कोई खोया-खोया महसूस कर रहा है, कोई कह रहा है, अच्छा हुआ आदत छूटी

पुष्यमित्र सुबह सवेरे चाय के साथ अखबार पढ़ना कई लोगों की आदत है. चौबीस घंटे वाले न्यूज चैनल और सोशल मीडिया के इस घनघोर दौर में भी यह आदत छूटती नहीं है. इसके बावजूद कि अखबार इन दिनों सरकार चालीसा में बदल चुके हैं. फिर भी राजधानी से लेकर राज्य के कोने-कोने से खबरों के अपडेट एक साथ यहीं मिलते हैं. भले ही अखबार के 24 पन्ने दो मिनट में पलटे जा सकते हैं, फिर भी अखबार एक आदत की तरह बची हुई है. यह बात तब और गंभीरता से…

Read More

पोलिटिकल रैलियों से लेकर मर्डर तक की सुपाड़ी लेने लगे हैं बाइकर्स गैंग

सड़कों पर लहरिया काटते हुए आड़े-तिरछे बाइक चलाने वाले युवक आपको पहली निगाह में मौत की परवाह न करने वाले सनकी युवक लग सकते हैं. मगर पटना में इन बाइकर्स की तफ्तीश करने वाले बताते हैं कि इनका गैंग बनाना तो महज ब्रांडिंग और पब्लिसिटी है. असली मकसद पोलिटिकल पार्टियों से रैली करने, हंगामा मचाने और जमीन पर कब्जा करने से लेकर मर्डर तक का ठेका लेना है. पिछले दिनों पटना में कई अपराधों में इन बाइकर्स गैंग का हाथ रहा है. पद्मावत का विरोध करने के अभियान में भी…

Read More

दशकों बाद हो रहे छात्रसंघ चुनाव से क्या बदलेगी बिहार के कॉलेज कैंपसों की सूरत?

आदित्य मोहन झा मौजूदा बिहार के राजनीति के सभी बड़े नेता छात्र राजनीति के उपज हैं. चाहे वो लालू प्रसाद यादव हों या नीतीश कुमार, सुशील मोदी हों या रामविलास पासवान. ये सभी कद्दावर नेता अपने छात्र जीवन मे जेपी आंदोलन से राजनीति में प्रवेश किए और फिर दशकों तक बिहार की राजनीति इन्हीं के आस-पास घूमती रही. शायद इसलिए इन्होंने सुनियोजित ढंग से छात्रसंघ चुनावों को विश्वविद्यालयों में बंद ही करवा दिया ताकि भविष्य में इन्हें ललकारने और इनसे टकराने के लिए कोई नई पौध ही न जड़ जमाए.…

Read More

चर्चिल की भतीजी, दरभंगा का जमींदार और महात्मा गांधी की कांस्य प्रतिमा

पुष्यमित्र आज महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है. इस मौके पर एक अनूठा किस्सा लेकर आया हूं. इस किस्से के तीन किरदार हैं. पहली चर्चिल की भतीजी, वही विंस्टन चर्चिल को गांधी को शातिर बुड्ढा कहता था. दूसरे दरभंगा के जमींदार कामेश्वर सिंह जिन्हें अंगरेज सरकार ने सर और नाइट कमांडर की उपाधि दी थी और तीसरे खुद महात्मा गांधी हैं, जो शांति और प्रेम के वैश्विक प्रतीक हैं. यह दिलचस्प है कि चर्चिल की भतीजी क्लेयर शेरिडन 1931 के आसपास गांधी की आवक्ष मूर्ति बनायी थी. जाहिर सी बात है…

Read More

संतूर दुनिया को कश्मीर का सबसे नायाब तोहफा है- अभय सोपोरी

बासु मित्र कश्मीर के सोपोरी सूफियाना घराना से ताल्लुक रखने वाले मशहूर संतूर वादक अभय रुस्तुम सोपोरी किस परिचय के मुहताज नहीं हैं. स्पीक मैके के प्रोगाम में पहली बार पूर्णिया आये. विद्या विहार इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सभागार में अभय रुस्तुम सोपोरी ने संतूर और कश्मीर के वर्तमान हालत के साथ-साथ देश के विलुप्त हो रही लोककला पर दिल खोल कर बात की. उन्होंने कहा कि कुछ दशक से बदलते लाइफ स्टाइल के कारण युवा कल्चर से दूर होते जा रहे हैं. देश में आज एडवांस इण्डिया की बात…

