बेटी पढ़ गयी तो दहेज बढ़ जायेगा, तो करा दो जल्दी शादी

तपस्या चौबे

बिहार के चंपारण में बचपन गुजारने वाली तपस्या इन दिनों अमेरिका के न्यू जर्सी में रहती हैं और सोशल मीडिया पर बिहार के जीवन को संजीदगी से याद करती हैं. अविनाश द्वारा बाल विवाह पर लिखे गये आलेख के बाद इन्होंने यह पोस्ट लिख कर अपने इलाके में समाज और परिवार की मानसिक स्थिति को अच्छी तरह जाहिर किया है.

बिहार में बाल विवाह और दहेज के ख़िलाफ़ आंदोलन चलाए जा रहें हैं. मुझे इसके बारे में ठीक से जानकारी नही कि आंदोलन किस स्तर पर चल रहा है. क्या किया जाय वहां की खबरें यहां ठीक से मिल ही नही पाती. कुछ दोस्तों ने इस बारे में लिखना शुरू किया तो मालूम हुआ.

मैं अपने अनुभव से कुछ बातें आपके सामने रखती हूं.

बाल विवाह की ज़्यादातर समस्या मैंने निचले तबके के लोगों में देखी है. निचले तबके का मतलब आप जाति और सम्पत्ति मान सकते हैं. जहां मैं पलीबढ़ी वहां ज़्यादातर बनिया समाज है. लोग साधन सम्पन्न हैं पर उन्हें मैट्रिक के बाद बेटी की शादी कर देनी होती है. इसके कारण जो मुझे दिखे वो ये रहे

  • लड़केलड़की में अंतर.
  • लड़कियों की पढ़ाई में रुचि ना होना.
  • ज़्यादा उम्र होने पर अच्छा लड़का नही मिलेगा.
  • लड़की घर में है, कुछ कर नहीं रही तो ब्याह कर दो.
  • किसी रिश्तेदार ने कम दहेज का रिश्ता बताया तो बिना बेटी से पूछे, हां कह दिया.
  • एक नया पिछली बार सुनाइकट्ठा परिवार है तबत क बेटी की शादी कर देतीं हूं. बंटवारे के बाद अकेले मुश्किल होगी.

दूसरी ओर कोई अगर अपनी लड़की को पढ़ा रहा है तो, पड़ोसी यही ताने देंगेबेटी को बुढ़ा रहे हैं. ऐसा भी क्या पढ़ाना की बुढ़ापे में शादी करना. ये ताने ज़्यादातर ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ, भूमिहार के लिए प्रचलित है कि ये अपनी बेटी बूढ़ी करके शादी करते हैं.

अब इसका भी कारण मैं बताती हूं इन जातियों के लोग थोड़े से सम्पन्न रहे हैं. बेटे के साथ इन्होंने थोड़ा बेटी पर भी थोड़ा ध्यान दे दिया. ज़्यादा नही तो कम से कम मां के समय में इंटर और आज ग्रेजुएशन और एमए करा ही देते हैं. भले ही वो जाकर ख़ाली इग्ज़ाम क्यों ना दे. अब बेटी ग्रेजुएट है तो दामाद ढूंढने में समय लगेगा हीं.

यही से दूसरी कहानी शुरू होती है. निचले तबके में धन की कमी के साथ शिक्षा का भी अभाव रहा है. साथ ही बेटी अगर पढ़ गई तो उम्र हो जायेगी. उम्र होगी तो बड़ी मुश्किल से रिश्ता मिलेगा. फिर लड़की पढ़ी तो लड़का भी उस लायक ढूँढना होगा, तो दहेज भी बढ़ जाएगा.

कुल मिला कर देखा जाय तो मेरे इस छोटे से अनुभव से मुझे यहीं लगता है, मांबाप कई बार बेटी के बारे में सोचते तो हैं पर कभी ख़ुद बेटी, तो कभी समाज, पैसे की तंगी उन्हें मजबूर कर देती है. बेटी की शादी का फ़ैक्टर, सुंदरता, उम्र, आजकल पढ़ाई और दहेज तय करती है.

