बाल विवाह रोकने के लिए किशोरियों ने बिहार सरकार को दिये कमाल के टिप्स

पिछले दिनों राजधानी पटना में बिहार के अलग-अलग जिलों की सौ किशोरियां जुटी थीं. दो दिन के कार्यक्रम के दौरान उन्हें कई जानकारियां हासिल कीं, अपने मसलों पर चर्चाएं कीं, मौज-मस्ती कीं और जाते-जाते बिहार सरकार को कई सुझाव देकर गयीं. ये सुझाव उन्होंने राज्य के शिक्षा मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, समाज कल्याण मंत्री और पंचायत मंत्री को सौंपे हैं. ये ऐसे सुझाव हैं कि अगर सरकार इन पर अमल करे तो बाल-विवाह की समस्या से आसानी से निजात पाया जा सकता है. इनमें कुछ ऐसे सुझाव भी हैं जो किशोरियों के जीवन बेहतर बनाने से भी संबंधित हैं.

किशोरियों के सुझाव

  • हर पंचायत में मैरिज रजिस्टर हो, जिसमें पंचायत में होने वाली सभी शादियों को दर्ज कराया जाये. साथ ही पंचायत में स्कूल छोड़ चुकी, घरेलू और दूसरे रोजगार में लगी लड़कियों की सूची भी तैयार होकर रखी जाये.
  • राष्ट्रीय बालिका दिवस या अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर विशेष ग्राम सभा हो जिसमें बाल विवाह की रोकथाम और किशोरियों के मसले पर बातचीत हो.
  • प्रत्येक पंचायत में बाल विवाह संरक्षण समिति बने. जिसमें पंचायत के प्रतिनिधियों, जीविका से जुड़ी महिलाओं और गांव के सम्मानित सदस्यों को शामिल किया जाये.
  • आंगनबाड़ी केंद्रों पर कम कीमत और अच्छी क्वालिटी का सेनेटरी नैपकीन उपलब्ध हो, ताकि किशोरियों को ये आसानी से उपलब्ध हो सकें. इन केंद्रों पर किशोरियों की जागरुकता के कार्यक्रम संचालित हों और केंद्र से जुड़ी किशोरियों की संख्या बढ़ाई जाये.
  • कर्नाटक में इस साल अप्रैल में यह कानून बना है कि अगर किसी शादी में कोई एक पक्ष भी विवाह की उम्र से छोटा हो तो विवाह तत्काल अमान्य माना जाये. यह अच्छा कानून है, बिहार में भी ऐसा कानून बनना चाहिए.
  • कस्तूरबा विद्यालयों में दसवीं तक पढ़ाई की व्यवस्था हो और सभी किशोरियों की 12वीं तक की शिक्षा मुफ्त हो.
  • ड्राप आउट की संख्या को देखते हुए हर प्रखंड में कम से कम तीन आवासीय विद्यालय किशोरियों के लिए हों.
  • हर पांच किमी पर माध्यमिक विद्यालय हो और 7 से 10 किमी के दायरे में उच्च विद्यालय, ताकि किशोरियों की पढ़ाई नहीं छूटे.

 

Spread the love

Related posts