झारखंड के मंत्री की बिहार की अर्थव्यवस्था पर किताब, आज पटना में होगी लॉंच

आज से पटना पुस्तक मेले की शुरुआत हो रही है. इसे पटना पुस्तक मेला, 2017 भी नहीं कह सकते हैं, क्योंकि यह साल की शुरुआत में लग चुका है. हां, पटना पुस्तक मेला, 2017 पार्ट-2 कह सकते हैं. बिहार सरकार के सहयोग से आज शुरू हो रहे इस पुस्तक मेले में झारखंड के एक मंत्री की लिखी किताब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों लॉंच हो रही है. उद्घाटन समारोह में. इस समारोह में मुख्य अतिथि हिंदी-मैथिली की लेखिका उषा किरण खान होंगी.

समय का लेख. जी हां, यही नाम है उस किताब का जिसे झारखंड के संसदीय कार्य, खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले के मंत्री सरयू राय ने लिखा है. पुस्तक में बिहार से जुड़े आर्थिक मसले पर उनके आलेख हैं जो 1991-92 के दौरान पटना से प्रकाशित होने वाले नवभारत टाइम्स अखबार में छपे थे. सरयू राय मूलतः बिहार के बक्सर जिले के रहने वाले हैं और एक समय में बिहार की राजनीति में उनकी गहरी पैठ थी. झारखंड अलग होने के बाद वे झारखंड चले गये. अभी वहां जमशेदपुर के विधायक हैं.

जो लोग सरयू राय को जानते हैं, वे यह भी जानते हैं कि राजनीति में रहते हुए भी वे बागी मिजाज के नेता रहे हैं. तमाम काबिलियत के बावजूद उनकी खुद की पार्टी भाजपा भी उन्हें अधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने से परहेज करती है. एक ओर उन्होंने बिहार के वर्ल्ड फेमस चारा घोटाला का खुलासा किया तो दूसरी ओर मधु कोड़ा के राज में हुए लूट का भंडाफोड़ करने का श्रेय भी उन्हीं को है. अभी जब झारखंड में एक बच्ची भात-भात कहते हुए मर गयी तो उस मौके पर अपने ही सरकार को घेरने में उन्होंने वक्त नहीं लगाया.

इस पुस्तक में उनके जो आलेख छपे में हैं, उनका आज के परिप्रेक्ष्य में कितना महत्व है, यह इसे पढ़ने के बाद ही पता चलेगा. क्योंकि पुस्तक में प्रकाशित आलेख 25-26 साल पुराने हैं. यह वह वक्त था जब लालू जी ने सत्ता संभाली थी. हां, यह जरूर समझ में आ सकता है कि कांग्रेस के लंबे और अस्थिर शासन के बाद जो राज्य समाजवादियों को सौगात में मिला उसकी आर्थिक हालत कैसी थी. इस किताब को ‘प्रभात प्रकाशन’ ने प्रकाशित किया है. लेखों के संकलन और संपादन में बिहार के वरिष्ठ पत्रकार और जगजीवन राम संसदीय शोध संस्थान के निदेशक श्रीकांत एवं पत्रकार आनंद कुमार ने सहयोग किया है. पुस्तक की भूमिका आद्री के सदस्य सचिव डॉ शैवाल गुप्ता ने लिखी है. नवभारत टाइम्स के तत्कालीन संपादक अरुण रंजन की टिप्पणी भी पुस्तक में संकलित है. इससे पूर्व भी श्री सरयू राय की तीन पुस्तकें आ चुकी हैं- ‘अभिव्यक्ति’,  ‘मधु कोड़ा : लूट राज’  तथा ‘चारा चोर : खजाना चोर’.

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