पांच रोज में बखरी को बार्सिलोना बनाने में जुटे हैं अफसर, सीएम आने वाले हैं

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 12 दिसंबर से विकास समीक्षा यात्रा पर जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि वे उन जिलों की यात्रा करेंगे जहां-जहां 2009 में विकास यात्रा के दौरान वे गये थे, वे जाकर देखेंगे कि आठ-नौ साल के बाद उन इलाकों में कैसा विकास हुआ. इसकी समीक्षा करेंगे. अब सीएम आ रहे हैं तो लोकल एडमिनिस्ट्रेशन की हवा टाइट है, आनन-फानन में उन गावों को चमका देना चाहते हैं, जहां सीएम आने वाले हैं. इसी सिलसिले में सीतामढ़ी के एक गांव बखरी से किसान नेता नागेंद्र सिंह ने हमें यह रिपोर्ट भेजी है. देखिये बखरी के जमीनी हालात… आप भी अपने इलाके के उन गांवों की ऐसी रिपोर्ट हमें भेज सकते हैं, जहां सीएम जाने वाले हैं.

नागेंद्र सिंह

आठ साल बाद 14 दिसंबर को सीएम सीतामढ़ी जिला के बखरी गांव आ रहे हैं. इस गांव में वे 2009 में कड़ाके की ठंड मे इसी महीने आये थे. रात्रि विश्राम खास तौर पर तैयार किए गए कॉटेज में किया था. समस्याओ के समाधान के लिए अफसर तैनात किए गए थे. अपने साथ सैकड़ो आवेदन लेते गये थे. सुबह में पड़ोस के अनुसूचित जाति के मुहल्ले मे जाकर लोगों की खैरियत भी पूछी थी. लोग पूरी तरह आश्वस्त हुए थे कि जब मुख्यमंत्री स्वंय आकर हालात देखकर जा रहे है, तो उनके दिन जरूर बहुरेंगें.

एक अतिरिक्त स्वास्थ्य केन्द्र का उद्घाटन भी हुआ था. अस्त-व्यस्त हेचरी के दुरुस्त होने के साथ ही गांव के कायाकल्प होने का सपना भी लोगों ने सजोया था. संभव है कि कुछ इसी मनोदशा में मुख्यमंत्री 12 दिसंबर से उन सभी जिलों की यात्रा पर निकल रहे है, जहां 2009 में विकास यात्रा का पड़ाव था. परंतु इन नौ सालों मॆं कोई सरकारी अमला इस गांव में झांका तक नहीं.

अब चूंकि मुख्यमंत्री का कार्यक्रम तय हो गया है, पूरा सरकारी तंत्र सवा सौ परिवार वाले मुशहर टोली को सजाने-संवारने में दिन-रात एक किये हुए है. घर-घर शौचालय, हर गली में नाली और सड़क, मवेशी के लिए नाद से लेकर पानी टंकी और बिजली की व्यवस्था केवल चार-पांच दिनों में पूरी करनी है.

सरकारी एजेंसी के जज्बे को सलाम कि मुख्यमंत्री के इस गांव से लौटने के बाद नौ सालों तक चिरनिद्रा में रहने के बाद पांच दिनों में इस मुहल्ले की बदली हुई तस्वीर मुख्यमंत्री को दिखाने पर आमदा हैं. रातो-रात ईंट-सीमेंट-बालू की कीमतें बढ़ गयी हैं. जाहिर है, ऐसी परिस्थिति में निर्माण कार्य की गुणवत्ता कोई मायने नहीं रखती. इसका परीक्षण चार-छह महीने में हो सकेगा कि कितने शौचालय सही सलामत पाये जाते हैं. 14 दिसंबर की तस्वीर जैसी भी खूबसूरत दिखे, पर आज के दिन बखरी के मुशहर टोली, वार्ड नंबर छह की तस्वीर कुछ यूं दिख रही है.

जिस अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन करके सीएम गये थे, वहां की छत गिरने से एक नर्स घायल हो गयी. तब से यहां न रोगी आता है, न कोई कर्मचारी.

 

 

धड़ाधड़ शौचालय बन रहे हैं
नालियां भी फटाफट तानी जा रही हैं
दहेज विरोधी नारे लिखना तो सबसे जरूरी काम है

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