पहले ही दांव में ट्रिपल सेंचुरी और हजार रन, क्या यह बिहार क्रिकेट के नए युग की शुरुआत है?

शशांक मुकुट शेखर

पिछले कुछ दशकों में भारत में रिलिजन बन चुके क्रिकेट में एक अदद स्थान बनाने में बिहार हर मोर्चे पर असफल रहा है. बिहारी क्रिकेट प्लेयर्स का भारतीय क्रिकेट टीम में खेलना महज एक सपना बनकर रह गया है. यहाँ तक कि कई वर्षों से बिहार क्रिकेट टीम ने किसी बड़े बीसीसीआई टूर्नामेंट में शिरकत तक नहीं किया है.

1936 में स्थापित बिहार क्रिकेट एसोशियेशनन अपने आपसी राजनीति में उलझकर क्रिकेट जगत से अलग-थलग पड़ गया है.  2003-04 में के बाद बिहार क्रिकेट टीम ने रणजी ट्रॉफी में भाग नहीं लिया है.  इसका मुख्य कारण बिहार में क्रिकेट गवर्निंग बॉडी की उदाशीनता. 2001 में लालू यादव के बीसीए प्रसीडेंट बनने के बाद बिहार के क्रिकेट में पॉलिटिक्स हावी हो गई जिसने क्रिकेट में बिहारी प्रतिभा की लोटिया डुबो कर रख दिया. इस कारण बिहार के प्रतिभाशाली क्रिकेटर्स बिहार छोड़कर झारखंड या दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर जाते हैं.

मगर पिछले कुछ दिनों में बिहार के क्रिकेट जगत में एक ख़ुशी का सौगात आया है. पहली बार विजय मर्चेंट ट्रॉफी अंडर-16 क्रिकेट टूर्नामेंट बिहार में हो रहा है. इस बदलाव का गवाह बना है पटना का ऊर्जा मैदान. और शनिवार को जो हुआ उससे बिहार में क्रिकेट के अच्छे दिन आने के शुभ संकेत मिले हैं.  इस दिन बिहार की अंडर-16 टीम ने बीसीसीआई के किसी भी स्तर के टूर्नामेंट में सबसे बड़ी जीत हासिल की. बलजीत बिहारी के 358 रन की मैराथन पारी और स्पिनर रेशू राज के मैच में लिए गए 13 विकेट की बदौलत बिहार ने अरुणाचल प्रदेश को पारी और 870 से हरा दिया. बिहार ने अपनी पहली पारी सात विकेट पर 1007 रन बनाकर घोषित की जो कि एक नया रिकॉर्ड है. इस मैच ने पूरे देश के क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान बिहार की तरफ खिंचा है. साथ ही बीसीसीआई पर भी इसका गहरा असर पड़ा ही होगा.

यह जीत क्रिकेट में बिहार के लगभग डेढ़ दशक के सूखे के समाप्त होने की शुरुआत है. यह बारिश की उन फुहारों की तरह है जो जल्द ही मुसलाधर बारिश का रूप लेगी और बिहार में क्रिकेट की फसल फिर से लहलहा उठेगी.  अब बिहार क्रिकेट के मठाधीशों को भी जाग जाना चाहिए. उन्हें अहसास करना चाहिए कि किस तरह बिहारी प्रतिभा जंजीरें तोड़ बाहर आने के लिए छटपटा रही है.

सबसे जरुरी है क्रिकेट में पॉलिटिक्स और पॉलिटिशियन के हस्तक्षेप को सीमित किया जाए. साथ ही बीसीए में चल रहे आंतरिक मतभेद को खेल हित में समाप्त हो जाना चाहिए. आज भारतीय क्रिकेट टीम में हर राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर देश का नाम रौशन कर रहे हैं. मगर बिहार के क्रिकेटर मैनेजमेंट के आतंरिक कलह की वजह से घरेलू टूर्नामेंट में भाग लेने से भी वंचित रह जाते हैं.  आज जब हम गर्व से कहते फिरते हैं कि बिहारी किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं. हम हर क्षेत्र में अच्छा कर रहे हैं. और बिहार में क्रिकेट एक ऐसा क्षेत्र है जिसके खिलाड़ी 1983 के वर्ल्ड कप विजेता टीम के सदस्य रह चुके हैं. उम्मीद है कि इस विजय मर्चेंट ट्रौफी अंडर-16 क्रिकेट टूर्नामेंट के बाद बिहार में क्रिकेट के दिन बहुरेंगे.

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