“बुझलियै, रैय्याम चीनी मील खुजै बला छै”

आदित्य मोहन झा

कुछ ही दिन पहले धनकटनी करके पंजाब से लौटा ‘जोगिया’ आज बहुत खुश था. सांझ में जब गामक हाट से लौटा तो उसके पास घर वालों को बताने के लिए एक खबर थी. ‘मैनाबाली’ को सब्जी का झोरा धराने वक्त माथ से गमछा हटाते हुए वो सब कुछ एक ही बार में कह देना चाहता था. लेकिन फिर उसने उसे जल्दबाजी में इशारा किया चमरटोली के बीच मे बने बाँसक मचान की तरफ आने को और स्वयं आगे बढ़ गया. बकरी-छकरी, भैंस, अधनंगे बच्चों, खाँसते बूढ़े-बूढीयों, घूर-धुआं, थाल, पुआल, गंदगी के चिल्ल-पौं में सना यह जगह गांव के बाहर स्थित था क्योंकि जाति व्यवस्था में सबसे निचले स्तर पर खड़े चमार जाति के गरीब-असहाय-मजदूरों की यह चमरटोली थी.

साँझक उखराहा में मचान के पास घूर लगता है और इसलिए भीड़ थी आज भी. सबको इकट्ठा देखके जोगिया एक ही सांस में उतावला जैसे बोल उठा “रैय्याम चीनी मील खुजै बला छै” मतलब रैय्याम चीनी मिल खुलने वाला है. पहले किसी का ध्यान बात पर गया ही नहीं, सब जोगिया के उतावले पन पर चौंक पड़े और मुंह ताकने लगे. जब जोगिया को लगा की उसकी बात किसी ने समझी नहीं है तो वो आके घूर तर बैठ गया और खोरह्ना ने घूर कोरते हुए फिर से सबको शांत होकर वो सब बताया जो आज हाट पर रैय्याम चीनी मिल के खुलने सम्बंधित उसने सुनी थी.

अरसे से बंद दरभंगा के रैय्याम चीनी मिल के खुलने की सुगबुगाहट इन दिनों फिर तेज हो गयी है. इन खबरों के बीच तिरहुत के गांवों में किस तरह की हलचल है, उसे युवा छात्र नेता आदित्य मोहन झा ने इस रिपोर्ताज के जरिये बहुत खूबसूरत तरीके से पेश किया है. दिलचस्प है कि उन्होंने यह बताने के लिए ठीक उसी रिपोर्ताज शैली का सहारा लिया है, जिसमें फणीश्वरनाथ रेणु ने कई यादगार रिपोर्ताज लिखे थे. आइये, एक बार फिर साहित्य और पत्रकारिता की दुनिया से विलुप्त हो रही इस शैली में रैय्याम चीनी मिल के खुलने की खबर से गांवों में पहुंची खुशी का आनंद लें.

अपने जैसे खुशी और बेचैनी का लक्षण जोगिया सबके चेहरे पर ढूंढने लगा, सब खुश भी थे पर उसके जैसे उतावले नहीं. बीड़ी का धुक लेता हुआ मोतिया थोड़े अविश्वास से बोला “ई खबर त कै बेर सुनने छियै जे सकरी लोहठ-रैय्याम-पंडौल और बांकी सब चीनी मील के संगे-संगे पेपर मील-जुट मील भी खुलतै, लेकिन कहिया?”

जोगिया भी ये सब जानता था पर फिर भी वो उम्मीद में था, हर साल धनरोपनी-कटनी आ गेहूं के समय उसको पंजाब जाना पड़ता था. भोजन-नगद मजदूरी उसको खींच के तो ले जाती थी पर अफीम की चाय, 15-15 घण्टे काम और ऊपर से मार-पीट-अपमान-प्रताड़ना सहके जब वो आता था तो बीमार हो जाता था.

उसे लग रहा था की यदि यहाँ चीनी मिल खुल जाएगा तो कम से कम मजदूरी के लिए उसे बाहर नहीं जाना पड़ेगा, किसानों का गन्ना बिकेगा और हाथ मे पैसा आएगा तो मजदूरों को भी नगद मजदूरी मिलेगा. वैसे उसके पास अपना जमीन नहीं था पर बचनु मालिक का खेत वो बंटाई पे करता था, उसपर भी गन्ना उपजाएगा तो उससे भी कुछ पैसा आएगा. गाम में लोग नहीं हैं अब इसलिए मन नहीं लगता, मिल-खेती फिर से होगा तो लोग रहेंगे, थोड़ा विकास होगा, पैसा आएगा सबके हाथ मे और फिर सब कुछ बदल जाएगा. वो इन उम्मीदों को बांध रहा था मुरेठा में और फिर हाथ झाड़ते हुए खड़ा हो गया और ब्रह्मनटोली कई तरफ चल पड़ा.

वो चाहता था की पहले जिनके यहां वो हल चलाता था और खेती संभालता था उस गिरहत बचनू मालिक को भी ये सब बता के आए. रास्ते मे वो 20-25 साल पहले के और आजके बचनू मालिक के स्थिति के बारे में सोचते हुए जा रहा था. गिरहत ज्यादा धनिक नहीं थे पर 12 बीघा जमीन में खेती करके गन्ना के पैसे से 4 बच्चा को पढ़ा रहे थे, मकान बना लिए थे, अच्छा घर चलता था और दलान पर टायर-बैल-भैंस बहुत संख्या में था. अचानक चीनी मिल बन्द हो गए और आय का श्रोत भी.

बचनू मालिक बचत-खुचत से बस 2 बेटी का बियाह करवा पाए पढ़ाई छुड़ा कर. बांकी दोनों बेटा भी पढ़ाई छोड़के दिल्ली और बंबई चला गया कमाने. आज बचनू मालिक 70 के आस-पास हैं, बीमार रहते हैं, दलान सुन-सान रहता है और खेती बन्द है. मकान पुराना पड़ गया है और टूट-फूट रहा है, जिस खेती के पैसे से वो ये मकान बनाए थे अब उससे इतना भी नहीं आता की वो इसका मरम्मत करवा सकें. बेटा सब साल में एकबार आते हैं, अब तो वहीं घर-बार-नौकरी-चाकरी है, शहर के सस्ते इलाके में दू-दू कमरा का मकान बना लिए हैं और अब जिनगी वहीं है पर गिरहतनी के गुजरने के बाद से बचनू बाबु जाने से साफ मना कर देते हैं. जोगिया जा-जाके दिन में उनका खोज-खबर लेता रहता है, छोटा-मोटा काज-टहल कर देता है. बचनू बाबु उसके सामने अक्सर चीनी मिल के दौर की बात कर चुके थे, इसलिए आज वो ये सब उन्हें बताने जा रहा था.

दलान पर जोगिया पहुँच गया था पर वहां निशब्धता थी. दो तीन बार गिरहत-गिरहत हल्ला किया पर कोई जवाब नहीं तभी देखा की बीमार अवस्था मे भी बचनू बाबु बिना बेंत के उतावले अवस्था मे कुछ ही दूर में चक्कर काट रहे थे. चेहरे पे खूब खुशी थी और हाथ रगड़ रहे थे, जोगिया को देखते ही खिल उठे. उन्हें अपनी खुशी किसी से जाहिर करनी थी. जोगिया समझ गया की किसी ने इन्हें आके बता दिया है की शायद रैय्याम चीनी मिल खुल जाएगा.

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