तीन पत्रकार, तीन किताबें, तीनों में बिहार की अलग-अलग कहानियां

पटना बुक फेयर का आखिरी रविवार. आज बिहार के तीन पत्रकारों की किताबें एक साथ एक मंच पर रिलीज होगी. ये तीनों किताबें बिहार की अलग-अलग कहानियां लेकर आ रही हैं. तीनों का लोकापर्ण एक ही मंच से होगा, जिस पर दो वरिष्ठ कवि और एक इतिहास लेखक भी मौजूद रहेंगे. कार्यक्रम दोपहर एक बजे से दो बजे तक चलेगा.

पुस्तक मेला के आखिरी रविवार को यह संयोग हिंदी के सबसे प्रतिष्ठित प्रकाशक राजकमल प्रकाशन की वजह से बना है. वे इस मेले में बिहार के तीन पत्रकारों की किताब लेकर आ रहे हैं. इनमें से दो वरिष्ठ पत्रकार हैं और एक युवा.

पहली किताब वरिष्ठ पत्रकार विकास कुमार झा की गयासुर संधान है. नाम से ही जाहिर है, यह उपन्यास गया शहर पर आधारित है. विकास कुमार झा को हम सब अपने जमाने की बेहतरीन राजनीतिक पत्रिका माया में उनकी लंबी पत्रकारिता की वजह से जानते हैं. और उस दौर में माया पढ़ने वाला कोई भी पाठक उन्हें भूल नहीं सकता. पहले भी उन्होंने मैकलुसकीगंज जैसा शानदार नावेल लिखा है, जो झारखंड में एंग्लो इंडियन्स की बस्ती की कहानी है. पिछले साल उनकी एक नई किताब वर्षावन की रूपरेखा आयी थी.

दूसरी किताब लेखक-पत्रकार अवधेश प्रीत की है. इस उपन्यास का नाम है अशोकराज पथ. हां, वही पटना का मशहूर अशोकराज पथ. हिंदुस्तान, पटना के मैगजीन एडिटर रह चुके अवधेश प्रीत की साहित्य जगत में भी बराबर की पैठ रही है. उनके कई कथा संग्रह पहले ही आ चुके हैं और लोगों द्वारा पसंद किये गये हैं. अब वे पुराने पटना की मशहूर सड़क अशोकराज पथ को केंद्र बनाकर एक उपन्यास लेकर आ रहे हैं.

तीसरी किताब पत्रकार पुष्यमित्र की है. उनकी किताब ‘जब नील का दाग मिटा, चम्पराण 1917’ चम्पारण के नील विद्रोह की इतिहास गाथा है. वे प्रभात खबर में घुमंतू पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इसी साल उनका नावेल रेडियो कोसी प्रकाशित हुआ था, जिसे पाठकों ने काफी पसंद किया था. इससे पहले वे सुन्नैर नैका नावेल और फरकिया रिपोर्ताज लिख चुके हैं, जो ई-बुक के रूप में प्रकाशित है.

ज्ञान भवन में आयोजित पटना पुस्तक मेला में इन तीन किताबों का विमोचन दोपहर एक बजे से दो बजे के बीच होगा. इस पैक्ड प्रोग्राम में किताबों का विमोचन वरिष्ठ कवि लीलाधार मंडलोई, अरुण कमल और इतिहास अध्येता भैरवलाल दास करेंगे.

Spread the love

Related posts