Read More

अफसोस बिरला हाउस में उस रोज कोई बत्तख मियां नहीं था

पुष्यमित्र आज बत्तख मियां याद आते हैं. वैसे तो आज गांधी को याद करने का दिन है. आज ही दिल्ली के बिरला हाउस में गांधी की गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी. उस रोज बिरला हाउस में बत्तख मियां नहीं थे. होते भी तो गांधी को बचा पाते या नहीं, कहना मुश्किल है. बत्तख मियां उस रोज चंपारण के अपने गांव अकवा परसौनी में थे. उस रोज बिरला हाउस में नाथूराम गोडसे थे और उनके साथी थे. जिन्होंने गांधी पर गोली चलाई और गांधी की मौत हो गयी.…

Read More

बिहार में अब गांवों में भी लोग चंदा करके सीसीटीवी कैमरा लगवाने लगे हैं

इन दिनों न सिर्फ शहरी बल्कि बिहार के ग्रामीण इलाकों से भी चोरी और अपराध से जुड़ी खबरें खूब आ रही हैं. बताया जा रहा है कि पुलिस प्रशासन की पूरी ताकत शराबबंदी सफल कराने जैसे काम में लगी है, जिससे दूसरे अपराध लगातार बढ़ रहे हैं और लोग परेशान हैं. ऐसे में बिहार के एक गांव के युवकों ने गांव में क्राइम कंट्रोल करने के लिए डिजिटल तकनीक को अपनाया है. उन लोगों ने पूरे गांव में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगवा लिये हैं. आइये जानते हैं उस गांव की…

Read More

वसंत में घास के फूल

मिथिलेश कुमार राय भले ही सरसों के पीले-पीले फूलों को देखकर लोगों को वसंत के आ जाने का पता चलता हो लेकिन जब भी वसंत आता है वह घास को भी फूल का उपहार देता है. यह अलग बात है कि हमारी दृष्टि पीले चकाचौंध में फंसकर रह जाती है और हम छोटी और निचली चीजों के सौंदर्य को देखने से चूक जाते हैं. परंतु कुछ दिन पहले मेरी नज़रों ने इन नजारों को भी देख ही लिया. शायद वो एक घास थी. या घास भी नहीं थी। कोई बेकार…

Read More

जानिये उन 36 बिहारियों को जिनके विचार गूंजते हैं हमारे संविधान में

आज गणतंत्र दिवस है. आज के ही दिन हमें हमारा संविधान मिला है. वह संविधान जो पिछले 68 सालों से हमारे देश में समानता और न्याय की भावनाओं को जिंदा रखे हुए है. जो हमारे देश में अब तक हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करता रहा है. हम जब इस संविधान के निर्माण की बात करते हैं तो डॉ. आंबेडकर और डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे गिने-चुने नाम ही जुबां पर आते हैं. मगर इस संविधान को तैयार करने में 299 लोगों की एक बड़ी टीम थी, जिसे अलग-अलग राज्यों से…

Read More

भंसाली है कलप्रिट नंबर वन, करनी सेना तो चौथे नंबर की गुनहगार है

पुष्यमित्र आज जब पद्मावत फिल्म रिलीज हो रही है और पूरा देश करनी सेना की करनी से तबाह है. ऐसे में अगर मुझसे पूछा जाये तो इस तबाही के दोषियों में करनी सेना को चौथे नंबर पर रखूंगा. पहले नंबर पर इस फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली होंगे, दूसरे पर केंद्र और राज्यों की सरकार है, तीसरे नंबर पर हमलोग मीडिया वाले हैं. करनी सेना तो मूर्खताओं का एक वायसर है, जो महज पब्लिसिटी की ख्वाहिश में रक्तबीज की तरह पूरे देश में बेवजह फैल रहा है. अगर मुझे इस…

Read More