इस 143 साल पुरानी पार्ट टाइम आब्जर्बेटरी ने बताया, आज पूर्णिया का मौसम सबसे ठंडा है

पूरा बिहार शीतलहर की चपेट में है और इस मौसम का सबसे ठंडा दिन कल पूर्णिया में था, जब वहां का तापमान 1.2 डिग्री दर्ज किया गया. दिलचस्प है कि पूर्णिया में तापमान और मौसम के बदलाव को दर्ज करने के लिए जो आब्जर्वेटरी है, वह 1874 की बनी हुई है. तब अंगरेजों ने इसे पार्ट टाइम आब्जर्वेटरी के रूप में बनाया था. आइये जानते हैं बासुमित्र से इस आब्जर्वेटरी की दिलचस्प कहानी.

बासुमित्र

बासुमित्र, संवेदनशील औऱ लोकोपयोगी विषयों पर खोजी नजर रखने वाले पत्रकार हैं और फिलहाल दैनिक भास्कर से जुड़े हैं

पूर्णिया के सबसे पुराने सरकारी कार्यालय में से एक अंग्रेजों के जमाने में स्थापित उत्तर बिहार का इकलौता मौसम विभाग का यह कार्यालय है. मौसम विभाग के इस कार्यालय को 1 जुलाई 1874 को अंग्रेजों ने मौसम पर नजर रखने के लिए पार्ट टाइम ऑब्जरबेट्री के रूप से शुरू किया था. उस जमाने में मौसम वैज्ञानिक यहां से पूरे उत्तर बिहार के मौसम पर नजर रखते थे. आजादी के बाद भी यह कार्यालय इसी स्थान पर कार्यरत रहा. सन 1984 को इसे फुल टाइम सेंटर बना कर काम लिया जाने लगा. जिसके बाद यहां  तीन वैज्ञानिक सहायक और दो मल्टीटास्क स्टाफ का पद सृजन हुआ.  वर्तमान में यहां दो वैज्ञानिक सहायक और एक मल्टीटास्क स्टाफ  के जिम्में काम चलता है.

अंगरेजों ने इस देश को कई ऐसी संस्थाएं दी हैं, जिसकी मदद से हमारा काम आज तक चलता रहा है. आजाद भारत की सरकार नये संस्थानों की स्थापना में तो कमजोर रही ही, वह इन पुराने संस्थानों की साज संभाल भी ठीक से नहीं कर पा रही. इसी की मार यह मौसम विज्ञान केंद्र भी झेल रहा है.

इस कार्यलय की स्थापना पुलिस लाइन परिसर में हुई थी. तब से लेकर आज तक इसके हालात में कोई सुधार नहीं आया है. एक तरफ जंगल तो दूसरी तरफ जेल की दीवार. देख-रेख और मरम्मत के अभाव में भवन जर्जर हो चल है और बारिश होने पर छत से पानी टपकता है. बारिश में टपकते छत के कारण से ऑफिस का कंप्यूटर अलमारी में ही बंद रहता है. न तो प्रशासन के द्वारा कभी इसके जीर्णोद्धार के लिए ध्यान दिया गया, न ही आज तक किसी जनप्रतिनिधि ने यहाँ की सुध ली. अगर आगे भी यह भवन उपेक्षा का शिकार रहा तो किसी दिन यह ध्वस्त हो सकता है.

मौसम विभाग के प्रभारी अधिकारी बताते हैं कि 143 साल बीत जाने के बाद भी इस महत्वपूर्ण कार्यालय में न तो पीने की पानी व्यवस्था है न शौचालय की सुविधा. बगल में जंगल होने के कारण से बारिश के मौसम के साथ-साथ अन्य  दिनों में सांप बिच्छू जैसे विषैले जानवरों का खतरा बढ़ जाता है. वहीं छत के टपकने के कारण से कम्प्यूटर अक्सर बंद ही रहता है और दफ्तर का काम घर के निजी लैपटॉप या बाहर किसी कैफे के माध्यम से करवाना पड़ता है.

यहां के प्रभारी मौसम अधिकारी एसके सुमन कहते हैं, जिला प्रशासन को एक बार मौसम विभाग के कार्यालय के जीर्णोद्धार के लिए पहल करना चाहिए. यहां  काम करने वाले कर्मी बिना किसी मूलभूत सुविधा के आभाव में काम कर रहे हैं.

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