यह नया इंडिया नहीं है, दुश्मन के घर में घुस कर मारने की हमारी परंपरा पुरानी है

पुष्यमित्र

निश्चित तौर आज भारतीय वायु सेना को बधाई देने का दिन है, क्योंकि उसके लड़ाकू पायलटों ने शौर्य का प्रदर्शन किया है. वे पाकिस्तान की सीमा में 50 किमी से अधिक भीतर घुसे, पाकिस्तानी फौज, इंटेलिजेंस और रडारों को इसका पता तक नहीं चला. वे विस्फोटक भी गिरा आये हैं. इन दोनों बातों की तस्दीक पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने भी की है. हालांकि वे कहते हैं कि भारतीय एयरक्राफ्ट हड़बड़ी में यहां-वहां विस्फोटक फेक कर लौट आये, भारतीय न्यूज एजेंसियों का दावा है कि जैश के ट्रेनिंग कैंप पर बम गिराया गया और बड़ी संख्या में आतंकी मारे गये. अगर पाकिस्तानी दावा सच भी हो तो आज हम अपर हैंड में हैं. विवाद इस बात का भी है कि बालाकोट खैबर पख्तून राज्य़ का शहर है, या पाक के कब्जे वाले एक गांव. अगर हमारी वायु सेना ने खैबर पख्तून वाले इलाके पर बमबारी की है, तो यह निस्संदेह बड़ी खबर है, क्योंकि हमने सीधे पाकिस्तान पर हमला किया है.

इसके बावजूद मेरे लिए यह उतनी बड़ी खबर नहीं है कि यह कहने लगूं कि यह नया इंडिया है, घुस कर मारेगा. जो लोग ऐसा कह रहे हैं वे भारतीय सेना के शौर्यपूर्ण इतिहास को अपमानित कर रहे हैं. अगर इतिहास की कम जानकारी हो तो इस तसवीर को देखिये जो पोस्ट के साथ लगी है. इसमें भारतीय सेना के अफसर और जवान लाहौर के एक पुलिस स्टेशन के सामने आराम से तसवीरें खिंचवा रहे हैं. तसवीर 1965 की है, यानी उस युद्ध में भारतीय सेना लाहौर के कई इलाकों पर कब्जा कर चुकी थी. इसके अलावा आपने 1971 के युद्ध में भारतीय सेना के आगे आत्मसमर्पण करते पाकिस्तानी जनरल नियाजी की तस्वीर देखी ही होगी. भारतीय सेना हमेशा से ताकतवर रही है और अपने शौर्य का प्रदर्शन करती रही है. उसने जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान के भीतर घुस कर हर बार हमला किया है. इसलिए आज का सर्जिकल स्ट्राइक 1965 और 1971 के युद्ध के दौरान भारतीय सेना के कारनामों के आगे कोई खास बड़ी उपलब्धि नहीं है.

यह कहिये कि हम हमेशा जरूरत पड़ने पर दुश्मन को सबक सिखाते हैं, यह भारतीय सेना की परंपरा का हिस्सा है. अगर आप उस परंपरा को भूल कर यह कहते हैं कि यह नया इंडिया है, तो आप सेना के उस शौर्यपूर्ण इतिहास को खारिज करते हैं. यह देश और सेना दोनों का अपमान है.

दूसरी बात, इस एयरस्ट्राइक का यह मतलब कतई नही होना चाहिए कि पुलवामा के शहीदों का बदला पूरा हो गया. मेरे लिए पुलवामा के शहीदों का बदला पूरा होना, जैश के सरगना मसूद अजहर को भारत लाकर उसे भारतीय अदालत द्वारा सजा दिलाना है. मुझे उम्मीद है भारतीय सरकार इस प्रयास में जुटी होगी.

बाकी, राजनीतिक पार्टियां तो युद्ध का लाभ चुनाव के वक्त अपने पक्ष में माहौल बनाने में करती ही है. नया इंडिया वाला नारा भी इसी मकसद से गढ़ा गया है, ताकि यह भ्रम फैलाया जा सके कि अब तक भारत पाकिस्तान की हरकतों से दबता रहा, मोदी जी ने आकर पाकिस्तान को सबक सिखा दिया. लेकिन आप इतिहास से वाकिफ होंगे तो यह दावा हास्यास्पद लगेगा. पाकिस्तान को जिस तरह लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी ने सबक सिखाया, उसकी तुलना में मोदी राज तो बहुत फीका है. इस राज में पाकिस्तान ही हमें लगातार परेशान कर रहा है.

औऱ हां, आज के दौर में एक खास बात यह भी है कि आजकल दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष सैन्य कार्रवाई का इस्तेमाल दुश्मन को सबक सिखाने में कम. अपने समर्थकों को फुलाने और विरोधियों को चुप कराने में अधिक करते हैं. आज देखिये मोदी विरोधियों को, उन पर मोदी की तारीफ का मोरल प्रेशर आ गया है. मोदी जी और उनके समर्थकों के लिए इस एयर स्ट्राइक का सबसे बड़ा महत्व यही है. वे पाकिस्तान को नहीं, बल्कि देश में उनकी विचारधारा के विरोधियों को सबक सिखाने के लिए अधिक उत्सुक हैं. सोशल मीडिया के स्टेटस देखिये.

Spread the love
  • 1.9K
    Shares

Related posts