‘विदेह’ राजा भजन गा रहे हैं, नासमझ जनता ‘रोटी’ मांग रही है

P.M. (इनपुट- चंपारण से सिद्धार्थ और सीतामढ़ी से नागेश्वर प्रसाद सिंह)

इनदिनों बिहार का राजा आवाम की बस्तियों की तरफ निकला है. वैसे नहीं, जैसे पुराने जमाने के राजा वेश बदल कर निकला करते थे, ताकि प्रजा के दुखों का पता चल सके, ताकि यह समझ में आ सके कि वे राजधानी में बैठकर जो योजना बनाते हैं, उसे उसके अफसरान कैसे लागू कराते हैं. यह दूसरे किस्म की यात्रा है. राजा के इस यात्रा की बकायदा ढोलाही पीटी गयी है. अफसरान को पहले से पता है कि फलां रोज राजा साहब आने वाले हैं. अफसरान तैयारियों में जुट गये है. आनन-फानन में गांव में सड़कें बन रही हैं, नालियां खोदी जा रही हैं, शौचालय जो इस राज के मंदिर कहे जाते हैं, वे तैयार हो रहे हैं.

अफसरान की इस फुरती की वजह यह नहीं है कि राजा साहब जब गांव आयें तो उन्हें दिखे कि उनके अफसरानों ने विकास किया है. उन्हें मालूम है कि राजा साहब को सब मालूम है. और राजा साहब को पहले से मालूम है कि कहां कितना काम हुआ है. यह कवायद सिर्फ इसलिए है कि राजा साहब के साथ पहुंचने वाले टीवी कैमरे को भ्रम में डाला जा सके. वह टीवी कैमरा जनता को बता सके कि राज्य में हर जगह विकास हो रहा है. थोक में हो रहा है. जनता खुश है और राजा का स्वागत पुष्पवर्षा से कर रही है. जगह-जगह मंगलगान गाये जा रहे हैं, राजा को आशीषा जा रहा है कि तुम कितने कमाल हो, तुमने राज्य की शक्लोसूरत बदल दी.

तुमने शराब बंद कर दिया, बिल्कुल ठीक किया. भले ही शराब की गांव-गांव में होम डिलीवरी हो रही है और गरीब आदमी नकली शराब बनाने के धंधे में उतर आय़ा है. तुमने बाल विवाह बंद करा दिया, तुम्हारी जय हो. अब राज्य का हर दूल्हा 21 साल से बड़ा है और दुल्हन 18 से. भले ही नयी रैंकिग कह रही हो कि हम देश में बाल विवाह के मामले में नंबर वन हैं. भले ही चुल्हाय मड़र सोचता है कि बेटी बड़ी हो जायेगी तो दूल्हा का दाम भी बढ़ जायेगा सो वह सरकार की आंख में धूल झोंक कर बेटी की शादी करवा देता है. खैर, इन बातों में न जाइये. यह भी मत सोचिये कि पिछले दिनों जब हर गांव-हर शहर में सैकड़ों शादियां रोज हो रही थीं तो कितने लोगों ने अपनी शादी का रिजस्ट्रेशन करवाया. किसने शपथ ली कि शादी बिना दहेज के हुई है. आप तो बस जैकारा लगाइये.

राजा इसी मकसद से जनते के बीच पहुंच रहे हैं. अफसरान इसी मकसद से तैयारी कर रहे हैं. तैयारियों से राजा खुश हैं, हर जगह अपनी और अपने अफसरों की पीठ थपथपा रहे हैं. हर जगह खूबसूरत मंच पर बने भव्य सिंहासन पर बैठकर भजन गा रहे हैं. बता रहे हैं कि आप तो मानव श्रृंखला की तैयारी कीजिये. राज्य में सबकुछ बढ़िया चल रहा है. सब चाक-चौबंद है. हमने बिहार को स्वर्ग बना दिया है.

मगर हर बार न जाने कैसे, पुलिस वालों को झांसा देकर इस भजन के बीच कुछ लोग व्यवधान देने पहुंच जाते हैं. पहली सभा में कुछ औरतों ने पूछ लिया कि आपने कहा था, चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वाले साल में उन्हें उनकी जमीन पर कब्जा दिलाया जायेगा. राजा ने फट से बात बदल दी, कहा हरिनगर मिल वाला मामला तो कोर्ट में है. औरतों ने कहा कि हरिनगर का मामला नहीं. उनकी अपनी जमीन का मामला जिनपर दबंगों का कब्जा है. पिछले ही दिनों सरकार के बेतिया राज की जमीन पर क्रेन चला कर उसे कब्जामुक्त करा लिया, फिर हम गरीबों की जमीन क्यों कब्जा मुक्त नहीं कराते. राजा ने निगाह फेर ले, मंत्रियों और अफसरों ने भी निगाह फेर ली, राजा के साथ आये कैमरों ने भी निगाह फेर ली. जनता को पुलिस ने महफिल से बाहर कर दिया.

अगले रोज समान काम के लिए समान वेतन मांगने वाले मास्टर साहब पहुंच गये. राजा ने डपट कर पूछा, काहे हल्ला करते हो जी, तुम लोग क्या दहेज लेकर शादी करना चाहते हो? फिर वही हुआ, राजा ने निगाह फेर ली, अफसरों ने निगाह फेर ली, टीवी कैमरा ने भी निगाह फेर ली, पुलिस वाले अपना काम करने लगे.

तीसरे दिन, सीतामढ़ी में राजा ने कहा कि सबको बाढ़ राहत का पैसा मिल गया है न जी? अफसरों ने बताया था कि पैसा आधे पीड़ितों के खाते में चला गया है. जबकि सच्चाई यह थी कि एक भी किसान को क्षतिपूर्ति की राशि नहीं मिली है. जनता सवाल सुनते ही चिढ़ गये. चारो ओर से आवाज आयी, नहीं. फिर हर तरफ से राजा की हूटिंग शुरू हो गयी. राजा ने दो अलग-अलग कोने से दो किसानों को बुलवाया, दोनों मुकर गये. कहा, पैसा क्या, फूटी कौड़ी नहीं मिली. राजा अफसरों को डांट भी नहीं पाये. हां, कैमरे ने जरूर मुंह फेर लिया औऱ फिर से राजा का भजन शुरू हो गया.

आजकल राजा के भजन में तीन कैसेट हो गये हैं. पहला शराबबंदी का कैसेट, दूसरा बाल विवाह का कैसेट, तीसरा दहेज प्रथा का कैसेट. राजा बारी-बारी से तीनों भजन जनता को सुनाते हैं. ऐसा लगता है कि आसाराम बापू प्रवचन दे रहे हैं. मगर जनता इतनी मूरख है कि राजा को बाबा मानने के लिए तैयार नहीं है. वह राजा से रोटी मांग बैठती है. राजा भजन सुनाना चाहते हैं. टीवी के कैमरे औऱ अखबारों के संजय को सख्त हिदायत है कि सिर्फ भजन नोट करें, रोटी को एडिट कर दें. लिहाजा हर टीवी पर औऱ हर अखबार में राजा के भजन की चर्चा है. चर्चा है कि राज्य में हर ओर अमन-चैन है. सब ठीक-ठाक है. बिहार में स्वर्ग उतर आया है. राजा विदेह हो गये हैं. जनता विदेह नहीं हो पा रही. विदेह हो जाती तो रोटी-रोटी नहीं करती.

 

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