जब राशन कार्ड के लिए मारे-मारे फिरते हैं शहीदों के बच्चे #धमदाहागोलीकांड

बासुमित्र

सन 1942, जब देश में अहसयोग आंदोलन पूरे चरम पर था, लोग अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा लगा रहे थे. उस समय आंदोलन का प्रभाव पूर्णियां जिले के धमदाहा और आसपास के क्षेत्रो में भी था. धमदाहा में भी 25 अगस्त 1942 को अंग्रेजों भारत छोड़ो नारे की गूंज थी. लोग तिरंगा फहराने और थाने को जलाने के लिए आगे बढ़ रहे थे तभी अचानक ब्रितानी पुलिस ने क्रांतिकारियों को रोकने के लिए फायरिंग का सहारा लिया, पुलिस फायरिंग में 14 लोग शहीद हुए और न जाने कितने लोग घायल.

उसी शहीद में मेरे पिता बालो मार्कण्डेय भी शामिल थे. उस समय मेरी उम्र महज एक साल की थी. अपने पिता का चेहरा याद भी नहीं. अपने शहीद पिता को याद करते हुए 77 साल के बूढ़े सीताराम मुनि की आंखे भर आती है. धमदाहा दक्षिण पंचायत के ढोकवा निवासी सीताराम मुनि बताते हैं कि शहीद के परिजनों की कौन सुध लेता है. न राशन कार्ड है, न सरकार के किसी योजाना का लाभ, सिर्फ सुनते आ रहे हैं कि सरकार हर घर में शौचालय बना रही है और सबको रहने के लिए आवास भी दे रही है.

हमलोगों को तो यह भी नहीं पता है कि आखिर हमलोग सरकार के किस लिस्ट में शामिल हैं. न तो हमारा नाम एपीएल लिस्ट में हैं, न बीपीएल लिस्ट में. बस 15 अगस्त, 26 जनवरी और शहीद दिवस पर हमें याद किया जाता है. हां, पिछली साल चंपारण सत्याग्रह के नाम पर कुछ अधिकारी घर आकर सम्मानित किये थे. प्रशासन की बेरुखी के कारण आज भी कई शहीदों के परिजन बदहाली और गुमनामी की जिंदगी जीने को मजबूर हैं. अगर समय रहते उन शहीदों के परिजनों की सुध न ली गई तो आने वाले समय में लोग उनको याद करने वाला कोई नहीं होगा.

मजदूरी कर के जी रहे है शहीदों के परिजन

धमदाहा गोली कांड में 14 शहीदों में से एक ढोकवा निवासी बालो मारकंडेय के परिवार वालों की स्थिति काफी दयनीय है. बालो मारकंडेय के पुत्र सीताराम मंडल बूढ़े हो चले है. घर में दो जवान बेटा भी है. परिजनों के आजीविका का साधन मजदूरी है. काम मिलता है तो घर का चूल्हा जलता है और अगर मजदूरी नहीं मिली तो काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. सरकार के द्वारा पेंशन मिलता है लेकिन वह इतना नहीं कि पूरे घर का खर्च चल सके.
सीताराम अपने पिता को याद करते हुए कहते हैं कि उस समय एक साल का छोटा बच्चा था. पता ही नहीं चला कि क्या हो रहा है. बाबु देश लय मैर गेलै, अखैन सरकार खाली कागज भेजी कै बजाय लै छै. अखैन तक आर दोसर कोनौ फायदा नै मिलल छै. हमर नाम नै एपीएल लिस्ट मै छै आर नै बीपीएल लिस्ट मै. मुखिया से लेकै सब लंग गेलीयै कियो सुनै बला नै छै. दुनू बेटा मजदूरी करै छै. काज भेटैय छै त ठीक नय ता कोने जिंदगी जी लै छियै.
आस-पास के लोगों को आवास योजना, शौचालय का लाभ मिल रहा है. हमारे पास अधिकारी-कर्मचारी को देने के लिए पैसा रहे तब न.

किस काम का ताम्र पत्र

सीताराम मंडल बताते हैं कि आजादी की 25वीं वर्षगांठ पर सरकार ने शहीदों के परिजनों को ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था. ताम्रपत्र मिलने के बाद लगा था कि जिस तरह सरकार ने ताम्रपत्र देकर शहीदों की सुध ली है वैसे ही आगे चल कर सरकार हमलोगों की सुध लेगी. लेकिन आज तक शहीदों के परिजनों को न तो किसी सरकारी योजना का लाभ मिला और न हीं कोई विशेष फायदा. उनके लिए तामपत्र दिखाने और अपने परिजन जिन्होंने शहादत दी थी उनको याद करने का जरिया भर है. सीताराम मारकंडेय ताम्रपत्र की बात पर कहते है “की काज के छै ई, आय तक इ तामपत्र के खाली ढोयये रहल छियै. जहिया भैटल रहै त लागल रहै कि हमर पिता जी के शहादत बेकार नैय गेलै. हमरा त नैय हमर बाल-बच्चा लै किछो फायदा भेटतै, लेकिन कोनो फायदा नै भेटलैय, खाली ताम्रपत्र से कोनौ पेट भरैय छै कि. इ ताम्रपत्र हमरा लै कि काज के छैय. सरकार हमरा सब के बच्चा लै कोने उपाय करतियै तब न.

धमदाहा में थाना गोली कांड के शहीदो के नाम
नाम                                  पिता का नाम                            ग्राम
1. निवास पाण्डे –             स्व. रामानंद पाण्डे                      बघवा
२. जयमंगल सिंह –           स्व. दरबी सिंह                          चंदवा
3. योगेन्द्र नारायण सिंह   स्व . गेना सिंह                          वंशी पुरान्दाहा
4. परमेश्वर दास –           स्व. चिचाय दास                      रूपसपुर
5. शेख इशहाक –            स्व . जीबू नदाफ –                    धमदाहा
6. लखी भगत –              स्व . मंगल भगत –                   हरिनकोल
7. मोती मंडल –               स्व. पंची मंडल –                      चन्दरही
8. बालो मारकंडेय-          स्व. पूरण मारकंडेय-                  ढोकवा
9. रामेश्वेर पासवान –     स्व.लालू पासवान –                   ढोकवा
10. बाबू लाल मंडल –      स्व. गर्भू मंडल –                        बजरहा
11. हेम नारायण यादव –  स्व. कुंजो गोप –                        बरेना
12. भागवत महतो –        स्व. लालू धानुक –                     चम्पावती
13. बालेश्वर पासवान –  स्व. मोहन पासवान –                डिपोटी पुरान्दाहा
14. कुसुम लाल आर्य-        स्व. बाबुलाल आर्य –               बरकोना

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