहीं हैं जिनको लेकर दक्षिण भारत में ऐसा जुनून हो. उनसे पहले…

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खिजरसराय के गांवों में मुम्बइया पूजा ने न जाने कितने फूल खिला रखे हैं

निराला जी पिछले दिनों खिजरसराय के कुछ गांवों की यात्रा पर थे. वहां उनकी मुलाकात एक मुम्बइया लड़की पूजा से हुई जो मध्य बिहार के इस ठेठ देहात में स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में सकारात्मक बदलाव लाने में जुटी थी. उनके मन में सहज सवाल था कि एक महानगर की यह लड़की बिहार के गांवों में कैसे रह रही है और कैसे उसने यह सब मुमकिन किया. इन्हीं बातों का जवाब इस रिपोर्ताज में है. निराला बिदेसिया पूजा से पहले कभी आमने-सामने की कोई बात-मुलाकात नहीं थी. सिर्फ एक दफा…

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मैं किशनगंज हूं, सोने की चिड़िया के सुर्खाब परों के जैसा

फिरोज किशनगंज के रहने वाले हैं, जेएनयू से स्पेनिश की पढ़ाई की है और अभी चेन्नई शहर में एक निजी शहर में कार्यरत हैं. उनके दिल में किशनगंज बसता है. वे हमेशा अपने शहर, अपने इलाके को याद करते हैं. पढ़िये, उन्होंने इस पोस्ट में किशनगंज को किस शिद्दत से याद किया है. फिरोज आलम मैं किशनगंज हूँ. सीमांचल की गोद मे बैठा एक अनाथ, एक अछूत हूँ, एक कमज़ोर व बीमार पहचान हूं, इसलिए साल के पहले दिन भी खामोश हूँ. अब तो बस बिस्तर पर पड़े किसी रोगी…

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रसगुल्ला और सिंघाड़ा- लेखक सच्चिदानंद सिंह की स्वाद यात्रा

नये साल की शुरुआत हम स्वाद यात्रा से कर रहे हैं. वैसे तो समोसा और रसगुल्ला दोनों में से किसी का संबंध बिहार से नहीं है. मगर बिहारियों को दोनों बहुत पसंद आता है. वह समोसा को सिंघाड़ा बनाकर खाता है और रसगुल्ला को दशमलव प्रणाली से, यानी एक बार में कम से कम दस. इस सिंघाड़ा और रसगुल्ला की स्वाद यात्रा कथाकार सच्चिदानंद सिंह ने लिखी है. वे अपने बचपन में भागलपुर के उस बहंगी वाले से इस यात्रा की शुरुआत करते हैं, जो घूम-घूमकर समोसा-रसगुल्ला बेचता था. फिर…

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