‘नेट आजादी’ के इस नायक को भूल नहीं सकता सहरसा, पूर्णिया और बेगूसराय

न्यूट्रलिटी यानी भारत में नेट की आजादी पर आखिरी मोहर लगा दी है. यानी अब इंटरनेट प्रोवाइडर ऐसा नहीं कर पायेगा कि फेसबुक, व्हाट्सएप जैसी साइटों को बेहतर स्पीड दे और आपकी हमारी छोटी-छोटी साइटों के साथ स्पीड के मामले में भेदभाव करे. अब फ्री इंटरनेट के नाम पर गूगल, फेसबुक या एयरटेल जैसी कंपनियों को एकाधिकार जमा लेने का मौका नहीं मिलेगा. यह भारत के करोड़ों नेट यूजरों की बड़ी जीत है. मगर क्या आप जानते हैं कि पूंजीवाद के इस दौर में इन भारी-भरकम कंपनियों के खिलाफ किसने इतना बड़ा फैसला लिया है.

अगर मैं नाम बताऊं तो सहरसा, पूर्णिया और बेगुसराय के पुराने जमाने के लोग अनायास ही कह बैठेंगे, अरे ये तो हमारे यहां अधिकारी रह चुके हैं. बहुत अच्छे अफसर थे. पूर्णिया को तो 30 साल बाद भी ऐसा अफसर आज तक नहीं मिला. उस अफसर ने कोसी-सीमांचल के पिछड़े शहर में जो काम कर दिया, आज भी वह शहर की विरासत के नाम पर कायम है. भले हम लोग उसे बचा और संवार नहीं पाये. जी हां, आपने अब गेस कर लिया होगा. उस अफसर का नाम रामसेवक शर्मा है.

रामसेवक शर्मा टेलिकॉम रेगुलेटरी ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के चेयरमैन हैं. वे पहले आधार (UIDAI) के भी मिशन डॉयरेक्टर रह चुके हैं. उन्हें 2015 में देश का दूसरा सबसे ताकतवर अफसर माना गया था. झारखंड सरकार में प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहते हुए वहां जो उन्हें सरकार के डिजिटलाइजेशन का काम किया वह काबिले-तारीफ है. दिलचस्प है कि आरएस शर्मा को डिजिटलाइजेशन का चस्का बिहार के पूर्णिया में ही लगा था, जब उन्होंने 1986 में Dbase नाम का साफ्टवेयर तैयार किया था ताकि चोरी गये हथियारों की पड़ताल की जा सके.

1978 बैच के आइएएस रामसेवक शर्मा वैसे तो उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के रहने वाले हैं, मगर UIDAI में जाने से पहले उनका तकरीबन पूरा कैरियर बिहार-झारखंड में बीता है. कैरियर की शुरुआत उन्होंने सहरसा से की जहां उन्हें डीडीसी के पद पर पोस्टिंग मिली थी. फिर बेगूसराय और पूर्णिया जिले में बतौर डीएम काम किया. पूर्णिया में उनके काम-काज को आज भी सराहा जाता है.

उन्होंने वहां के अस्त-व्यस्त लैंड रिकार्ड को सुधारने का काम किया. उसी दौर में उसका कंप्यूटराइजेशन किया. स्कूल के रिकार्ड को ठीक किया. डी-बेस नामक सॉफ्टवेयर का निर्माण और उसे लागू करना तो इतिहास में दर्ज है ही. हालांकि पूर्णिया के लोग उन्हें दूसरी वजहों से याद करते हैं. उन्होंने उस जमाने में शहर में एक भव्य स्टेडियम का निर्माण किया था. सड़कें और बिजली की व्यवस्था दुरुस्त करायी थी और कई और महत्वपूर्ण काम किये थे. आज भी पूर्णिया में कई लोग ऐसा कहते हुए मिल जायेंगे कि रामसेवक शर्मा जैसा डीएम कोई नहीं हुआ.

बहरहाल फिर उनका तबादला धनबाद में हो गया, कुछ रोज सेंट्रल सर्विस में भी रहे. जहां मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री रहते हुए उनकी सेवाएं लीं. फिर उन्होंने राज्य अलग होने के बाद झारखंड कैडर चुन लिया और वहां कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे. UIDAI योजना जब शुरू हुई तो नंदन नीलकेणी ने जिस पहले अधिकारी को अपनी टीम में रखा वे रामसेवक शर्मा थे. वे मोदी के प्रिय माने जाते हैं. साथ ही जनपक्षधर लोग भी उन्हें नेट न्यूट्रलिटी पर कड़े फैसले के लिए पसंद करते हैं.

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