जनेऊधारी हिन्दू बनने में तीन साल लेट हो गये राहुल गांधी

अजीत भारती

(बकर पुराण वाले अजीत भारती से आप सहमत हो सकते हैं, असहमत हो सकते हैं, मगर उन्हें इग्नोर नहीं कर सकते.)

यूँ तो मुझे इससे घंटा फ़र्क़ नहीं पड़ता कि कौन क्या है, लेकिन ख़बरों के नज़रिए से देखते हुए लिख रहा हूँ. राहुल गाँधी का नाम सोमनाथ मंदिर की रजिस्टर में ‘नॉन-हिंदू’ वाली लिस्ट में है, उनके हस्ताक्षर के साथ. ऐसा कहा जा रहा है. अब इस पर ‘द क्विंट’ का पूछना है कि मंदिर में ऐसी लिस्ट ही क्यों है! सही बात है तमाम धार्मिक स्थलों में ग़ैर-धर्मी लोगों के लिए तमाम नियमावली पड़ी होती है, लेकिन मंदिर में ऐसी लिस्ट नहीं होनी चाहिए.

क्विंट ने ये भी पूछा है कि ये ख़बर ही क्यों बन जाती है. जैसे कि उन्हें पता ही नहीं गुजरात में चुनाव हैं, और उन्हीं की वेबसाइट तमाम हिन्दू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद के ख़बरों से सनी होती है. लोकिन राहुल गाँधी वाली ख़बर, ख़बर क्यों है, ये पूछा जा रहा है.
लेकिन ये ख़बर लिखने से पहले बेचारे अपने आकाओं से पूछ तो लेते कि उनका क्या पोजिशन है! काहे कि कॉन्ग्रेस अब ये कह रही है कि राहुल गाँधी ‘हिन्दू ही नहीं, जनेऊधारी हिन्दू हैं.’

देखिए थोड़ी गड़बड़ हो गई अब! जो पार्टी, और जिसके सबसे बड़े नेता हिन्दू और उसके तमाम प्रतीक चिह्नों को लेकर ट्विटरबाजी से लेकर प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके गरियाते नज़र आते हैं, वहाँ से ये बयान आना बताता है कि हिन्दू होना कितना महत्वपूर्ण हो गया है. लेकिन, जैसे कि ट्विटर के चुटकुलेबाजी और शेरो-शायरी में राहुल गाँधी तीन साल देर से रफ़्तार पकड़ रहे हैं, वैसे ही हिन्दू बनने में भी थोड़ी देर हो गई.

अगर इसी तरह से चुनाव हारते रहे तो इनके झंडे में गाय-बछड़ा भी वापसी कर सकता है और दो साल बाद ये लोग यह बात भी कहते नज़र आ सकते हैं कि ‘हिन्दू भाइयो! भाजपा ने तो राम मंदिर नहीं बनाया, हमारी सरकार आने दीजिए, हम एक भव्य मंदिर बनाएँगे.’ तब ‘द क्विंट’ ये ख़बर छापेगा कि ‘आखिर किसी नेता द्वारा एक धर्मस्थल बनवाने के वादे में ख़बर क्या है!

राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस ‘मैं देर करता नहीं, देर हो जाती है’ टाइप स्थिति में है. इन्होंने जनेऊ और हिन्दुओं को इतना कोस लिया है कि वापसी आसान नहीं होगी, वो भी इसी राह से चलकर. मैं 2012 में ताजमहल गया था, और मेरे सर पर ‘जय श्री राम’ वाली गमछी थी। उसे पुलिस ने उतरवा लिया क्योंकि किसी अलिखित नियम में ऐसा कहा गया था.

मंदिर, मस्जिद, चर्च आदि सबके अपने नियम होते हैं. रजिस्टर में अगर कॉलम है तो कोई बड़ी बात नहीं है. उस आँकड़े के कई कारण और प्रयोजन हो सकते हैं.

बड़ी बात ये है कि राहुल गाँधी जनेऊधारी हिन्दू हैं.

(अजीत भारती के फेसबुक पोस्ट से साभार)

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