दोस्तों पोस्ट थोड़ा बड़ा हो जाएगा पर इस टॉपिक से जुड़े कई अनुभवों में से दो और सुनाना चाहती हूं.

पहला एक लड़की को उसका परिवार पढ़ना चाहता था. परिवार ठीकठाक आमदनी वाला है. पिता की इच्छा हुई उसकी दूसरी बेटी जितना चाहे उतनी पढ़ाई करे. अब हुआ यह कि लड़की को नौवीं में ही किसी से प्यार हो गया. बात फैलने लगी. लड़की को समझाया गया. कुछ दिन स्कूल भी बंद करा दिया गया. फिर भी वह नहीं मानी. किसी तरह दुखी होकर पिता ने मैट्रिक तक पढ़ाया. अब उसकी मां की यहीं चिंता, बात बढ़ गई तो शादी कहीं नही हो पाएगी. थक हार कर पिता ने दसवीं के बाद लड़की की शादी कर दी. अगले साल गोद में एक बच्चा लेकर मस्त फ़ैशन में मेरे घर के आगे से जा रही थी. मेरी मां को देखा तो रुक गई. अपने ससुराल का गुणगान करने लगी.

दूसरा लड़की के घर वाले लड़की को पढ़ा रहें हैं, पर लड़की का ध्यान पढ़ाई पर कम इधरउधर माने, सजनेसवरने में ज़्यादा है. अपनी मां से कहती रहती है, मुझे पटना या दिल्ली भेजना आगे पढ़ने के लिए. उसकी मां का कहना है, मैट्रिक में अच्छे नम्बर आए तो सोचेगी. लड़की मेरे पास आई कि उसकी मां को समझाया जाय. मैंने उससे पूछा तुम क्या पढ़ना चाहती हो आगे? लड़की के पास कोई उत्तर न था. बोली बस मैं इस छोटी जगह से निकलना चाहती हूं, जहां जींस पहने पर भी डाँट पड़े.

मैं उसकी भावनाएँ समझ रही थी. बढ़ती उम्र में इंसान विद्रोही हो जाता है. मैंने भी कई ग़लतियाँ की हैं, सो रिलेट कर पा रही थी. उससे कहा, अगर तुम्हें फ़ैशन में इंट्रेस्ट है तो फ़ैशन डिज़ाइनिंग का कोर्स है. वो सोच सकती हो. वो बोली मॉडलिंग के लिए कौन सा कोर्स होगा? या फिर एयर होस्टेज के लिए कहाँ जाना होगा पढ़ने.

मैंने उसे जानकारी दे दी. फिर भी वो अपनी माँ के पास मुझे ले गई. बोली, आप कहियेगा तो मां मान जायेगी. मैं उसका मन रखने के लिए चली गई. उसकी माँ से बात भी किया, पर उनका जबाब सुन कर, कुछ ठोस कह ना पाई. बस बोला, आपकी बेटी है भाभी, समझिए इसे.

लड़की की माँ का जवाब थाबाबुनि रउवा एक बहिन. पढ़े में होशियार, मां कमाए वाली. इहां त हमार बेटी केतना पढ़ेलि हम जानतानी. दूसर हमार पांच बेटी. भैया के राउर आमदनी मालूम बा. अभी एक साथ परिवार बा तब तक कम से कम दो बेटी के बियाह हो जाई, त ठीक रही. बाक़ी हम शादी वहीं करेंगे जहां इसको आगे पढ़ने दिया जाय. शादी के बाद लोग शिक्षा मित्र के नोकरी नेखे करत का? इ ठीक से पढ़स तब त घरवालों से बात करेम. ख़राब रिज़ल्ट पर घर के लोग कैसे मानी?

कुल मिला कर मुझे यह लगा आजकल माबाप अपनी बेटियों को भी पढ़ाना चाहतें हैं. पढ़ाने के पीछे एक कारण यह भी है कि अच्छे लड़के या परिवार में शादी हो जायेगी.

Spread the love

Related posts