बच्चा घर में हो तो खुशियां आसपास रहती हैं, उदासी दरवाजे से लौट जाती है

मिथिलेश कुमार राय

एक बच्चा हो घर में तो घर के शेष सारे सदस्य उस बच्चे के पहरेदार के किरदार के निर्वाह में लग जाते हैं. बच्चे का क्या पता कि वह कब क्या करने लगे. जरा सी नज़रें हटी नहीं कि ये देखो क्या कर दियाड्रेसिंग टेबल के सारे सामानों को पलट दिया! बच्चे का जब तलक नटखटपन गुम न हो जाए, घर के लोगों को उसके सेवक की भूमिका में रहते हुए जी हजुरी में तत्पर रहना पड़ता है.

मिथिलेश कुमार राय की पहचान एक संवेदनशील कवि-कथाकार के रूप में है. जीवन में छोटी-छोटी चीजों के बीच खुशियां तलाश लेने की और उसके जाहिर करने की प्रवृत्ति उन्हें समकालीन लेखकों के बीच खास बनाती है. यह आलेख उन्होंने एक पिता के रूप में अपने अनुभवों के आधार पर लिखा है. इसमें उन्होंने बहुत सूक्षमता से इस बात की पड़ताल की है कि घर में कोई बच्चा हो तो आपका जीवन कैसे बदल जाता है.

घर में कोई नन्हां बच्चा हो तो वातावरण से मुस्कराहट की आवाज कभी गुम नहीं हो पाती हैं. उदासी का मुंह देखते ही बनता है. वह पैर पसारने के लिए बारबार आती तो हैं लेकिन उसे दरवाजे के पास से ही खाली हाथ लौट जाना पड़ता है. मजाल है कि बच्चे की किलकारी की आवाज के सामने वह एक पल के लिए भी टिक पाए. बेचारी, उदासी खुद उदासी की चपेट में आ जाती है.

कोई भी बच्चा चेहरे की मुस्कुराट को हमेशा बरक़रार रखने में घर के सदस्यों की बड़ी मदद करता है. वह रोनी सूरत या किसी की भवें टेढ़ी देखता है तो रोने के लिए मुंह बनाने लगता है. अरे रे रे, मेला बच्चा, मेरा सोना! लीजिये, बच्चे के चेहरे पर मुस्कुराट लाने के लिए प्रयत्न शुरू हो गए. आप हसेंगे तभी तो पीछे से बच्चा हंसेगा. तो हमेशा मुस्कुराते रहिये. तभी बच्चे के होंठों पर हंसी तैरेती रहेंगी. नहीं तो वह ऐसा बवाल मचायेगा कि थकहारकर आपको हंसी की शरण में आना ही पड़ेगा.

घर में एक छोटा सा बच्चा रहता है तो आपको मौन का महत्त्व भी धीरेधीरे समझ में आ जाता है. आपको धीरेधीरे बोलने का अभ्यास करना पड़ता है. क्या है कि बच्चा थोड़ीथोड़ी देर पर झपकी लेने के लिए बिस्तर पर जायेगा. तब अगर आप जोरजोर से बोलेंगे तो बच्चे की नींद उचट जाएगी. कच्ची नींद से जगा बच्चा ऐसा भोकर पारकर रोयेगा कि आपको याद आ जायेगा. उसे शांत करने में आपके पसीने छूट जाएंगे. एकाध बार ऐसा होते न होते आपको खुद ब खुद धीमे बोलने की आदत हो जाएगी. हो सकता है कि आप इशारों में बातें करना भी सीख जाएं. यह भी अच्छा ही रहेगा. सुनते हैं कि मौन शांति और सुकून, दोनों देता है.

एक बच्चा आपको अपने पड़ोसी से गहराई से जोड़ने की कोशिश करता है. क्योंकि वह जबतब मौका मिलते ही अपने खिलौने लेकर उधर भाग जायेगा. कई बार आपको लगेगा कि जिन चीजों पर आप वर्षों से ध्यान नहीं दे पाएं हैं, बच्चा उन चीजों की तरफ आपका ध्यान खींच रहा है. मसलन आप बिल्ली को देखकर कभी कुछ नहीं सोचते हैं. चूहे पर कभी नजरें जाती भी हैं तो जाती हैं. फूलों को तो आप रोज ही देखते हैं. इसमें नई बात क्या है. लेकिन जब बच्चा बिल्ली चूहा और फूल देखकर किलकारियां भरेगा तो आप जानेंगे कि खुशियां हरेक जगह छुपी हुई रहती हैं. बस उसे कोई देख लेता है और कोई नहीं देख पाता है. आप चित्रपुस्तिका की दुनिया में जाएंगे तो वहां आपको अपने बचपन के कुछ दृश्य दिखाई देने लगेंगे. तब आपके होंठों पर बरबस ही एक मीठी सी मुस्कान तिर आएंगी. आपको समाचार चैनल से कार्टून नेटवर्क पर जबरदस्ती ले जाया जायेगा. इससे आपको क्षणिक कोफ़्त भी होगी. लेकिन वहां आप टॉम और जेरी की अनोखी हरकतें देखेंगे तो आपको भी गुदगुदी आने लगेंगी और आप भी अनायास ही ठहाके लगाने लगेंगे. आप छोटे भीम के कारनामे देखने के लिए भी कुछ क्षण ठहर जायेंगे और भूल जायेंगे कि अभी किस गंभीर मसले पर डिबेट देख रहे थे. आपको अफ़सोस नहीं होगा.

घर में एक छोटा सा बच्चा होता है तो सुबह बड़ी जल्दी हो जाती है. आपको लगेगा कि बच्चे ने ब्रह्ममुहूर्त में जैसे ही किलकारियां भरना शुरू किया बाहर अपने घोंसले में बोर हो रही चिड़िया भी चुहचुहाने लगीं. किलकारी और चींचीं के शोर ने सूरज दादा की नींद में खलल दाल दी और मजबूरन उन्हें आँखें खोलना पड़ा. आपको लगेगा कि सुबह ऐसे ही होती है. अगर बच्चा बाहर निकलने के लिए ज्यादा कुलबुलाने लगेगा तो आप निकलेंगे. फिर आप देखेंगे कि अलसवेरे फूलों और पत्तों पर पड़ी ओस की बूंदों पर जब सूरज की पहली किरण पड़तीं हैं तो वह कैसे हीरे की तरह चमकने लगती हैं. आप जानेंगे कि सुबह की हवा कितनी प्यारी होती है और वातावरण कितना शांत होता है!

बच्चे के रहने से आपको माँ का महत्व बड़ी शिद्दत से महसूस होगी. आप देखेंगे कि बच्चा माँ के आसपास ही डोलता रहता है हरदम. पिता अगर सप्ताह भर के लिए गायब रहे तो बच्चे को कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ता. लेकिन वह माँ को एक घंटा के लिए न देखे तो बुक्का फाड़ कर रोने लगता है. आप जानेगें कि यह सिर्फ आहार के कारण नहीं होता. इसमें ममता वाली बात भी होती है.

एक बच्चे के घर में होने से यह बात बड़ी शिद्दत से समझ में आती है कि समय और युग कोई सा भी क्यों न हो, दादादादी नानानानी और रिश्ते के अन्य बुजुर्ग हवापानी के मानिंद ही होते हैं जिसके होने से चैन और सुकून भी आसपास ही रहता है. जो नेह के खाद से परिवार के विरवे को पोसते नहीं थकते हैं!

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