सुशासन बाबू का बिजली वाला ‘गर्व’ और अंधेरे में बिहार का दूसरा सबसे बड़ा गांव

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यजुआर गांव में बिजली के लिए जारी आंदोलन

अगर सबकुछ ठीक रहता तो बीते कल और आज देश भर के ऊर्जा मंत्री राजगीर में मौजूद होते और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मौके पर बिहार राज्य में बिजली को लेकर किये गये अपने काम-काज का ढिंढोरा पीट रहे होते. यह सच है कि पिछले कुछ सालों में बिहार राज्य में बिजली की स्थिति बेहतर हुई है. खपत में तीन से चार गुना की वृद्धि हुई है. 183 गांव ही ऐसे बचे हैं जहां बिजली नहीं पहुंची. मगर यह भी सच है कि प्रति व्यक्ति खपत के मामले में आज भी बिहार देश के सबसे निचले पायदान पर है. जहां छत्तीसगढ़ के लोग 1719 एमबी बिजली प्रति व्यक्ति सालाना खपत करते हैं, वहीं बिहार में यह आंकड़ा सिर्फ 265 एमबी का है. बिना बिजली वाले 183 गांव ही बचे हैं, मगर पांच फीसदी गांव ही ऐसे हैं जहां घर-घर में बिजली पहुंची है. ऐसे में जब यजुआर जैसे 25 हजार से अधिक की आबादी वाले गांव में बिजली नहीं पहुंचने का किस्सा हमारे सामने आता है तो समझ आ जाता है कि बिजली को लेकर बिहार सरकार के आंकड़ों में कितने छेद है.

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तत्कालीन ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल का पत्र

अद्भुत है यजुआर की कहानी. मुजफ्फरपुर जिले के तीन पंचायतों और 25 हजार से अधिक की आबादी वाला और 25 वर्ग किमी में फैला यह बिहार का दूसरा सबसे बड़ा गांव किसी शहरी कस्बे से कम नहीं. इस गांव में समृद्ध लोगों की कमी नहीं. कोई ऐसी गाड़ी नहीं जो इस गांव में नहीं दिखती. आलीशान मकान हैं, तरह-तरह की सुविधाएं हैं. मगर बिजली नहीं है. 45 साल पहले बना पानी टंकी आज तक बिजली के इंतजार में ही काम करना शुरू नहीं कर पाया है. ऐसा नहीं है कि सरकार को खबर नहीं है. सांसद को पता है, सांसद ने तत्कालीन ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल को बताया है, पीयूष गोयल महोदय ने खुद जांच करवाई है, रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कारपोरेशन ने खुद रिपोर्ट लिखी. मगर बिजली नहीं पहुंची. सिर्फ इस गांव में ही नहीं, मुजफ्फरपुर के कटरा प्रखंड के नौ पंचायतों में बिजली नहीं है.

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आरइसी का कुबूलनामा

दिलचस्प बात यह है कि कुछ साल पहले तक तो सरकार भी यह मानकर चल रही थी कि गांव विद्युतीकृत है. इसलिए 2747 गैर विद्युतीकृत गांवों की जो सूची बनी और जिले गर्व ऐप पर डाला गया उसमें भी यजुआर का नाम नहीं था. क्योंकि चालीस साल पहले इस गांव में बिजली के खंबे लगाये गये थे. ऐसे में सरकार ने मान लिया कि गांव में बिजली आ ही गयी होगी. पिछले एक साल से मिथिला स्टूडेंट यूनियन के लड़के जमीन पर और सोशल मीडिया में बिहार के दूसरे सबसे बड़े गांव में बिजली लाने की लड़ाई लड़ रहे हैं. लड़ाई तो केंद्र सरकार भी लड़ रही है और राज्य सरकार भी कि गांव-गांव में बिजली पहुंचे, घर-घर में रोशनी हो. मगर फिर भी यजुआर में बिजली पहुंच नहीं पा रही है.

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गर्व के आज के अपडेट के मुताबिक मुजफ्फरपुर के सभी गांवों तक बिजली पहुंच गयी है. फिर यजुआर का क्या हुआ?

दिलचस्प है कि सरकारी आंकड़ों के हिसाब से आज की तारीख में मुजफ्फरपुर जिले में एक भी ऐसा गांव नहीं है, जहां बिजली नहीं पहुंची है. इस सूची में सहरसा के 52 और कटिहार के 53 गांव जरूर दिख रहे हैं. इसका मतलब यह है कि तमाम कवायदों के बावजूद गर्व की गैर विद्युतीकृत गांवों की सूची में यजुआर का नाम आज भी नहीं चढ़ा है. गांव में उपरवाले की कृपा से बिजली आ जाये तो अलग बात है.

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