नीतीश के इस एमएलए ने बनायी अपनी पार्टी और जीतने जा रहे गुजरात की दो सीटें

P.M.

गुजरात चुनाव को लेकर नीतीश जी इन दिनों मीडिया और सोशल मीडिया में खूब बयानबाजी कर रहे हैं. वे कभी बीजेपी की जीत का दावा करते हैं तो कभी ईवीएम को संदेह से परे बता देते हैं. मगर सच्चाई यह है कि इस चुनाव में वे गुजरात में अपनी पार्टी जदयू की इकलौती सीट गंवा चुके हैं, जिसके बारे में वे कभी बात नहीं करते. उनके एमएलए छोटू भाई वासवा ने इस चुनाव में अपनी नयी पार्टी बनाई है और दो सीटें जीतने जा रहे हैं. इस तरह वे अगले गुजरात विधान सभा में तीसरी बड़ी पार्टी के रूप में स्थापित होने जा रही है.

यह दिलचस्प है कि इस बार के गुजरात विधान सभा चुनाव में हार्दिक पटेल, जिग्नेश और अल्पेश जैसे नेताओं की चर्चा खूब हुई जो अपनी जातीय अस्मिता की वजह से मीडिया में लगातार चर्चा में थे. मगर छोटू भाई वासवा की चर्चा नहीं के बराबर हुई जिनकी आदिवासियों के बीच ठीक-ठाक पैठ थी. यह बात नतीजों से भी साबित हो रही है.

छोटू वासवा की राज्य के आदिवासी प्रभुत्व वाले जिले भड़ूच में अच्छी पकड़ हमेशा से रही है. इसी वजह से वे अपने क्षेत्र झगाड़िया विधान सभा से पांच बार चुनाव जीत चुके हैं. जिसमें आखिरी दो बार वे जदयू के टिकट पर चुनाव जीते हैं. हालांकि जदयू में उन्हें शरद गुट का व्यक्ति माना जाता रहा है. इसलिए अहमद पटेल के राज्य सभा चुनाव के वक्त उन्होंने पार्टी लाइन का उल्लंघन करते हुए पटेल को वोट दिया.

इस चुनाव में उन्होंने भारतीय ट्राइबल पार्टी का गठन किया और कांग्रेस के साथ सीटों का गठजोड़ किया. उन्हें पांच सीटें दी गयीं और उनके एक उम्मीदवार को कांग्रेस ने अपने कोटे से मैदान में उतारा. अब नतीजा सामने है. उनकी दो सीटों पर बढ़त है. पहले सीट झगाड़िया पर खुद वे काफी आगे चल रहे हैं. जीत तय है. दूसरी सीट डेडियापाड़ा में उनके बेटे उनके बेटे महेश वासवा भी तीन हजार से अधिक वोटों से आगे हैं. अगर यह बढ़त सीटों में बदल जाती है तो वे भाजपा और कांग्रेस के बाद गुजरात की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी होंगे.

दिलचस्प है कि झगाड़िया सीट पर पिछले बार तक कब्जा रखने वाली पार्टी जदयू इस बार मुकाबले में भी नहीं है. उसने छोटू वासवा को हराने के लिए छोटू वासवा नाम से ही एक उम्मीदवार को खड़ा किया था. मगर उसका यह ट्रिक भी काम नहीं आया.

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