‘नई वाली हिंदी’ इस बार भी नहीं आयेगी पटना

कल से पटना के ज्ञान भवन में पटना पुस्तक मेला की शुरुआत हो रही है. इस मेले को लेकर कई तरह की खबरें कही जा रही है. एक तरफ पहली बार बिहार सरकार इस मेले में साझीदार बना है. फिर अगले साल से इंटरनेशनल होने की भी बात है. तो दूसरी तरफ मेले का धूप से सरकारी ज्ञान भवन की छांव में चला जाना आम पाठकों को अखर रहा है और स्टॉल कम होने की भी बातें हैं. मगर पटना के साहित्य पाठकों के लिए इस बार भी वही निराश करने वाली खबर है.

पिछले कुछ सालों में नीला स्कार्फ, बकर पुराण, बनारस टॉकीज, मसाला चाय, यूपी 65, मुसाफिर कैफे जैसे एक से बढ़ कर एक बेस्टसेलर देने वाला प्रकाशन हिंद युग्म इस बार भी पटना पुस्तक मेले में नहीं आ रहा. मतलब यह कि इन दिनों जिन बेस्ट सेलरों की चर्चा हर जगह है और जो युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं, वे किसी स्टॉल पर दिख जायें इसकी गारंटी नहीं. इस बार भी राजकमल, वाणी, ज्ञानपीठ, साहित्य अकादमी जैसे पुराने स्टॉल ही पाठकों को नजर आयेंगे.

बिहार कवरेज से बातचीत में हिंद युग्म के संचालक शैलेष भारतवासी कहते हैं, संसाधनों की कमी की वजह से हम इस बार भी पटना नहीं जा पा रहे. हालांकि हम जानते हैं कि वहां हमारे पाठकों की संख्या काफी अधिक है. वैसे हमारी योजना है कि 2018 में हम जरूर पटना पुस्तक मेला में शिरकत करेंगे.

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